Amritpal Singh: अमृतपाल को लेकर नया खुलासा, पीलीभीत के जत्थेदार की स्कॉर्पियो कार से हुआ था फरार
अमृतपाल ने पीलीभीत के एक जत्थेदार की स्कॉर्पियो का इस्तेमाल किया था। इस कार को पंजाब के फगबड़ा से बरामद कर लिया गया है। पुलिस छानबीन में जुटी है।
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पंजाब से फरार खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह को लेकर बुधवार को नया खुलासा हुआ है। जिस स्कॉर्पियो कार से अमृतपाल फरार हुआ, वह कार उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले के अमरिया क्षेत्र के बड़ेपुरा स्थित गुरुद्वारे के जत्थेदार की निकली। बुधवार को कार बरामद होने के बाद इस बात का खुलासा हुआ। बताया जा रहा है फगबड़ा से अमृतपाल स्कॉर्पियो को छोड़कर इनोवा कार से फरार हो गया।
अमृतपाल कि उत्तराखंड के रास्ते नेपाल भागने की खुफिया एजेंसियों ने आशंका जताई थी। इसके बाद से पीलीभीत में भी सतर्कता बढ़ाई गई थी। तीन दिन से लगातार उत्तराखंड और नेपाल के बॉर्डर पर पुलिस सघन चेकिंग में भी जुटी थी, लेकिन पुलिस की सतर्कता को चुनौती देकर अमृतपाल अमरिया क्षेत्र के बड़ेपुरा स्थित एक गुरुद्वारे के जत्थेदार की कार से पंजाब के फगबड़ा पहुंचा। जहां स्कॉर्पियो कार को छोड़कर इनोवा कार से फरार हो गया। बरामद स्कॉर्पियो की जांच पड़ताल में वह अमरिया के बड़ेपुरा स्थित गुरुद्वारे के जत्थेदार मोहन सिंह की निकली। कार का नंबर उत्तराखंड का निकला है।
चर्चा: जत्थेदार को ले गई पंजाब पुलिस
बताया जा रहा है कार को चिह्नित करने के बाद पंजाब पुलिस बुधवार सुबह जनपद के अमरिया स्थित बड़ेपुरा पहुंची। जहां से जत्थेदार को हिरासत में लेकर साथ ले गई। हालांकि स्थानीय पुलिस इस बात को स्वीकार नहीं कर रही है। मामला सुर्खियों में आने के बाद देर शाम क्षेत्रीय पुलिस ने बड़ेपुरा स्थित गुरुद्वारे में पहुंचकर छानबीन शुरू की है। जत्थेदार को लेकर तलाश की जा रही, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिल सका है।
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पूरनपुर से बदली गई थी कार
बड़ेपुरा गुरुद्वारे के जत्थेदार मोहन सिंह पिछले छह साल से यहां रह रहे थे। सेवादार गुरुप्रीत सिंह ने बताया कि सुबह मोहन सिंह गुरुद्वारे में थे। इसके बाद से उनका पता नहीं चल सका। अक्सर वह आसपास के गुरुद्वारों में बगैर बताए चले जाते हैं।
आशंका व्यक्त की जा रही है कि पंजाब पुलिस सुबह मोहन सिंह को पकड़ कर ले गई। इस संबंध में देर रात अमरिया पुलिस भी गुरुद्वारे गई, लेकिन बाबा मोहन सिंह नहीं मिले। सेवादार ने यह भी बताया कि जिस गाड़ी की बात की जा रही है, उसे पूरनपुर के एक गुरुद्वारे के जत्थेदार को दिया गया था। इसके बदले में दूसरी गाड़ी बाबा मोहन सिंह ने ले ली थी। गाड़ी अमृतपाल तक कैसे पहुंची, इसका जवाब किसी के पास नहीं है।