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Bareilly News: अधिवक्ताओं ने गिनाईं नए कानून की खूबियां-खामियां

Thu, 04 Jul 2024 06:13 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Updated Thu, 04 Jul 2024 06:13 AM IST
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Advocates enumerated the merits and demerits of the new law
बरेली। नए कानून के लागू होने के बाद अधिवक्ताओं में इसको लेकर अलग-अलग राय है। कई अधिवक्ता इसे अच्छा मान रहे हैं तो कई खामियां भी गिना रहे हैं। अधिवक्ताओं का कहना है कि नए कानून में रिमांड को 15 दिन से बढ़ाकर 90 दिन कर दिया गया है। इससे पुलिस को काफी ताकत मिल गई है। वाीडियोग्राफी को साक्ष्य माना जाएगा। इसका दुरुपयोग होने की संभावना है। वहीं, कई अधिवक्ताओं का कहना है कि नए कानून में सामाजिक दंड के प्रावधान से समाज में अच्छा संदेश जाएगा।
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बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अरविंद श्रीवास्तव का कहना है कि नए कानून में पुलिस को काफी ताकत दे दी गई है। अभी तक रिमांड 15 दिन का होता था। नए कानून में रिमांड 90 दिन का कर दिया गया है। ऐसे में पुलिस जमानत होने के बाद भी मुकदमे में धाराएं बढ़ाकर आरोपी को दोबारा जेल भेज सकेगी। वीडियोग्राफी को बतौर साक्ष्य माना जाएगा। पुलिस उसी स्थान पर वीडियोग्राफी करेगी, जहां से आरोपी की गिरफ्तारी दिखाना चाहेगी। ऐसे में इस कानून का दुरुपयोग होने की ज्यादा आशंका है।
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बार एसोसिएशन के सचिव वीपी ध्यानी का कहना है कि नए कानून में आरोपियों को सामाजिक दंड भी दिया जाएगा। यह इसकी खूबी है। नए कानून के तहत मामूली अपराध में अदालत अब जेल भेजने के बजाय कहीं अनाथालय या वृद्ध आश्रम में कुछ दिन काम करने का आदेश दे सकती हैं। इससे लोगों के बीच अच्छा संदेश जाएगा। अधिवक्ताओं को नए कानून की जानकारी के लिए अध्ययन करना पड़ रहा है। इसकी खामियां व खूबियां अदालत में आरोप पत्र आने व मुकदमे चलने पर सामने आएंगी।
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वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल भटनागर बताते हैं कि नए कानून के तहत वीडियो साक्ष्य को अदालत में मंजूरी दी गई है। पुलिस को अब घटना से लेकर गिरफ्तारी तक हर चीज का वीडियो बनाना होगा। सवाल यह है कि पुलिस आरोप पत्र के साथ डिजिटल साक्ष्य को अदालत में भेजेगी। उसे यहां कैसे सुरक्षित रखा जाएगा। डिजिटल साक्ष्य को पेन ड्राइव, सीडी या किसमें भेजा जाएगा, अभी यह साफ नहीं हो सका है। अदालतों में डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के लिए स्टोरेज की कोई व्यवस्था नहीं है।



सहायक अभियोजन अधिकारी विपर्णा गौड का कहना है कि पहले मॉब लिंचिंग को लेकर कानून नहीं था। इससे आरोपियों को कई बार फायदा मिल जाता था। अब नए कानून के तहत मॉब लिंचिंग अपराध को भी जोड़ा गया है। इसके अलावा कानून में अब साक्ष्यों के आधार पर वर्षों तक मुकदमे अटके नहीं रहेंगे। वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये सुनवाई हो सकेगी। इससे मुकदमों का जल्द निस्तारण होगा। नए कानून के तहत अब पुलिस से लेकर अदालतों तक, कहीं भी मुकदमों के लंबित रहने की गुंजाइश न के बराबर रहेगी।
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