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Bareilly News: तैराकी में सफलता के बाद शुशांत अब खिलाड़ियों को दे रहे प्रशिक्षण
Thu, 04 Jun 2026 12:09 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Thu, 04 Jun 2026 12:09 AM IST
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बरेली। पूर्वोत्तर रेलवे इज्जतनगर मंडल के बरेली सिटी स्टेशन पर बतौर टीटीई तैनात शुशांत सक्सेना वर्ष 2006 से 2011 तक लगातार छह साल तक अखिल भारतीय विश्वविद्यालय तैराकी प्रतियोगिता में स्वर्ण और रजत पदक पदक जीतकर चैंपियन बने रहे। वर्ष 2012 में उनको रेलवे में खेल कोटा से नौकरी मिली। इसके बाद भी उन्होंने तैराकी और गोताखोरी में मेडल जीतने का सिलसिला जारी रखा। अब वह नौकरी की व्यस्तता के साथ-साथ तैराकी और गोताखोरी का प्रशिक्षण भी दे रहे हैं।
शुशांत को उम्मीद है कि प्रशिक्षण ले रहे खिलाड़ी निश्चित ही गोल्ड मेडल जीतेंगे। स्नातक करने के बाद शुशांत ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से बीपीएड और फिर एमपीएड की डिग्री हासिल की। तैराकी की ओर उनका रुझान स्कूल के समय से ही था। पांच बार जूनियर राष्ट्रीय और छह बार सीनियर राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं हिस्सा ले चुके शुशांत ने पिछले साल अहमदाबाद में आयोजित एशियन तैराकी चैंपियनशिप में भारत की ओर से तकनीकी अधिकारी के रूप में काम संभाला। उत्तर प्रदेश तैराकी संघ की ओर से विभिन्न तैराकी प्रतियोगिताओं में भी वह तकनीकी अधिकारी के रूप में काम देख रहे हैं। इसके अलावा वर्तमान में उत्तराखंड तैराकी संघ में संयुक्त सचिव के पद की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं।
नौकरी की व्यस्तता के बीच भी वह इज्जतनगर स्थित रेलवे के स्विमिंग पूल में नियमित अभ्यास करने के साथ खिलाड़ियों को प्रशिक्षण भी देते हैं। शुशांत का कहना है कि खेलों से न सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक विकास भी होता है। निर्णय लेने की क्षमता के मामले में खेल अहम हैं। अभिभावकों को चाहिए कि बच्चों को रोजाना कम से कम दो घंटे खेलों के लिए जरूर दें।
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खेलों को बढ़ावा देने की जरूरत, तभी निकलेंगी प्रतिभाएं
- शुशांत का कहना है कि खेलों में भी प्रतिभाओं की कमी नहीं है। ओेलंपिक खेलों में भारत के प्रदर्शन को लेकर उनको टीस भी है। उनका कहना है कि सरकार खेलों को बढ़ावा दे रही है, इसके बाद भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रदर्शन अपेक्षा के अनुसार नहीं है। खेलों को बढ़ावा देने की जरूरत है। इसके लिए अभिभावकों और शिक्षकों की भूमिका अहम है। यह सभी के लिए जरूरी है कि खेलों को बढ़ावा दें। बच्चों का हौंसला बढ़ाएं। डटे रहें और हार न मानें, मैदान न छोड़ें तो ओलंपिक में भी भारत का डंका बजेगा।
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शुशांत को उम्मीद है कि प्रशिक्षण ले रहे खिलाड़ी निश्चित ही गोल्ड मेडल जीतेंगे। स्नातक करने के बाद शुशांत ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से बीपीएड और फिर एमपीएड की डिग्री हासिल की। तैराकी की ओर उनका रुझान स्कूल के समय से ही था। पांच बार जूनियर राष्ट्रीय और छह बार सीनियर राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं हिस्सा ले चुके शुशांत ने पिछले साल अहमदाबाद में आयोजित एशियन तैराकी चैंपियनशिप में भारत की ओर से तकनीकी अधिकारी के रूप में काम संभाला। उत्तर प्रदेश तैराकी संघ की ओर से विभिन्न तैराकी प्रतियोगिताओं में भी वह तकनीकी अधिकारी के रूप में काम देख रहे हैं। इसके अलावा वर्तमान में उत्तराखंड तैराकी संघ में संयुक्त सचिव के पद की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं।
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नौकरी की व्यस्तता के बीच भी वह इज्जतनगर स्थित रेलवे के स्विमिंग पूल में नियमित अभ्यास करने के साथ खिलाड़ियों को प्रशिक्षण भी देते हैं। शुशांत का कहना है कि खेलों से न सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक विकास भी होता है। निर्णय लेने की क्षमता के मामले में खेल अहम हैं। अभिभावकों को चाहिए कि बच्चों को रोजाना कम से कम दो घंटे खेलों के लिए जरूर दें।
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खेलों को बढ़ावा देने की जरूरत, तभी निकलेंगी प्रतिभाएं
- शुशांत का कहना है कि खेलों में भी प्रतिभाओं की कमी नहीं है। ओेलंपिक खेलों में भारत के प्रदर्शन को लेकर उनको टीस भी है। उनका कहना है कि सरकार खेलों को बढ़ावा दे रही है, इसके बाद भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रदर्शन अपेक्षा के अनुसार नहीं है। खेलों को बढ़ावा देने की जरूरत है। इसके लिए अभिभावकों और शिक्षकों की भूमिका अहम है। यह सभी के लिए जरूरी है कि खेलों को बढ़ावा दें। बच्चों का हौंसला बढ़ाएं। डटे रहें और हार न मानें, मैदान न छोड़ें तो ओलंपिक में भी भारत का डंका बजेगा।