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खेल के असल सूत्रधार तो डॉ. तोमर रहे
बरेली
Updated Tue, 16 Feb 2016 01:43 AM IST
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बरेली। सपा का एमएलसी टिकट बदलवाने के सियासी ड्रामे के असल सूत्रधार डॉ. आईएस तोमर माने जा रहे हैं। सपा जिलाअध्यक्ष वीरपाल ने तो सकुचाते हुए खाली बम का खोल ही दिया, इसमें बारूद तोमर और इस्लाम साबिर ने भरा, सुतली बंधवाने को बुलाए गए ठाकुर सर्वराज और थमा दिया गया आजम खां के हाथ में। जब धमाका हुआ तो सांसद धर्मेंद्र यादव और वरिष्ठ मंत्री शिवपाल सिंह यादव जैसे मुख्यमंत्री के घराने के लोग भी भौंचक रह गए। स्वामी कैलाशानंद का आशीर्वाद भी निष्प्रभावी हो गया। माना जा रहा है कि टिकट की लड़ाई चुनाव के बाद कुछ और गुल खिला सकती है।
डॉ अनिल शर्मा से छत्तीस का आंकड़ा रखने वाले डॉ. तोमर को किसी भी कीमत पर अनिल शर्मा का टिकट मंजूर नहीं था। वीरपाल भी मायूस थे कि उनको बिना मांगे एमएलसी का टिकट क्यों नहीं मिला। घनश्याम लोधी तो आश्चर्य जता रहे हैं कि उन्हें ये प्रसाद मिल कैसे गया। 2012 में मेयर का चुनाव लड़ने के लिए डॉ. अनिल शर्मा की पत्नी रजनी शर्मा को सपा का टिकट मिला था। रजनी शर्मा के समर्थन में वीरपाल सिंह यादव, मौलाना रजा खुलकर आए थे। डॉ. आईएस तोमर ने सपा से टिकट न मिलने पर निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी तो सपा ने डॉ. तोमर को समर्थन दे दिया। तबसे ही डॉ. अनिल शर्मा और डॉ. तोमर के बीच छत्तीस का आंकड़ा रहा है।
अनिल शर्मा को एमएलसी का टिकट मिलने के बाद डॉ. तोमर पुरानी सियासी अदावत निपटाने के लिए वीरपाल के साथ हो गए। सूत्रों के मुताबिक भाजपा से अपने गहरे दोस्त पीपी सिंह को एमएलसी का प्रत्याशी बनवाने में भी कहीं न कहीं डॉ. तोमर का नाम आ रहा है। ऐसा माना जा रहा है कि अगर सपा से अनिल शर्मा का टिकट नहीं बदलता तो मेयर भाजपा प्रत्याशी के पीछे दिखते। अनिल शर्मा के सारे विरोधी एक साथ इकट्ठे हो गए। वीरपाल ने अनिल शर्मा का टिकट बदलवाने के लिए प्रमोद विष्ट और जफरबेग जैसे दूसरी पंक्ति के नेताओं का इस्तेमाल किया। मेयर डा. तोमर और पूर्व सांसद सर्वराज और वीरपाल के त्रिकोण बनाने में इन्हें दौड़ाया गया। इस्लाम साबिर का परिवार वैसे ढुलमुल रहता है लेकिन उनके हित वीरपाल से ही ज्यादा सधते हैं। अनिल शर्मा के साथ भगवतशरण गंगवार को खड़ा देख कर इनको और जोश आ गया।
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लोधी का नामांकन कराने वालों में जिलाध्यक्ष वीरपाल सिंह यादव, मेयर डॉ. आईएस तोमर, शहजिल इस्लाम, जफरबेग, प्रमोद विष्ट, संजीव यादव, मलखान सिंह यादव, आदेश यादव गुड्डू, जिला उपाध्यक्ष अरविंद गंगवार, जाहिद हुसैन गुड्डू और हरीशंकर यादव आदि के साथ ही विधायक अताउर्रहमान भी मौजूद थे।
