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अधिकारों के प्रति जागरूक होकर बेटियां बन रहीं ‘अपराजिता’
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अधिकारों के प्रति जागरूक होकर बेटियां बन रहीं ‘अपराजिता’
- फोटो : अमर उजाला, बरेली
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बरेली। समाज की पुरातनपंथी सोच हावी होने से बेटियों को बेटों से कम आंका जाता है, जबकि वर्तमान समय में बेटियां किसी भी क्षेत्र में बेटों से कम नहीं। वे त्रेतायुग में ‘सीता’ बनकर कुशल गृहिणी का परिचय देती हैं तो वहीं कलयुग में ‘निर्मला सीतारमण’ बन देश की अर्थव्यवस्था की बागडोर भी संभालती हैं। ये विचार अमर उजाला अपराजिता ‘100 मिलियन स्माइल्स’ मुहिम के तहत गुरुवार को मॉडल टाउन स्थित श्री गुरुनानक रिक्खी सिंह इंटर कॉलेज में आयोजित निबंध प्रतियोगिता में छात्राओं ने बेबाकी से रखे। निबंध प्रतियोगिता में छात्राओं ने बढ़चढ़कर प्रतिभाग किया।
प्रथम स्थान पर विजेता रहीं निखार धांगर ने कहा कि पहले महिलाएं गुलामी की बेड़ियों में कैद थीं, लेकिन अब वे राष्ट्रीय स्तर पर देश के विकास में अपना योगदान दे रही हैं। कल्पना चावला, गीता फोगाट, साक्षी मलिक, पीवी सिंधु, दुतीचंद, साइना नेहवाल, मिताली राज मिसाल बनकर महिलाओं के अपराजिता होने का परिचय देती हैं। दूसरे स्थान पर रहीं दिव्यांशी का कहना था कि अमर उजाला की ओर से चलाई जा रही अपराजिता मुहिम महिलाओं के विकास के नए आयाम खोल रही है। महिला अधिकारों की जानकारी देकर, कानून से मिल रहे संरक्षण के प्रति जागरूक करने की पहल को उन्होंने सराहा। तीसरे स्थान पर रहीं दीक्षा ने कार्यस्थल और फील्ड वर्क के दौरान महिलाओं के सुरक्षा के बाबत किए गए दावों पर चिंता जताई। उन्होंने समाज को सोच बदलने और महिलाओं के लिए सुरक्षित समाज देने का सुझाव दिया।
शेयर करने से ही दूर होंगी समस्याएं
प्रतियोगिता संपन्न होने के बाद प्रधानाचार्य रचना अरोड़ा ने छात्राओं को किसी भी तरह की समस्या होने पर उसे परिवार और शिक्षिकाओं से शेयर करने का सुझाव दिया। शिक्षिका गुरजीत कौर, पूजा अरोरा ने छात्राओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने और जरूरत पर उसका उपयोग करने की सीख दी। यहां प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान पर रहीं छात्राओं के अलावा नेहा कश्यप और शाहनूर को सांत्वना प्रमाण पत्र प्रदान दिए गए। छात्राओं ने अपराजिता अभियान के तहत संकल्प लिया।
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प्रथम स्थान पर विजेता रहीं निखार धांगर ने कहा कि पहले महिलाएं गुलामी की बेड़ियों में कैद थीं, लेकिन अब वे राष्ट्रीय स्तर पर देश के विकास में अपना योगदान दे रही हैं। कल्पना चावला, गीता फोगाट, साक्षी मलिक, पीवी सिंधु, दुतीचंद, साइना नेहवाल, मिताली राज मिसाल बनकर महिलाओं के अपराजिता होने का परिचय देती हैं। दूसरे स्थान पर रहीं दिव्यांशी का कहना था कि अमर उजाला की ओर से चलाई जा रही अपराजिता मुहिम महिलाओं के विकास के नए आयाम खोल रही है। महिला अधिकारों की जानकारी देकर, कानून से मिल रहे संरक्षण के प्रति जागरूक करने की पहल को उन्होंने सराहा। तीसरे स्थान पर रहीं दीक्षा ने कार्यस्थल और फील्ड वर्क के दौरान महिलाओं के सुरक्षा के बाबत किए गए दावों पर चिंता जताई। उन्होंने समाज को सोच बदलने और महिलाओं के लिए सुरक्षित समाज देने का सुझाव दिया।
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शेयर करने से ही दूर होंगी समस्याएं
प्रतियोगिता संपन्न होने के बाद प्रधानाचार्य रचना अरोड़ा ने छात्राओं को किसी भी तरह की समस्या होने पर उसे परिवार और शिक्षिकाओं से शेयर करने का सुझाव दिया। शिक्षिका गुरजीत कौर, पूजा अरोरा ने छात्राओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने और जरूरत पर उसका उपयोग करने की सीख दी। यहां प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान पर रहीं छात्राओं के अलावा नेहा कश्यप और शाहनूर को सांत्वना प्रमाण पत्र प्रदान दिए गए। छात्राओं ने अपराजिता अभियान के तहत संकल्प लिया।
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