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Bareilly News: सेवा और मानवता की मिसाल... इलाज के साथ ही मुहैया करा रहे भोजन-पानी
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बरेली। शहर के कुछ चिकित्सक सेवा और मानवता की मिसाल पेश कर रहे हैं। वह अपने चिकित्सकीय धर्म के साथ सामाजिक सरोकारों का भी निर्वहन कर रहे हैं। कोई गरीब तबके के लोगों को निशुल्क इलाज मुहैया करा रहा है तो किसी ने मरीजों की सेवा में अपना जीवन ही समर्पित कर दिया है। कुछ चिकित्सक ऐसे भी हैं जो मरीजों को दवा-इलाज के साथ भोजन-पानी भी मुहैया करा रहे हैं। उनका मानना है कि मरीजों को स्वस्थ करना उनका कर्म है पर समाजिक सेवा उनकी नैतिक जिम्मेदारी है। राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस पर हम शहर के कुछ ऐसे ही चिकित्सकों से आपको रूबरू करा रहे हैं। पेश है रिपोर्ट...।
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थैलेसीमिया मरीजों की सेवा में समर्पित हैं डॉ. सरदाना
फोटो
रामपुर गार्डन निवासी डाॅ. जे सरदाना ने अपना जीवन थैलेसीमिक पीड़ितों की सेवा में लगा दिया। आईएमए ब्लड बैंक की डायरेक्टर डॉ. अंजू उप्पल के 35 वर्ष पहले डॉ. जे सरदाना की बेटी का जन्म हुआ जो थैलेसीमिया मेजर थीं। इलाज के लिए बार-बार दिल्ली जाना पड़ता था। इससे पीड़ितों के प्रति समर्पण का भाव जागा। डॉ. जे सरदाना ने वर्ष 1996 में पति डॉ. एसके सरदाना के साथ थैलेसीमिक चिल्ड्रन वेलफेयर सोसाइटी का गठन किया। 14 वर्ष पूर्व डॉ. जे सरदाना की बेटी और दो वर्ष पूर्व पति का निधन हो गया पर उन्होंने अकेले सेवा कार्य जारी रखा। अब सोसाइटी में 200 से ज्यादा बच्चे पंजीकृत हैं। दर्जनभर बच्चों का बोन मैरो ट्रांसप्लांट कराया, जो पूरी तरह ठीक हैं। वे आईएमए के साथ लोगों को थैलेसीमिया से बचाव का संदेश दे रहीं हैं। उनके प्रयासों से जिला अस्पताल में थैलेसीमिक बच्चों की जांच, खून चढ़ाने, दवा आदि की सुविधा शुरू हो सकी। डाॅ. जे सरदाना अब जिला अस्पताल में पृथक थैलेसीमिया यूनिट बनवाने के प्रयास में जुटी हैं।
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मरीजों को भोजन, पानी, वस्त्र भी मुहैया करा रहे डॉ. कक्कड़
फोटो
मॉडल टाउन निवासी डॉ. तिलकराज कक्कड़ छह वर्षों से जरूरतमंद लाेगों को इलाज के साथ ही भोजन, पानी, वस्त्र भी मुहैया करा रहे हैं। वह समुदाय के वंचित सदस्यों को वित्तीय/भौतिक सहायता भी मुहैया कराते हैं। उन्होंने बताया कि सेवा कार्य का उद्देश्य समाज में अलग पहचान बनाना या नाम कमाना नहीं, बल्कि लोगों की भरसक मदद करना है। इसी उद्देश्य के साथ स्टेडियम रोड पर सब की रसोई शुरू की। वहां कोई भी महज दस रुपये में भरपेट भोजन कर सकता है। इसके अलावा अब तक स्कूल, मंदिर, अस्पताल, पार्क सहित अन्य सार्वजनिक स्थानों पर 40 वाॅटर कूलर लगवाए हैं। कई स्कूलों में तीन सौ से ज्यादा सीलिंग पंखे लगवाने के साथ अब तक सैकड़ों पौधे भी रोप चुके हैं।
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सेवानिवृत्त के बाद भी टीबी मरीजों का निशुल्क इलाज कर रहे डॉ. गर्ग
फोटो
रोटरी भवन के पास की कॉलोनी में रह रहे सेवानिवृत्त एडी हेल्थ डॉ. सुधीर गर्ग तीन वर्षों से टीबी मरीजों का निशुल्क इलाज कर रहे हैं। पूर्व में वह जिला क्षय रोग अधिकारी समेत बरेली में ही सीएमओ के पद पर भी सेवाएं दे चुके हैं। डॉ. गर्ग अब घर पर ही क्षय रोगियों को निशुल्क परामर्श और स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया करा रहे हैं। बताया कि क्षय रोग अधिकारी के पद पर रहते हुए उन्होंने आईएमए के सहयोग से बतौर चैरिटी टीबी क्लीनिक का संचालन शुरू कराया था। इसके जरिये क्षय रोगियों को शासन की ओर से प्रदत्त सेवाओं की जानकारी दी जा रही है। कहा कि चिकित्सक होना कोई पेशा नहीं, बल्कि जनसेवा है। निजी चिकित्सकों से गरीब तबके के लोगों का इलाज निशुल्क करने की अपील की है।
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पुनर्जन्म देते हैं चिकित्सक, करें सम्मान : जिलाधिकारी
फोटो