आधे दस्तखत तो फर्जी थे
अनिल शर्मा को कमजोर प्रत्याशी बताने वाले लेटर बम में आधे दस्तखत तो फर्जी थे। जिस समय लेटर बम तैयार किया गया, उस समय विधायक शहजिल इस्लाम और लोकसभा प्रत्याशी आयशा इस्लाम वहां मौजूद नहीं थे। उनके दस्तखत पूर्व विधायक इस्लाम साबिर ने बनाए। ब्लाक प्रमुखों में अधिकांश मौजूद नहीं थे। अब कहा जा रहा है कि उनके दस्तखत मोबाइल पर सहमति लेने के बाद बनाए गए। कल तक वीरपाल अनभिज्ञता जता रहे थे लेकिन सोमवार को उन्होंने कहा उनके दस्तखत असली थे।
वीरपाल बोले तोमर ने इतिहास बना दिया
जिलाध्यक्ष वीरपाल सिंह यादव का कहना था कि अनिल शर्मा का ऐन वक्त पर टिकट बदलने से ये साबित होता है कि पार्टी में लोकतंत्र है। यहां प्रत्येक व्यक्ति की बात सुनी जाती है। वीरपाल ने कहा कि डॉ तोमर ने इतिहास बनाया है। नए प्रत्याशी घनश्याम लोधी ने वीरपाल और डा. तोमर के पैर छूकर आशीर्वाद लिया।
दो प्राधिकार पत्र आए
लखनऊ से पुलिस लाइन पहुंचे हेलीकाप्टर से एमएलसी चुनाव में सपा प्रत्याशी घनश्याम लोधी के लिए दो प्राधिकार पत्र आए। नामांकन के समय एक प्राधिकार पत्र में गलती मिलने पर दूसरा तुरंत दाखिल किया जा सके। मुख्यमंत्री दफ्तर से शाम चार बजे जिलाध्यक्ष से फोन पर घनश्याम लोधी के नामांकन दाखिल होने की जानकारी ली गई।
‘पार्टी ने अनिल शर्मा को एमएलसी प्रत्याशी बनाया तो हम उनको चुनाव लड़ाने को तैयार थे। अब घनश्याम लोधी को प्रत्याशी बनाया गया है तो उनको लड़ाएंगे। हम तो दरी फट्टा बिछाने वाले आदमी है। हाईकमान के हर आदेश का पालन करना है।’ वीरपाल सिंह यादव, जिलाध्यक्ष सपा
तोमर ने भरा लोधी का पर्चा
बरेली। एमएलसी के लिए पर्चा तो घनश्याम सिंह लोधी का था लेकिन उसे अपनी कलम से मेयर डॉ. आईएस तोमर ने भरा। हेलिकॉप्टर से सिंबल आने के बाद पुलिस लाइन से वीरपाल सिंह अपनी गाड़ी में डॉ. तोमर और लोधी को बैठाकर दोपहर दो बजे कलेक्ट्रेट पहुंचे। पर्चा डॉ. तोमर ने अपने हाथ में लिया और वीरपाल सिंह से पूछकर भरते रहे। इस बीच बहेड़ी विधायक अताउररहमान पहुंच गए। उनके पीछे से जिला पंचायत अध्यक्ष संजय सिंह भी आ गए। रामपुर से नसीर खां भी लोधी के साथ आए हुए थे। तब तक एआरओ अरुण कुमार कक्ष में आकर कुर्सी पर बैठ चुके थे। पर्चा भरने के बाद डॉ. तोमर और वीरपाल सिंह ने उसे घनश्याम लोधी के हाथ में थमा दिया। सारे सपा नेता नामांकन रूम में ही थे। बहुत सारी भीड़ देखकर एआरओ ने कहा भी कि सिर्फ 11 लोग ही यहां रहेंगे। सपा जिलाध्यक्ष ने उनकी बात का समर्थन भी किया और जोर से बोला- चले जाएं बाकी लोग लेकिन कोई गया नहीं। लोधी के पर्चे दो सैट में 2.27 मिनट पर दाखिल हुए।
पुलिस की भाजपाइयों की नोकझोंक
सपा वाले नामांकन कक्ष में अंदर थे, इसी बीच में करीब 2.30 बजे भाजपाई अपने प्रत्याशी पीपी सिंह का नामांकन कराने पहुंच गए। उन्हें कक्ष के गेट पर तैनात पुलिस कर्मियों ने अंदर जाने से रोक दिया। कहा कि अभी सपा वालों का नामांकन चला रहा है, थोड़ी देर रुक जाएगी। इस पर भाजपाई नारेबाजी करने लगे, रोकने पर उनकी पुलिस कर्मियों से नोकझोंक हो गई। सपा नेता नामांकन कराकर कक्ष से बाहर चले गए तो भाजपाई अंदर गए। पीपी सिंह के साथ भाजपा जिलाध्यक्ष रविंद्र राठौर, महानगर अध्यक्ष उमेश कठेरिया, गुलशन आनंद, पूरनलाल लोधी, आदेश प्रताप सिंह और सुरेश राठौर आदि रहे।
दूसरा पर्चा दाखिल न कर सके अनिल
सपा नेता डॉ. अनिल शर्मा को अपना टिकट कटने का अंदाजा पहले ही हो गया था फिर भी वह सुबह 11 बजे अपना पर्चा दाखिल करने कलेक्ट्रेट पहुंच गए और महज 15 मिनट में ही पर्चा दाखिल कर निकल भी गए। उन्हें पार्टीजनों के साथ दूसरा पर्चा दाखिल करना था लेकिन तब तक सब कुछ पलट चुका था।
अचानक मैदान में आई आईएमसी
बदायूं की माधवी साहू खुद को आईएमसी का प्रत्याशी बताते हुए नामांकन कराने पहुंच गईं। हालांकि उन्होंने अपने पर्चे पर स्वतंत्र प्रत्याशी ही दर्ज किया है। आईएमसी के मंडल प्रभारी ऋषिपाल सिंह, जिलाध्यक्ष नदीम खां और शराफत शाह आदि उनका पर्चा दाखिल कराने पहुंचे। उन्होंने तीन बजने से एक मिनट पहले अपना पर्चा दाखिल किया। माधवी बदायूं शहर से विधानसभा का चुनाव भी लड़ चुकी हैं।
पर्चा दाखिल नहीं कर पाए राजा
नामांकन दाखिल करने के निर्धारित समय अपरान्ह तीन बजे के चंद सेकेंड बाद पहुंचे ठाकुरद्वारा रामपुर के रामरक्षपाल सिंह उर्फ राजा ठाकुर का पर्चा दाखिल नहीं हो सका। वह एआरओ एडीएम प्रशासन अरुण कुमार से काफी अनुरोध करते रहे लेकिन उन्होंने आयोग के नियमों का हवाला देकर हाथ खड़े कर दिए। इसके बाद रामरक्षपाल ने सपा के इशारे पर पर्चा स्वीकार न करने का आरोप लगाया।
29 ने लिए पर्चे, भरे सिर्फ नौ ने
एमएलसी चुनाव के लिए आठ फरवरी से चल रही नामांकन प्रक्रिया के दौरान 29 लोगों ने पर्चे लिए थे लेकिन इनमें से 20 लोगों ने पर्चे दाखिल ही नहीं किए। सिर्फ नौ लोगों ने ही नामांकन कराए। भाजपा प्रत्याशी पीपी सिंह ने भी दो पर्चे भरे। पहला पर्चा वह लगभग साढ़े 11 बजे दाखिल कर गए और दूसरा पर्चा ढाई बजे भाजपाइयों के साथ दाखिल करने आए।
भाजपा, बसपा में भी रहे हैं घनश्याम लोधी
रामपुर। घनश्याम सिंह लोधी बरेली-रामपुर एमएलसी सीट से 2004 में चुनाव जीतकर एमएलसी रह चुके हैं। उस वक्त सपा और राष्ट्रीय क्रांति पार्टी के बीच गठबंधन था। लोधी कल्याण सिंह के आशीर्वाद से राष्ट्रीय क्रांति पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़े थे और जीते थे। उससे पहले वह बसपा से 1998 का लोकसभा चुनाव रामपुर संसदीय सीट पर लड़े। यहीं से उन्होंने फिर बसपा के टिकट पर 2009 का लोकसभा चुनाव भी लड़ा लेकिन जीत न सके। लोधी ने राजनीतिक करियर की शुरूआत खैरुलापुर गांव के प्रधान के रूप में की थी। इसके बाद ही वह भाजपा में सक्रिय होकर राजनीति में उतरे और भाजयुमो के रामपुर जिलाध्यक्ष भी रहे। कल्याण सिंह ने जब भाजपा से अलग होकर राष्ट्रीय क्रांति पार्टी बनाई थी तो लोधी उनके साथ चले गए। वह 2011 में सपा में शामिल हो गए थे।
