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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   AQI: Erode-carved roads make pollution level dangerous in five daysAQI: Erode-carved roads make pollution level dangerous in five days

एक्यूआईः उखड़ी-खुदी सड़कों ने पांच ही दिन में प्रदूषण स्तर को फिर बनाया खतरनाक

Sat, 21 Nov 2020 01:17 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 21 Nov 2020 01:17 AM IST
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AQI: Erode-carved roads make pollution level dangerous in five daysAQI: Erode-carved roads make pollution level dangerous in five days
शहर में चलते निर्माण कार्यों के कारण उड़ती धूल। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

दिवाली के अगले दिन बारिश के बाद सामान्य स्तर पर पहुंचा मगर फिर हर तेजी से बढ़ा
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अफसर सतर्क, निर्माण करा रही संस्थाओं को जारी किए नोटिस

बरेली। आखिरकार यह साबित हो गया कि कहीं उखड़ी और कहीं खुदी पड़ी सड़कें शहर में प्रदूषण बढ़ाने की सबसे बड़ी वजह बन रही हैं। यह समस्या किस कदर भयावह रूप अख्त्यिार कर चुकी है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दिवाली के अगले दिन एक्यूआई पर साढ़े चार सौ के पार पहुंचे जिस प्रदूषण को बारिश ने लगभग सामान्य स्तर तक पहुंचा दिया था, वह पांच ही दिन के अंदर फिर ढाई सौ पार पहुंच गया है।
माना जा रहा था कि बारिश होने के बाद 122 एक्यूआई तक गिरे प्रदूषण को फिर पुराने स्तर यानी 300 तक पहुंचने में कम से कम 20 से 30 दिन लगेंगे लेकिन पांच ही दिनों में प्रदूषण स्तर 254 एक्यूआई तक पहुंचने से अफसरों की चिंता भी बढ़ गई है। तापमान और प्रदूषण की स्थिति को ऑनलाइन चेक कर रही वेबसाइट के मुताबिक पिछले पांच दिनों में एक्यूआई का स्तर 20 से 30 प्वॉइंट की दर से रोज बढ़ा है। पर्यावरणविद भी इस पर हैरत में हैं। बरेली कॉलेज के एमिरेट प्रोफेसर डॉ. डीके सक्सेना के मुताबिक चौपुला, सेटेलाइट के साथ शहर में कई दूसरी जगह निर्माण फिर पहले की तरह शुरू हो गए हैं। एनजीटी के मानकों का जरा भी ख्याल नहीं रखा जा रहा है। शहर में जगह-जगह जल रहा कचरा भी प्रदूषण की वजह बन रहा है। बारिश के बाद अगले दिन बचे हुए पटाखे भी भैया दूज तक चलाए गए। सबसे बड़ी वजह शहर की उखड़ी हुई सड़कें हैं। इसी वजह से एक्यूआई पांच दिन में फिर खतरनाक स्थिति तक पहुंच गया।
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ऐसे बढ़ा प्रदूषण

122 सोमवार को
145 मंगलवार को
170 बुधवार को
197 गुरुवार को
254 शुक्रवार को

इम्युनिटी कम करेगा प्रदूषण, बढ़ेगा कोरोना का खतरा

वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. वागीश वैश्य के मुताबिक लगातार प्रदूषित वातावरण में रहने से रोग प्रतिरोधक क्षमता तेजी से प्रभावित होती है। सांस के जरिए जहरीली गैसें शरीर में प्रवेश कर उसे कमजोर बनाती हैं। यह प्रक्रिया बेहद धीमी होती है इसलिए लोगों को इसका एहसास नहीं होता है। आशंका जताई कि सर्दियों में नमी पर जमी धूल के कण पर वायरस भी 72 घंटे से ज्यादा समय तक सक्रिय रह सकते हैं जो संक्रमण का ग्राफ बढ़ा सकते हैं।
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प्रदूषण और संक्रमण दोनों से बचने को मास्क जरूरी

फिजिशियन डॉ. अर्जुन गुप्ता के मुताबिक प्रदूषण का ग्राफ बढ़ने से संक्रमण की दूसरी लहर और घातक होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। लॉकडाउन में स्वच्छ वातावरण की वजह से ही लोग वायरल बीमारियों की चपेट में कम आए। मगर अब सर्दियों में यह आंकड़ा इसलिए बढ़ रहा है क्योंकि रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हो रही है। उन्होंने हर हाल में दो गज की दूरी और मास्क पहनने का सुझाव दिया है।

प्रदूषण का स्तर फिर बढ़ने लगा है। इसे देखते हुए सभी निर्माणदायी संस्थाओं को नोटिस जारी कर एनजीटी के मानकों का पालन करने को कहा गया है। सुधार न होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। - रोहित सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड

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