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नई तकनीकें अपनाकर पशुओं से अधिक उत्पादन पर जोर
बरेली
Updated Sat, 09 Jan 2016 01:30 AM IST
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बरेली। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान के दैहिकी एवं जलवायुकी विभाग के उच्च अध्ययन केंद्र (काफ्ट) की ओर से ‘प्रॉस्पेक्टस एंड रेट्रोस्पेक्ट्स इन एसिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजीज़’ विषय पर लघु पाठ्यक्रम का आयोजन किया गया।
संस्थान के संयुक्त निदेशक (शोध) डॉ. वीपी मिश्रा ने बताया कि दुग्ध उत्पादन में हमारा देश प्रथम स्थान पर है, लेकिन पशुओं की संख्या के अनुपात से उत्पादन हम कम ले पाते है। इसलिए, हमें नई तकनीकें अपनाकर अपने पशुओं से अधिक उत्पादन लेने पर बल देना होगा।
संयुक्त निदेशक (कैडराड) डॉ. वीके गुप्ता ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का विषय वस्तु वर्तमान समय के हिसाब से बहुत महत्वपूर्ण है। इस दौरान उच्च अध्ययन केंद्र की निदेशक एवं दैहिकी एवं जलवायुकी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. जी तरू शर्मा ने प्रशिक्षण कार्यक्रम के बारे में बताते हुए कहा कि शृंखला का 40वां कोर्स है। व्याख्यान के साथ-साथ प्रैक्टिकल भी कराए जाएंगे। व्याख्यान देने के लिए करनाल, दिल्ली, हिसार और देहरादून आदि के वैज्ञानिक बुलाए गए हैं। इस दौरान इस प्रशिक्षण से संबंधित एक कम्पेडियम का भी विमोचन किया गया।
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पाठ्यक्रम के समन्वयक डॉ. विक्रांत सिंह चौहान ने प्रशिक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में 25 प्रतिभागी सहभागिता दे रहे हैं। कार्यक्रम का संचालन डॉ. हरि अब्दुल ने किया और डा. विकास चंद्र ने आभार व्यक्त किया।
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संस्थान के संयुक्त निदेशक (शोध) डॉ. वीपी मिश्रा ने बताया कि दुग्ध उत्पादन में हमारा देश प्रथम स्थान पर है, लेकिन पशुओं की संख्या के अनुपात से उत्पादन हम कम ले पाते है। इसलिए, हमें नई तकनीकें अपनाकर अपने पशुओं से अधिक उत्पादन लेने पर बल देना होगा।
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संयुक्त निदेशक (कैडराड) डॉ. वीके गुप्ता ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का विषय वस्तु वर्तमान समय के हिसाब से बहुत महत्वपूर्ण है। इस दौरान उच्च अध्ययन केंद्र की निदेशक एवं दैहिकी एवं जलवायुकी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. जी तरू शर्मा ने प्रशिक्षण कार्यक्रम के बारे में बताते हुए कहा कि शृंखला का 40वां कोर्स है। व्याख्यान के साथ-साथ प्रैक्टिकल भी कराए जाएंगे। व्याख्यान देने के लिए करनाल, दिल्ली, हिसार और देहरादून आदि के वैज्ञानिक बुलाए गए हैं। इस दौरान इस प्रशिक्षण से संबंधित एक कम्पेडियम का भी विमोचन किया गया।
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पाठ्यक्रम के समन्वयक डॉ. विक्रांत सिंह चौहान ने प्रशिक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में 25 प्रतिभागी सहभागिता दे रहे हैं। कार्यक्रम का संचालन डॉ. हरि अब्दुल ने किया और डा. विकास चंद्र ने आभार व्यक्त किया।