प्रमुख प्रत्याशियों के दावे-
मुझे रविवार रात 11 बजे पता लगा कि प्रत्याशी बनाया जा रहा है। अनिल शर्मा का टिकट क्यों काटा गया, मुझे नहीं मालूम इसलिए कुछ नहीं बता सकता। सपा हाईकमान ने जो विश्वास व्यक्त किया है उस पर खरा उतरूंगा। जीतने के बाद बरेली और रामपुर में समान रूप से विकास कार्य कराएंगे।
-घनश्याम लोधी, सपा प्रत्याशी
सत्ताधारी सपा की गुंडई इस चुनाव में नहीं चल पाएगी। भाजपा हाईकमान के आदेश पर चुनाव लड़ा हूं और जीतकर दिखाऊंगा। जो लोग इस चुनाव को सत्ताधारी दल का मानकर चल रहे हैं, मतगणना के बाद नतीजे देखकर चौंक जाएंगे।
-पीपी सिंह गंगवार, भाजपा प्रत्याशी
भावुक हुए अनिल, पर्चा वापस लेंगे
सपा के पूर्व एमएलसी प्रत्याशी डा. अनिल शर्मा का कहना है कि पार्टी हाईकमान का वह निर्णय भी मुझे स्वीकार थे जिसमें एमएलसी प्रत्याशी बनाया गया था। मुझे येे निर्णय भी स्वीकार है जिसमें मेरा एमएलसी का टिकट कट गया। मैंने नामांकन दाखिल कर दिया था। उसे 18 फरवरी को वापस ले लूंगा। जिन साथियों को मेरे प्रत्याशी बनने से कष्ट था, मैं उनसे कहना चाहता हूं कि जब मुझे चार कंधों पर ले जाने का वक्त होगा, अगर वह उस समय तक पार्टी में रहे तो उनको मेरे समाजवादी होने पर फख्र होगा।
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डॉ अनिल शर्मा से छत्तीस का आंकड़ा रखने वाले डॉ. तोमर को किसी भी कीमत पर अनिल शर्मा का टिकट मंजूर नहीं था। वीरपाल भी मायूस थे कि उनको बिना मांगे एमएलसी का टिकट क्यों नहीं मिला। घनश्याम लोधी तो आश्चर्य जता रहे हैं कि उन्हें ये प्रसाद मिल कैसे गया। 2012 में मेयर का चुनाव लड़ने के लिए डॉ. अनिल शर्मा की पत्नी रजनी शर्मा को सपा का टिकट मिला था। रजनी शर्मा के समर्थन में वीरपाल सिंह यादव, मौलाना रजा खुलकर आए थे। डॉ. आईएस तोमर ने सपा से टिकट न मिलने पर निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी तो सपा ने डॉ. तोमर को समर्थन दे दिया। तबसे ही डॉ. अनिल शर्मा और डॉ. तोमर के बीच छत्तीस का आंकड़ा रहा है।
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अनिल शर्मा को एमएलसी का टिकट मिलने के बाद डॉ. तोमर पुरानी सियासी अदावत निपटाने के लिए वीरपाल के साथ हो गए। सूत्रों के मुताबिक भाजपा से अपने गहरे दोस्त पीपी सिंह को एमएलसी का प्रत्याशी बनवाने में भी कहीं न कहीं डॉ. तोमर का नाम आ रहा है। ऐसा माना जा रहा है कि अगर सपा से अनिल शर्मा का टिकट नहीं बदलता तो मेयर भाजपा प्रत्याशी के पीछे दिखते। अनिल शर्मा के सारे विरोधी एक साथ इकट्ठे हो गए। वीरपाल ने अनिल शर्मा का टिकट बदलवाने के लिए प्रमोद विष्ट और जफरबेग जैसे दूसरी पंक्ति के नेताओं का इस्तेमाल किया। मेयर डा. तोमर और पूर्व सांसद सर्वराज और वीरपाल के त्रिकोण बनाने में इन्हें दौड़ाया गया। इस्लाम साबिर का परिवार वैसे ढुलमुल रहता है लेकिन उनके हित वीरपाल से ही ज्यादा सधते हैं। अनिल शर्मा के साथ भगवतशरण गंगवार को खड़ा देख कर इनको और जोश आ गया।
