फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   Alignment kept being sold to property dealers, professional buyers came later

Bareilly News: प्राॅपर्टी डीलरों के हाथ बिकता रहा एलाइनमेंट, बाद में आए पेशेवर खरीदार

Fri, 27 Sep 2024 09:38 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 27 Sep 2024 09:38 PM IST
विज्ञापन
Alignment kept being sold to property dealers, professional buyers came later
बरेली। बरेली-सितारगंज हाइवे और रिंग रोड के लिए भू अधिग्रहण में हुए खेल में पेशेवरों के शामिल होने की बात जांच में पुष्ट हो गई है। सूत्रों की माने तो हाईवे का एलाइनमेंट एक प्रॉपर्टी डीलर के हाथ लग गया था। उसने दूसरे प्रॉपर्टी डीलरों से इसका सौदा कर लिया। पेशेवर खरीदार तो बाद में इस खेल में शामिल हुए। अब इसके खुलासे के लिए कड़ियां जोड़ने की जरूरत है। शासन ने एसआईटी से इस मामले की जांच कराने के आदेश दिए हैं। उम्मीद है कि इसमें अफसरों, दलालों, प्रॉपर्टी डीलरों आदि का गठजोड़ खुलकर सामने आएगा।
विज्ञापन

प्रॉपर्टी डीलरों ने एलाइनमेंट का सौदा शुरू किया तो पेशेवर खरीदार भी सक्रिय हो गए। गांव के किसान जो वर्षों से उस जमीन के मालिक थे, थोड़े से लालच में वे अपना बड़ा नुकसान कर बैठे। पेशेवरों ने उनकी जमीन खरीद ली। मुआवजा लेने का समय आया तो किसान सिर्फ देखते रहे, जबकि गठजोड़ में शामिल लोग रातोंरात करोड़पति बन गए। अब किसके जरिये उन्हें एलाइनमेंट की जानकारी मिली, यह विस्तृत जांच में सामने आएगा।
विज्ञापन

एनएचएआई के परियोजना निदेशक बीपी पाठक और तत्कालीन क्षेत्रीय अधिकारी संजीव कुमार शर्मा 23 अगस्त को निलंबित किए जा चुके हैं। अब कमिश्नर की जांच रिपोर्ट में दूसरे परियोजना निदेशक एआर चित्रांशी का नाम सामने आया है। वे भी कार्रवाई के घेरे में आ सकते हैं, क्योंकि कमिश्नर की ओर से भेजी गई रिपोर्ट में उन्हें अधिग्रहण की अधिसूचना के बारे में तहसील स्तर पर जानकारी न देने के लिए उत्तरदायी माना गया है। साथ ही, उनकी भूमिका को संदिग्ध करार दिया गया है। बताते हैं कि चित्रांशी मुख्यालय के लिए स्थानांतरित हो चुके हैं। अगर जांच रिपोर्ट एनएचएआई चेयरमैन तक पहुंचती है तो कार्रवाई आगे बढ़ेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

अब तक हुईं तीन जांचों में 50 लाख से अधिक मूल्यांकन वाले चंद मामलों के परीक्षण में ही 80 करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला सामने आया है। अब अगर 50 लाख रुपये से कम मुआवजे वाले मामलों की जांच होती है तो नए घोटाले भी सामने आ सकते हैं।

---
विस्तृत जांच से मिलेंगे इन सवालों के जवाब
- अधिकारियों और दलालों के बीच किस तरह का गठजोड़ रहा?
- ये गठजोड़ कैसे बना और हेराफेरी के लिए किसने क्या तरीका अपनाया?
- अधिक मुआवजा हासिल करने के लिए बाहर से आकर हाईवे या रिंग रोड के अधिग्रहीत क्षेत्र में जमीन खरीदने वाले लोगों का अधिकारियों से क्या संबंध है?
- अब तक हुईं तीन जांचों में अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत से एलाइनमेंट लीक होने की आशंका जताई गई है। इसलिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि गोपनीय जानकारी क्यों और किसने लीक की?
- एलाइनमेंट लीक करने के बदले में संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों को क्या मिला?
- किसके कार्यकाल में जानकारी लीक हुई?

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed