शाहजहांपुर की गांधी कॉलोनी निवासी मेजर आकाश सेन ने कश्मीर के अनंतनाग में सैनिक टुकड़ी का नेतृत्व करते हुए तीन आतंकवादियों को मार गिराया था। इसके बाद अपने साथियों को सुरक्षित शिविर तक पहुंचाया। इसी तरह बंडा निवासी लांसनायक सुखदीप सिंह ने शोपियां में दुश्मनों से लोहा लेते हुए गोलियां खाईं। आतंकी बाबर को मार गिराया। इनकी वीरता ने देश के साथ जिले का भी मस्तक ऊंचा किया। सेना इन्हें सम्मानित करेगी।
वर्तमान में देहरादून में तैनात मेजर आकाश को जून 2014 में सेना में लेफ्टिनेंट पद पर कमीशन मिला था। उन्होंने बताया कि मई 2021 में कश्मीर के अनंतनाग जिले में आतंकवादियों के खिलाफ चलाए गए ऑपरेशन में तीन आतंकवादी मार गिराए थे। उस दौरान सैन्य टुकड़ी का नेतृत्व वही कर रहे थे। इस मुठभेड़ में सैन्य टुकड़ी को सुरक्षित बचाकर सेना शिविर तक लाए। उनका चयन सेना मेडल के लिए किया गया है।
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मेजर आकाश सेन के माता-पिता, छोटे भाई और उनकी पत्नी
- फोटो : अमर उजाला
आकाश पत्नी कृतिका के साथ देहरादून में रह रहे हैं। कृतिका टिहरी के एक कॉलेज में प्रोफेसर हैं। उनके पिता संजीव सेन यहां भावलखेड़ा ब्लॉक के गांव बड़ावन स्थित परिषदीय जूनियर हाईस्कूल में प्रधान अध्यापक के पद पर नियुक्त हैं। मां रामलली सेन गृहिणी हैं। दो दिन पहले ही आकाश यहां घरवालों से मिलकर ड्यूटी पर गए। शुक्रवार को उन्हें सेना मेडल के लिए चुने जाने की सूचना मिली। तभी से परिवार में खुशी की लहर है। उनके माता-पिता समेत छोटे भाई अंकित सेन और उनकी पत्नी स्वाति काफी खुश दिखे।
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मेजर आकाश सेन
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मेजर आकाश ने बताया कि उनकी प्रारंभिक शिक्षा घोड़ाखाल सैनिक स्कूल में हुई है। उस वक्त दादा बलराम सेन जीवित थे। उन्हीं की प्रेरणा से उनका सैनिक स्कूल में दाखिला कराया गया। वर्ष 2010 में आगे की पढ़ाई पुणे स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी से की और वर्ष 2014 में सेना की प्रतियोगी परीक्षा उत्तीर्ण कर लेफ्टिनेंट बन गए।
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लांसनायक सुखदीप सिंह
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राष्ट्रीय राइफल्स में लांसनायक बंडा के गांव अजोधापुर निवासी सुखदीप सिंह को वीरता पुरस्कार (मैन इन डिस्पैच पुरस्कार) से सम्मानित किया जाएगा। सुखदीप सिंह ने बताया कि 12 जनवरी 2022 को कुलगांव शोपिया क्षेत्र में गांव शहपुरा में पाकिस्तानी आतंकवादियों के छिपे होने की सूचना मिली। वह साथियों के साथ गांव में सर्च ऑपरेशन चला रहे थे। एक घर में परिवार के लोगों ने बताया कि घर में कोई नहीं है। तलाशी के दौरान घर में छिपे बैठे पाकिस्तान के आतंकवादी बाबर ने उन पर फायरिंग कर दी। उनको दो गोलियां लगीं। उनके साथी नायक अर्जुन सिंह और सिपाही अमरजीत भी गोली लगने से घायल हो गए। उन लोगों ने बाबर को मौके पर ही मार गिराया।
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परिवार के साथ लांसनायक सुखदीप सिंह
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सुखदीप सिंह का सेना के अस्पताल में पांच महीने तक इलाज चलता रहा। इसके बाद वह ठीक हो सके। इस कार्य के लिए उनको वीरता पुरस्कार के लिए चुना गया है। सुखदीप सिंह इन दिनों देहरादून में तैनात हैं। सुखदीप को वीरता पुरस्कार के लिए चुने जाने पर पिता इकबाल सिंह, मां गुरमीत कौर, पत्नी संदीप कौर, भाई अंग्रेज सिंह, भाभी पलविंदर कौर काफी खुश है। सुखदीप का एक आठ माह का पुत्र है। परिवार के लोग खेती करते हैं।