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लोधी का नामांकन कराने वालों में जिलाध्यक्ष वीरपाल सिंह यादव, मेयर डॉ. आईएस तोमर, शहजिल इस्लाम, जफरबेग, प्रमोद विष्ट, संजीव यादव, मलखान सिंह यादव, आदेश यादव गुड्डू, जिला उपाध्यक्ष अरविंद गंगवार, जाहिद हुसैन गुड्डू और हरीशंकर यादव आदि के साथ ही विधायक अताउर्रहमान भी मौजूद थे।
आधे दस्तखत तो फर्जी थे
अनिल शर्मा को कमजोर प्रत्याशी बताने वाले लेटर बम में आधे दस्तखत तो फर्जी थे। जिस समय लेटर बम तैयार किया गया, उस समय विधायक शहजिल इस्लाम और लोकसभा प्रत्याशी आयशा इस्लाम वहां मौजूद नहीं थे। उनके दस्तखत पूर्व विधायक इस्लाम साबिर ने बनाए। ब्लाक प्रमुखों में अधिकांश मौजूद नहीं थे। अब कहा जा रहा है कि उनके दस्तखत मोबाइल पर सहमति लेने के बाद बनाए गए। कल तक वीरपाल अनभिज्ञता जता रहे थे लेकिन सोमवार को उन्होंने कहा उनके दस्तखत असली थे।
वीरपाल बोले तोमर ने इतिहास बना दिया
जिलाध्यक्ष वीरपाल सिंह यादव का कहना था कि अनिल शर्मा का ऐन वक्त पर टिकट बदलने से ये साबित होता है कि पार्टी में लोकतंत्र है। यहां प्रत्येक व्यक्ति की बात सुनी जाती है। वीरपाल ने कहा कि डॉ तोमर ने इतिहास बनाया है। नए प्रत्याशी घनश्याम लोधी ने वीरपाल और डा. तोमर के पैर छूकर आशीर्वाद लिया।
दो प्राधिकार पत्र आए
लखनऊ से पुलिस लाइन पहुंचे हेलीकाप्टर से एमएलसी चुनाव में सपा प्रत्याशी घनश्याम लोधी के लिए दो प्राधिकार पत्र आए। नामांकन के समय एक प्राधिकार पत्र में गलती मिलने पर दूसरा तुरंत दाखिल किया जा सके। मुख्यमंत्री दफ्तर से शाम चार बजे जिलाध्यक्ष से फोन पर घनश्याम लोधी के नामांकन दाखिल होने की जानकारी ली गई।
‘पार्टी ने अनिल शर्मा को एमएलसी प्रत्याशी बनाया तो हम उनको चुनाव लड़ाने को तैयार थे। अब घनश्याम लोधी को प्रत्याशी बनाया गया है तो उनको लड़ाएंगे। हम तो दरी फट्टा बिछाने वाले आदमी है। हाईकमान के हर आदेश का पालन करना है।’ वीरपाल सिंह यादव, जिलाध्यक्ष सपा
तोमर ने भरा लोधी का पर्चा
बरेली। एमएलसी के लिए पर्चा तो घनश्याम सिंह लोधी का था लेकिन उसे अपनी कलम से मेयर डॉ. आईएस तोमर ने भरा। हेलिकॉप्टर से सिंबल आने के बाद पुलिस लाइन से वीरपाल सिंह अपनी गाड़ी में डॉ. तोमर और लोधी को बैठाकर दोपहर दो बजे कलेक्ट्रेट पहुंचे। पर्चा डॉ. तोमर ने अपने हाथ में लिया और वीरपाल सिंह से पूछकर भरते रहे। इस बीच बहेड़ी विधायक अताउररहमान पहुंच गए। उनके पीछे से जिला पंचायत अध्यक्ष संजय सिंह भी