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ऐसी सजा मिले कि अपराधियों की रूह कांप जाए
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ऐसी सजा मिले कि अपराधियों की रूह कांप जाए
- फोटो : अमर उजाला, बरेली
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डॉक्टर बिटिया दुष्कर्म-हत्याकांड
छात्राओं कहना था कि समाज को शर्मसार करने वाली ऐसी घटनाओं पर अक्सर कोर्ट की लंबी चलने वाली सुनवाई की वजह से पीड़िता को न्याय नहीं मिल पाता है। दुष्कर्मी सुबूतों को मिटाने के लिए पीड़िता के परिवार पर दबाव बनाते हैं। लिहाजा, मानसिक उत्पीड़न और परिवार की जानमाल की रक्षा के लिए कई मामले कोर्ट के बाहर ही निपट जाते हैं। कई मामले वर्षों तक न्याय की उम्मीद में दम तोड़ देते हैं। यह स्थितियां दोषियों को घिनौने कृत्य करने से रोकने के बजाय उनके नापाक इरादों को और मजबूत बनाती हैं। इसलिए ऐसे मामलों में जल्द सुनवाई कर कठोर सजा का प्रावधान होना चाहिए।
कठोर कानून बने और सख्ती से हो पालन
महिलाओं के साथ हो रहे ऐसे घिनौने कृत्य के लिए अपराधियों को सरेआम फांसी की सजा मिलनी चाहिए। क्योंकि बातचीत या जागरूकता अभियान से समाज की सोच नहीं बदलेगी। सख्त कानून बने और कड़ाई से उसका पालन हो, तभी अपराध में कमी आएगी।
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- सुनीता जोशी, प्रधानाचार्या भूड़ कन्या महाविद्यालय
महिलाओं को खुद करनी होगी आत्मरक्षा
पुलिस या कानून के भरोसे रहने से महिला सुरक्षा की उम्मीद करना बेमानी है। शिकायत दर्ज कराने या घटना के बाद एक्शन लेने से अपराधियों में खौफ नहीं पैदा होगा। महिलाएं दुष्कर्मियों को मौत के घाट उतार सकें, इस तरीके की आत्मरक्षा की उन्हें सीख देनी चाहिए। - दीप्ती सक्सेना, बीए फस्ट ईयर
निर्भया को अब तक नहीं मिला इंसाफ
दिल्ली में हुए निर्भया कांड के दोषियों की सुनवाई अब तक चल रही है। सालों तक चलने वाली सुनवाई से न्याय की उम्मीद करना बेकार है। इसलिए इस मामले में दोषियों को सजा देने में देरी न हो। सरकार को चाहिए कि वह दोषियों को सरेआम मौत दे। - उन्नति सिंह, बीए फर्स्ट ईयर
पीड़िता या परिजन करें सजा का फैसला
दोषियों को कौन सी सजा दी जाए इसका फैसला पीड़िता या उसके परिजन करें। इससे दुष्कर्मी को पता होगा कि आगे उसका हश्र क्या होगा। जबकि लंबी सुनवाई के बाद कानून उन्हें सिर्फ कैद की सजा देती है और फिर वह बाहर निकलकर हैवानियत ही करते हैं। - यशी सक्सेना, बीए थर्ड ईयर
महिलाओं में हो आत्मनिर्भरता का गुर
अपराध होने के बाद दोषियों को सजा मिलने से भी पीड़िता की टीस कम नहीं होती। जरूरी है कि महिलाओं में आत्मनिर्भरता और आत्मरक्षा का गुर हो, ताकि वे मौके पर ही मनचलों और शोहदों को सबक सिखा सकें। इससे महिलाएं सशक्त होंगी और अपराध पर अंकुश लगेगा। - अपूर्वा शुक्ला, बीए फर्स्ट ईयर
समाज ही ले फैसला, कैसी मिले सजा
समाज को कलंकित करने वाले अपराधों की सजा क्या होनी चाहिए, कोर्ट के बजाय समाज को निर्णय लेने का अधिकार मिलना चाहिए। क्योंकि वर्षों पुराने कई कानून अब अपराधियों के बचाव का जरिया बन चुके हैं। इसलिए अपराधों कम होने के बजाय बढ़ रहे हैं। - डॉ. जयश्री बाला पांडेय, इंग्लिश डिपार्टमेंट
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भूड़ कन्या महाविद्यालय में हैदराबांद काडं के दोषियों के लिए मांगी सख्त सजा
