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हर्बल मिश्रण से जीवाणुओं से लड़ने में फिर सक्षम होंगी एंटीबायोटिक दवाएं

Thu, 13 Aug 2020 02:11 AM IST
बरेली ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Published by: बरेली ब्यूरो Updated Thu, 13 Aug 2020 02:11 AM IST
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Antibiotics will again be able to fight bacteria with herbal mixtureAntibiotics will again be able to fight bacteria with herbal mixture
आईवीआरआई - फोटो : सोशल नेटवर्क

आईवीआरआई में शुरू हुआ शोध, शरीर के 35 फीसदी जीवाणुओं पर बेअसर हो चुकी हैं एंटीबायोटिक दवाएं
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शोध की दिशा तय करने को 28 अगस्त को वेबिनार में शामिल होंगे देश के प्रमुख वैज्ञानिक

बरेली। मानव शरीर में पाए जाने वाले 35 फीसदी जीवाणुओं पर एंटीबायोटिक दवाओं के काफी हद तक बेअसर होने की पुष्टि के बाद भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान यानी आईवीआरआई में एंटीबायोटिक के साथ हर्बल दवाओं का मिश्रण कर उसे दोबारा जीवाणुओं से लड़ने में कारगर बनाने के लिए शोध शुरू किया गया है। संस्थान के महामारी रोग विभाग की अगुवाई में कई विभाग इस शोध में जुटे हुए हैं। 28 अगस्त को एक वेबिनार भी होने जा रहा है जिसमें देश के प्रमुख वैज्ञानिक इस शोध की दिशा तय करने के लिए मंथन करेंगे।
आईवीआरआई के महामारी रोग विभाग के विभागाध्यक्ष व प्रधान वैज्ञानिक डॉ. भोजराज सिंह के मुताबिक इंसानों के आने से हजारों-लाखों साल पहले इस दुनिया में आ चुके जीवाणुओं की क्षमताएं समय के साथ लगातार बदल रही हैं। यह विश्वव्यापी चिंता का विषय है कि करीब 35 प्रतिशत जीवाणुओं पर एंटीबायोटिक दवाएं करीब-करीब बेअसर हो चुकी हैं। जाहिर है कि इससे जीवाणुओं का संक्रमण रोकना आने वाले समय में बड़ी चुनौती साबित होगा। जीवाणुओं से होने वाले बुखार, डायरिया, निमोनिया, फोड़े जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज करना मुश्किल हो जाएगा या इतना महंगा होगा कि आम आदमी के लिए इलाज करा पाना ही संभव नहीं होगा।
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डॉ. भोजराज के मुताबिक संस्थान में महामारी रोग विभाग के साथ मेडिसिन, जीवाणु विभाग, खाद्य संरक्षा आदि कई विभाग मिलकर काफी समय से शोध कर रहे हैं ताकि जीवाणुओं से लड़ने के लिए नए विकल्प तलाशे जा सकें। शोध में डॉ. अखिलेश कुमार, डॉ. रीना मुखर्जी, डॉ. सीमरन बंधोपाध्याय समेत कई वैज्ञानिक प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। फिलहाल उम्मीद की एक किरण यह है कि एंटीबायोटिक में हर्बल दवाओं का मिश्रित कर उसे फिर जीवाणुओं से लड़ने में सक्षम बनाया जा सकता है। 29 अगस्त पर इस पर मंथन के लिए सरदार वल्लभ भाई पटेल विश्वविद्यालय में वेबिनार जा रहा है। इसमें वह खुद भी शामिल होंगे।
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मां से आते हैं 90 फीसदी जीवाणु

डॉ. भोजराज का कहना है कि पैदा होने वाले किसी भी शिशु के शरीर में 90 फीसदी जीवाणु मां के शरीर से ही साथ आते हैं। चूंकि शरीर में मौजूद अच्छे जीवाणुओं की संख्या खराब जीवाणुओं से कहीं ज्यादा है, इसी वजह से पाचन क्रिया, रोगों से लड़ने की क्षमता विकसित करना संभव हो पाता है।
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