उत्कर्ष के 55 वर्ष: आभार बरेली... आपने भरोसा जताया, हम आपकी आवाज बने; तस्वीरों में देखें अमर उजाला का सफर
बरेली में 17 जनवरी 1969 को अमर उजाला का पहला अंक पाठकों के हाथों में आया। पहली बार यहां के लोगों को अपने शहर की सामाजिक, राजनीतिक और अन्य गतिविधियों की खबरें अखबार में देखने को मिलीं। तब से अब तक उत्कर्ष के 55 वर्ष में अमर उजाला कई आयाम स्थापित कर चुका है। निष्पक्ष, निर्भीक पत्रकारिता का सफर निरंतर जारी है।
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आभार बरेली... हम पर अपना प्यार लुटाने और भरोसा जताने के लिए। हमने भी हर मौके पर आपकी आवाज को बुलंद किया। आपकी समस्याओं को उठाया। हर दौर में आपके साथ खड़े रहे। इसके बिना यह 55 वर्ष का सफर संभव न था। मकर संक्रांति से भगवान भुवन भास्कर उत्तरायण में दैदीप्यमान हुए तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश का हृदयस्थल बरेली भी उनके प्रकाश से आलोकित हो उठा। 17 जनवरी 1969 को वह शुभ मुहूर्त था जब सूर्य के प्रकाश का प्रतीक बनकर अमर उजाला ने बरेली को केंद्र बनाकर समूचे रुहेलखंड एवं कुमाऊं को आलोकित किया। उस समय उत्तराखंड राज्य और मुरादाबाद मंडल का गठन नहीं हुआ था।
बरेली यूनिट के शुभारंभ के बाद बढ़ता गया अमर उजाला का सफर
बरेली, शाहजहांपुर, पीलीभीत, बदायूं, मुरादाबाद, बिजनौर और रामपुर, ये सभी सात जिले रुहेलखंड में आते थे। हालांकि, डोरीलाल अग्रवाल जी एवं मुरारीलाल माहेश्वरी जी इससे पहले 18 अप्रैल 1948 को आगरा से अमर उजाला का प्रकाशन प्रारंभ कर चुके थे। आगरा का अग्रणी समाचार पत्र बनने के बाद ही अमर उजाला का प्रकाशन उत्तर प्रदेश के अन्य महानगरों से भी शुरू करने की योजना बनी। बरेली का चयन हुआ।
प्रेम नगर में अमर उजाला का पुराना कार्यालय
अमर उजाला के संस्थापक डोरीलाल अग्रवाल जी एवं मुरारीलाल माहेश्वरी जी बरेली से प्रकाशन शुरू करने से पहले यहां कई बार आए। प्रमुख नागरिकों, राजनेताओं एवं शिक्षाविदों के सुझाव लिए। कार्यालय के लिए उपयुक्त स्थल की तलाश की गई जो प्रेमनगर में मैक नियर रोड पर त्रिवटीनाथ मंदिर के सामने खन्ना जी की बिल्डिंग पर जाकर समाप्त हुई।
17 जनवरी 1969 को प्रकाशित हुआ पहला अंक
अति शुभ मुहूर्त में 16 जनवरी 1969 को इसी कार्यालय में विधि-विधान से पूजा करके अमर उजाला के प्रकाशन की तैयारी पूरी की गई। इसी दिन राजकीय इंटर कॉलेज में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की जनसभा थी। 17 जनवरी 1969 को अमर उजाला का पहला अंक जब पाठकों के हाथों में आया तो उसके प्रथम पृष्ठ पर मुख्य समाचार इंदिरा गांधी के भाषण का ही था। पहली बार यहां के लोगों को अपने शहर की सामाजिक, राजनीतिक और अन्य गतिविधियों की खबरें अखबार में देखने को मिलीं।
अखबार की प्रदर्शनी देखतीं छात्राएं
पाठकों ने अति उत्साह से अमर उजाला का स्वागत किया। तब चार पृष्ठ के अखबार का प्रारंभिक मूल्य 10 पैसा रखा गया था। अमर उजाला की प्रारंभिक टीम में संपादकीय प्रभारी उदित साहू, ओमप्रकाश अग्रवाल, जेवी सुमन आदि थे।
शुरुआती दिनों में डोरीलाल अग्रवाल जी एवं मुरारीलाल माहेश्वरी जी ने अपनी ही देखरेख में अखबार का प्रकाशन कराया। कुछ ही समय में रुहेलखंड और कुमाऊं के सभी जिलों में कार्यालय स्थापित कर दिए गए और अमर उजाला लोगों के बीच निरंतर लोकप्रिय होता गया।
अमर उजाला अखबार पढ़तीं छात्राएं
सीमावर्ती इलाकों की भी खबरें
सुदूर अंचलों से अपना जुड़ाव बढ़ाते हुए अमर उजाला ने भारत-चीन सीमा पर बसे पिथौरागढ़ जिले के मुनस्यारी, डीडीहाट और गंगोलीहाट जैसे सीमावर्ती इलाकों की भी खबरें देनी शुरू कीं। लखीमपुर खीरी, बहराइच, हरदोई, सीतापुर में पहले ही अमर उजाला का अच्छा-खासा प्रसार हो चुका था।
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बरेली में हमारी प्रसार संख्या सर्वाधिक
बरेली में एक संगठित छात्र आंदोलन के बाद रुहेलखंड विश्वविद्यालय की स्थापना संभव हो सकी। 55 वर्षों की यात्रा में अमर उजाला ने तमाम आयाम स्थापित किए। अमर उजाला का प्रकाशन अब छह राज्य, दो केंद्र शासित प्रदेश और 22 संस्करणों से हो रहा है। बरेली में हमारी प्रसार संख्या सर्वाधिक है। स्थापना के बाद से ही अमर उजाला यहां सर्वाधिक प्रसार संख्या वाला अखबार बना हुआ है।
अमर उजाला कार्यालय परिसर में आयोजित प्रदर्शनी देखने पहुंचीं छात्राएं