उत्कर्ष के 50 वर्ष : ये भरोसा ही हमारी धरोहर, इसे सहेजकर बढ़ेंगे आगे
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अमर उजाला परिसर एक अर्सा बाद बृहस्पतिवार को फिर उन लोगों के संगम था, जिनका कर्मयोग खबरों से जूझते हुए हमेशा-हमेशा के लिए अमर उजाला की पहचान बन गया। बरेली में 50वीं वर्षगांठ पर आयोजित समारोह में अमर उजाला की बुनियाद रखने वाली इस जमात ने पुराने दौर की तमाम उतार-चढ़ाव से भरी यादों और संघर्षों को नई पीढ़ी के साथ साझा किया तो माहौल कुछ देर के लिए भावुक हो गया। तालियों की गड़गड़हाट के बीच प्रबंध निदेशक राजुल माहेश्वरी ने अमर उजाला परिवार के इन वरिष्ठ-पुराने साथियों को सम्मानित किया। अमर उजाला परिवार की ओर से इस मौके पर यह संकल्प भी लिया गया कि 50 वर्षों के लंबे सफर में उसने जो पहचान अर्जित की, उसे धरोहर की तरह हमेशा संभालकर रखा जाएगा।
स्थापना दिवस की स्वर्ण जयंती वर्षगांठ पर सुबह नौ बजे हवन-पूजन के बाद प्रबंध निदेशक राजुल माहेश्वरी ने केक काटकर समारोह का शुभारंभ किया और इसी के साथ शुरू हुआ अमर उजाला की पुरानी पीढ़ी के सम्मान और उसके नई पीढ़ी से परिचय का दौर। उत्तराखंड के सुदूर अंचलों के साथ मुरादाबाद, बरेली, शाहजहांपुर और पीलीभीत से आए अमर उजाला परिवार के वरिष्ठ सदस्यों ने अपने पत्रकारिता जीवन के उस दौर की यादें साझा कीं जो कठिनाइयों और खतरों से भरा था। संसाधनों के अभाव के बाद भी एक-एक खबर के लिए अपनी जद्दोजहद के किस्से सुनाते हुए उन्होंने युवा साथियों से उम्मीद जताई कि वे अमर उजाला की विश्वसनीयता और प्रतिष्ठा यूं बनाए रखेंगे।
कार्यक्रम का संचालन अनिल नायर ने किया, योगेश ओबेराय ने कई गीतों की प्रस्तुति दी। समारोह में अमर उजाला ग्रुप के निदेशक तन्मय माहेश्वरी और वरुण माहेश्वरी भी मौजूद रहे। संपादक विनीत सक्सेना और यूनिट हेड प्रवीन कुमार ने अतिथियों का स्वागत किया। डिलीशियस फूड एंड कैटरर ने अमर उजाला के 50 साल पूरे होने पर विशेष केक बनाया, जिस पर 17 जनवरी 2019 के अंक के प्रथम पृष्ठ की छायाकृति बनी हुई थी।