बरेली। हैदराबाद में महिला डॉक्टर के साथ पहले दरिंदगी और जिंदा जलाकर मार देने की नृशंस घटना ने समाज को आक्रोश से भर दिया है। एक तरफ सरकार के महिला सुरक्षा के दावे पर उंगली उठ रही है, तो दूसरी ओर दुष्कर्मियों को ऐसी कठोर सजा देने की मांग है कि अपराधियों की रूह कांप जाए। महिला सुरक्षा पर मंगलवार को आयोजित अमर उजाला के अपराजिता कार्यक्रम में भूड़ कन्या महाविद्यालय की छात्राओं ने फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाकर तेजी से मामले में सुनवाई कर दोषियों को सरेआम चौराहा पर फांसी पर लटकाने की मांग की है।छात्राओं कहना था कि समाज को शर्मसार करने वाली ऐसी घटनाओं पर अक्सर कोर्ट की लंबी चलने वाली सुनवाई की वजह से पीड़िता को न्याय नहीं मिल पाता है। दुष्कर्मी सुबूतों को मिटाने के लिए पीड़िता के परिवार पर दबाव बनाते हैं। लिहाजा, मानसिक उत्पीड़न और परिवार की जानमाल की रक्षा के लिए कई मामले कोर्ट के बाहर ही निपट जाते हैं। कई मामले वर्षों तक न्याय की उम्मीद में दम तोड़ देते हैं। यह स्थितियां दोषियों को घिनौने कृत्य करने से रोकने के बजाय उनके नापाक इरादों को और मजबूत बनाती हैं। इसलिए ऐसे मामलों में जल्द सुनवाई कर कठोर सजा का प्रावधान होना चाहिए।
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कठोर कानून बने और सख्ती से हो पालन
महिलाओं के साथ हो रहे ऐसे घिनौने कृत्य के लिए अपराधियों को सरेआम फांसी की सजा मिलनी चाहिए। क्योंकि बातचीत या जागरूकता अभियान से समाज की सोच नहीं बदलेगी। सख्त कानून बने और कड़ाई से उसका पालन हो, तभी अपराध में कमी आएगी।
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- सुनीता जोशी, प्रधानाचार्या भूड़ कन्या महाविद्यालय
महिलाओं को खुद करनी होगी आत्मरक्षा
पुलिस या कानून के भरोसे रहने से महिला सुरक्षा की उम्मीद करना बेमानी है। शिकायत दर्ज कराने या घटना के बाद एक्शन लेने से अपराधियों में खौफ नहीं पैदा होगा। महिलाएं दुष्कर्मियों को मौत के घाट उतार सकें, इस तरीके की आत्मरक्षा की उन्हें सीख देनी चाहिए। - दीप्ती सक्सेना, बीए फस्ट ईयर
निर्भया को अब तक नहीं मिला इंसाफ
दिल्ली में हुए निर्भया कांड के दोषियों की सुनवाई अब तक चल रही है। सालों तक चलने वाली सुनवाई से न्याय की उम्मीद करना बेकार है। इसलिए इस मामले में दोषियों को सजा देने में देरी न हो। सरकार को चाहिए कि वह दोषियों को सरेआम मौत दे। - उन्नति सिंह, बीए फर्स्ट ईयर
पीड़िता या परिजन करें सजा का फैसला
दोषियों को कौन सी सजा दी जाए इसका फैसला पीड़िता या उसके परिजन करें। इससे दुष्कर्मी को पता होगा कि आगे उसका हश्र क्या होगा। जबकि लंबी सुनवाई के बाद कानून उन्हें सिर्फ कैद की सजा देती है और फिर वह बाहर निकलकर हैवानियत ही करते हैं। - यशी सक्सेना, बीए थर्ड ईयर
महिलाओं में हो आत्मनिर्भरता का गुर
अपराध होने के बाद दोषियों को सजा मिलने से भी पीड़िता की टीस कम नहीं होती। जरूरी है कि महिलाओं में आत्मनिर्भरता और आत्मरक्षा का गुर हो, ताकि वे मौके पर ही मनचलों और शोहदों को सबक सिखा सकें। इससे महिलाएं सशक्त होंगी और अपराध पर अंकुश लगेगा। - अपूर्वा शुक्ला, बीए फर्स्ट ईयर
समाज ही ले फैसला, कैसी मिले सजा
समाज को कलंकित करने वाले अपराधों की सजा क्या होनी चाहिए, कोर्ट के बजाय समाज को निर्णय लेने का अधिकार मिलना चाहिए। क्योंकि वर्षों पुराने कई कानून अब अपराधियों के बचाव का जरिया बन चुके हैं। इसलिए अपराधों कम होने के बजाय बढ़ रहे हैं। - डॉ. जयश्री बाला पांडेय, इंग्लिश डिपार्टमेंट