बरेली। समाज में चिकित्सकों की भूमिका और उनकी सेवाओं के लिए जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने आईएमए बरेली शाखा के चिकित्सकों का आभार जताया है। जारी संदेश में कहा है कि चिरकाल से चिकित्सक लोगों की तकलीफ दूर कर रहे हैं। मां जन्म देती है तो चिकित्सक कई बार पुनर्जन्म की वजह बनते हैं। महामारी में अपनी जान की परवाह किए बगैर चिकित्सकों ने संक्रमित लोगों का इलाज किया। यह समाज के प्रति उनका अभूतपूर्व योगदान है। ब्यूरो
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थैलेसीमिया मरीजों की सेवा में समर्पित हैं डॉ. सरदाना
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रामपुर गार्डन निवासी डाॅ. जे सरदाना ने अपना जीवन थैलेसीमिक पीड़ितों की सेवा में लगा दिया। आईएमए ब्लड बैंक की डायरेक्टर डॉ. अंजू उप्पल के 35 वर्ष पहले डॉ. जे सरदाना की बेटी का जन्म हुआ जो थैलेसीमिया मेजर थीं। इलाज के लिए बार-बार दिल्ली जाना पड़ता था। इससे पीड़ितों के प्रति समर्पण का भाव जागा। डॉ. जे सरदाना ने वर्ष 1996 में पति डॉ. एसके सरदाना के साथ थैलेसीमिक चिल्ड्रन वेलफेयर सोसाइटी का गठन किया। 14 वर्ष पूर्व डॉ. जे सरदाना की बेटी और दो वर्ष पूर्व पति का निधन हो गया पर उन्होंने अकेले सेवा कार्य जारी रखा। अब सोसाइटी में 200 से ज्यादा बच्चे पंजीकृत हैं। दर्जनभर बच्चों का बोन मैरो ट्रांसप्लांट कराया, जो पूरी तरह ठीक हैं। वे आईएमए के साथ लोगों को थैलेसीमिया से बचाव का संदेश दे रहीं हैं। उनके प्रयासों से जिला अस्पताल में थैलेसीमिक बच्चों की जांच, खून चढ़ाने, दवा आदि की सुविधा शुरू हो सकी। डाॅ. जे सरदाना अब जिला अस्पताल में पृथक थैलेसीमिया यूनिट बनवाने के प्रयास में जुटी हैं।
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मरीजों को भोजन, पानी, वस्त्र भी मुहैया करा रहे डॉ. कक्कड़
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मॉडल टाउन निवासी डॉ. तिलकराज कक्कड़ छह वर्षों से जरूरतमंद लाेगों को इलाज के साथ ही भोजन, पानी, वस्त्र भी मुहैया करा रहे हैं। वह समुदाय के वंचित सदस्यों को वित्तीय/भौतिक सहायता भी मुहैया कराते हैं। उन्होंने बताया कि सेवा कार्य का उद्देश्य समाज में अलग पहचान बनाना या नाम कमाना नहीं, बल्कि लोगों की भरसक मदद करना है। इसी उद्देश्य के साथ स्टेडियम रोड पर सब की रसोई शुरू की। वहां कोई भी महज दस रुपये में भरपेट भोजन कर सकता है। इसके अलावा अब तक स्कूल, मंदिर, अस्पताल, पार्क सहित अन्य सार्वजनिक स्थानों पर 40 वाॅटर कूलर लगवाए हैं। कई स्कूलों में तीन सौ से ज्यादा सीलिंग पंखे लगवाने के साथ अब तक सैकड़ों पौधे भी रोप चुके हैं।
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सेवानिवृत्त के बाद भी टीबी मरीजों का निशुल्क इलाज कर रहे डॉ. गर्ग
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रोटरी भवन के पास की कॉलोनी में रह रहे सेवानिवृत्त एडी हेल्थ डॉ. सुधीर गर्ग तीन वर्षों से टीबी मरीजों का निशुल्क इलाज कर रहे हैं। पूर्व में वह जिला क्षय रोग अधिकारी समेत बरेली में ही सीएमओ के पद पर भी सेवाएं दे चुके हैं। डॉ. गर्ग अब घर पर ही क्षय रोगियों को निशुल्क परामर्श और स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया करा रहे हैं। बताया कि क्षय रोग अधिकारी के पद पर रहते हुए उन्होंने आईएमए के सहयोग से बतौर चैरिटी टीबी क्लीनिक का संचालन शुरू कराया था। इसके जरिये क्षय रोगियों को शासन की ओर से प्रदत्त सेवाओं की जानकारी दी जा रही है। कहा कि चिकित्सक होना कोई पेशा नहीं, बल्कि जनसेवा है। निजी चिकित्सकों से गरीब तबके के लोगों का इलाज निशुल्क करने की अपील की है।
पुनर्जन्म देते हैं चिकित्सक, करें सम्मान : जिलाधिकारी
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बरेली। समाज में चिकित्सकों की भूमिका और उनकी सेवाओं के लिए जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने आईएमए बरेली शाखा के चिकित्सकों का आभार जताया है। जारी संदेश में कहा है कि चिरकाल से चिकित्सक लोगों की तकलीफ दूर कर रहे हैं। मां जन्म देती है तो चिकित्सक कई बार पुनर्जन्म की वजह बनते हैं। महामारी में अपनी जान की परवाह किए बगैर चिकित्सकों ने संक्रमित लोगों का इलाज किया। यह समाज के प्रति उनका अभूतपूर्व योगदान है। ब्यूरो