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चार घंटे हिरासत में रहे ओसवाल मिल के अफसर
नवाबगंज/बरेली
Updated Wed, 10 Dec 2014 08:19 PM IST
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डीएम के आदेश के बाद भी ओसवाल चीनी मिल नहीं चलाना प्रबंधन को महंगा पड़ रहा है। एसडीएम के आदेश पर बुधवार को मिल के जीएम केन और गन्ना प्रबंधक को हिरासत में ले लिया गया। दोनों अधिकारी तहसील परिसर में गन्ना किसानों की बैठक में पहुंचे थे। पुलिस उन्हें कोतवाली ले आई।
चार घंटे बाद ही दोनों की रिहाई हो सकी।
एसडीएम रजनीश राय ने बुधवार को मिल प्रबंधन और किसानों की बैठक बुलाई थी। इसमें ओसवाल मिल के जीएम केन एसपी ओझा, गन्ना प्रबंधक सरदार गुरुदेव सिंह, बरखेड़ा चीनी मिल के जीएम धर्मेंद्र मल्होत्रा और पीलीभीत चीनी मिल के अफसरों ने भाग लिया। एसडीएम और जिला गन्ना अधिकारी शैलेश मौर्य ने ओसवाल मिल के अफसरों से मिल चालू न कराए जाने के बारे मेें पूछा तो जीएम एसपी ओझा ने 17 दिसंबर से मिल शुरू होने की बात कही। इस पर एसडीएम नाराज हो गए।
उन्होंने हर हाल में 12 दिसंबर से इंडेंट जारी करने को कहा लेकिन जीएम इस पर राजी नहीं हुए। बैठक में ही एसडीएम ने डीएम संजय कुमार को फोन पर इस बात की जानकारी दी। इसके बाद एसडीएम ने पुलिस बुला ली और जीएम और गन्ना प्रबंधक को हिरासत में लेने के आदेश दिए। चौकी प्रभारी हरगोविंद सिंह और उपनिरीक्षक देवल दोनों को कोतवाली ले गए।
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दोनों अफसरों की गिरफ्तारी के बाद मिल प्रबंधन के होश उड़ गए। चार घंटे तक कोतवाली में गहमागहमी रही। बाद में मिल के अफसर 12 और 13 दिसंबर को इंडेंट जारी किए जाने पर राजी हो गए। एसडीएम को यह सूचना दी गई तो दोनों को रिहा कर दिया गया।
दोनों ही अफसरों की हठधर्मिता से शांति भंग होने का अंदेशा था इसलिए उन्हें गिरफ्तार किया गया। कोतवाली में उनके सुर बदल गए इसलिए अब 12 दिसंबर से मिल के सभी गन्ना खरीद केंद्रों से खरीद शुरू हो जाएगी।
रजनीश राय, एसडीएम
डीएम की चेतावनी को हलके में लिया
चार दिसंबर को जिला मुख्यालय पर हुई बैठक में डीएम संजय कुमार ने 10 दिसंबर तक ओसवाल चीनी मिल के न चलाए जाने पर जीएम को जेल भेजने की चेतावनी दी थी। डीएम की इस चेतावनी का भी मिल के अफसरों पर असर नहीं हुआ।
गन्ना डायवर्ट किए जाने की मांग उठी
समय से ओसवाल चीनी मिल के न चलने से गन्ना किसानों को अपना गन्ना औने-पौने दामों में बेचना पड़ रहा है। इस समय ओसवाल चीनी मिल के पास सिर्फ नौ गन्ना खरीद केंद्र बचे हैं, जबकि क्षेत्र के छह केंद्र पीलीभीत और 14 केंद्र बरखेड़ा चीनी मिल को पहले ही दिए जा चुके हैं।
बैठक में पहुंचे किसान लालता प्रसाद गंगवार, गंगाराम गंगवार, बृजलाल गंगवार, पुरुषोत्तम गंगवार, महेेंद्र गंगवार, बाबूराम गंगवार आदि ने सभी नौ केंद्रों का गन्ना भी दूसरी मिलों को डायवर्ट किए जाने की मांग की। दो घंटे से अधिक समय तक चली बैठक में चेयरमैन अरविंद गंगवार, तहसीलदार मलखान सिंह , समिति के सचिव प्रदीप कुमार यादव, ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक वीरेंद्र नाथ, शिशुपाल सिंह गंगवार भूपराम गंगवार, बाबूराम गंगवार, खेमकरन लाल आदि मौजूद रहे।
पहले भी हिरासत में लिए जा चुके हैं अफसर
ओसवाल चीनी मिल के अफसरों को कोतवाली थाने के चक्कर लगाना नया मामला नहीं है। दो अफसरों को गन्ना भुगतान न किए जाने पर तत्कालीन एसडीएम प्रेमप्रकाश अंजोर गिरफ्तार करा चुके हैं। उन्हें हाफिजगंज थाने में कई घंटे तक बैठना पड़ा था।
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चार घंटे बाद ही दोनों की रिहाई हो सकी।
एसडीएम रजनीश राय ने बुधवार को मिल प्रबंधन और किसानों की बैठक बुलाई थी। इसमें ओसवाल मिल के जीएम केन एसपी ओझा, गन्ना प्रबंधक सरदार गुरुदेव सिंह, बरखेड़ा चीनी मिल के जीएम धर्मेंद्र मल्होत्रा और पीलीभीत चीनी मिल के अफसरों ने भाग लिया। एसडीएम और जिला गन्ना अधिकारी शैलेश मौर्य ने ओसवाल मिल के अफसरों से मिल चालू न कराए जाने के बारे मेें पूछा तो जीएम एसपी ओझा ने 17 दिसंबर से मिल शुरू होने की बात कही। इस पर एसडीएम नाराज हो गए।
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उन्होंने हर हाल में 12 दिसंबर से इंडेंट जारी करने को कहा लेकिन जीएम इस पर राजी नहीं हुए। बैठक में ही एसडीएम ने डीएम संजय कुमार को फोन पर इस बात की जानकारी दी। इसके बाद एसडीएम ने पुलिस बुला ली और जीएम और गन्ना प्रबंधक को हिरासत में लेने के आदेश दिए। चौकी प्रभारी हरगोविंद सिंह और उपनिरीक्षक देवल दोनों को कोतवाली ले गए।
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दोनों अफसरों की गिरफ्तारी के बाद मिल प्रबंधन के होश उड़ गए। चार घंटे तक कोतवाली में गहमागहमी रही। बाद में मिल के अफसर 12 और 13 दिसंबर को इंडेंट जारी किए जाने पर राजी हो गए। एसडीएम को यह सूचना दी गई तो दोनों को रिहा कर दिया गया।
दोनों ही अफसरों की हठधर्मिता से शांति भंग होने का अंदेशा था इसलिए उन्हें गिरफ्तार किया गया। कोतवाली में उनके सुर बदल गए इसलिए अब 12 दिसंबर से मिल के सभी गन्ना खरीद केंद्रों से खरीद शुरू हो जाएगी।
रजनीश राय, एसडीएम
डीएम की चेतावनी को हलके में लिया
चार दिसंबर को जिला मुख्यालय पर हुई बैठक में डीएम संजय कुमार ने 10 दिसंबर तक ओसवाल चीनी मिल के न चलाए जाने पर जीएम को जेल भेजने की चेतावनी दी थी। डीएम की इस चेतावनी का भी मिल के अफसरों पर असर नहीं हुआ।
गन्ना डायवर्ट किए जाने की मांग उठी
समय से ओसवाल चीनी मिल के न चलने से गन्ना किसानों को अपना गन्ना औने-पौने दामों में बेचना पड़ रहा है। इस समय ओसवाल चीनी मिल के पास सिर्फ नौ गन्ना खरीद केंद्र बचे हैं, जबकि क्षेत्र के छह केंद्र पीलीभीत और 14 केंद्र बरखेड़ा चीनी मिल को पहले ही दिए जा चुके हैं।
बैठक में पहुंचे किसान लालता प्रसाद गंगवार, गंगाराम गंगवार, बृजलाल गंगवार, पुरुषोत्तम गंगवार, महेेंद्र गंगवार, बाबूराम गंगवार आदि ने सभी नौ केंद्रों का गन्ना भी दूसरी मिलों को डायवर्ट किए जाने की मांग की। दो घंटे से अधिक समय तक चली बैठक में चेयरमैन अरविंद गंगवार, तहसीलदार मलखान सिंह , समिति के सचिव प्रदीप कुमार यादव, ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक वीरेंद्र नाथ, शिशुपाल सिंह गंगवार भूपराम गंगवार, बाबूराम गंगवार, खेमकरन लाल आदि मौजूद रहे।
पहले भी हिरासत में लिए जा चुके हैं अफसर
ओसवाल चीनी मिल के अफसरों को कोतवाली थाने के चक्कर लगाना नया मामला नहीं है। दो अफसरों को गन्ना भुगतान न किए जाने पर तत्कालीन एसडीएम प्रेमप्रकाश अंजोर गिरफ्तार करा चुके हैं। उन्हें हाफिजगंज थाने में कई घंटे तक बैठना पड़ा था।