आ गए। रामपुर से नसीर खां भी लोधी के साथ आए हुए थे। तब तक एआरओ अरुण कुमार कक्ष में आकर कुर्सी पर बैठ चुके थे। पर्चा भरने के बाद डॉ. तोमर और वीरपाल सिंह ने उसे घनश्याम लोधी के हाथ में थमा दिया। सारे सपा नेता नामांकन रूम में ही थे। बहुत सारी भीड़ देखकर एआरओ ने कहा भी कि सिर्फ 11 लोग ही यहां रहेंगे। सपा जिलाध्यक्ष ने उनकी बात का समर्थन भी किया और जोर से बोला- चले जाएं बाकी लोग लेकिन कोई गया नहीं। लोधी के पर्चे दो सैट में 2.27 मिनट पर दाखिल हुए।
पुलिस की भाजपाइयों की नोकझोंक
सपा वाले नामांकन कक्ष में अंदर थे, इसी बीच में करीब 2.30 बजे भाजपाई अपने प्रत्याशी पीपी सिंह का नामांकन कराने पहुंच गए। उन्हें कक्ष के गेट पर तैनात पुलिस कर्मियों ने अंदर जाने से रोक दिया। कहा कि अभी सपा वालों का नामांकन चला रहा है, थोड़ी देर रुक जाएगी। इस पर भाजपाई नारेबाजी करने लगे, रोकने पर उनकी पुलिस कर्मियों से नोकझोंक हो गई। सपा नेता नामांकन कराकर कक्ष से बाहर चले गए तो भाजपाई अंदर गए। पीपी सिंह के साथ भाजपा जिलाध्यक्ष रविंद्र राठौर, महानगर अध्यक्ष उमेश कठेरिया, गुलशन आनंद, पूरनलाल लोधी, आदेश प्रताप सिंह और सुरेश राठौर आदि रहे।
दूसरा पर्चा दाखिल न कर सके अनिल
सपा नेता डॉ. अनिल शर्मा को अपना टिकट कटने का अंदाजा पहले ही हो गया था फिर भी वह सुबह 11 बजे अपना पर्चा दाखिल करने कलेक्ट्रेट पहुंच गए और महज 15 मिनट में ही पर्चा दाखिल कर निकल भी गए। उन्हें पार्टीजनों के साथ दूसरा पर्चा दाखिल करना था लेकिन तब तक सब कुछ पलट चुका था।
अचानक मैदान में आई आईएमसी
बदायूं की माधवी साहू खुद को आईएमसी का प्रत्याशी बताते हुए नामांकन कराने पहुंच गईं। हालांकि उन्होंने अपने पर्चे पर स्वतंत्र प्रत्याशी ही दर्ज किया है। आईएमसी के मंडल प्रभारी ऋषिपाल सिंह, जिलाध्यक्ष नदीम खां और शराफत शाह आदि उनका पर्चा दाखिल कराने पहुंचे। उन्होंने तीन बजने से एक मिनट पहले अपना पर्चा दाखिल किया। माधवी बदायूं शहर से विधानसभा का चुनाव भी लड़ चुकी हैं।
पर्चा दाखिल नहीं कर पाए राजा
नामांकन दाखिल करने के निर्धारित समय अपरान्ह तीन बजे के चंद सेकेंड बाद पहुंचे ठाकुरद्वारा रामपुर के रामरक्षपाल सिंह उर्फ राजा ठाकुर का पर्चा दाखिल नहीं हो सका। वह एआरओ एडीएम प्रशासन अरुण कुमार से काफी अनुरोध करते रहे लेकिन उन्होंने आयोग के नियमों का हवाला देकर हाथ खड़े कर दिए। इसके बाद रामरक्षपाल ने सपा के इशारे पर पर्चा स्वीकार न करने का आरोप लगाया।
29 ने लिए पर्चे, भरे सिर्फ नौ ने
एमएलसी चुनाव के लिए आठ फरवरी से चल रही नामांकन प्रक्रिया के दौरान 29 लोगों ने पर्चे लिए थे लेकिन इनमें से 20 लोगों ने पर्चे दाखिल ही नहीं किए। सिर्फ नौ लोगों ने ही नामांकन कराए। भाजपा प्रत्याशी पीपी सिंह ने भी दो पर्चे भरे। पहला पर्चा वह लगभग साढ़े 11 बजे दाखिल कर गए और दूसरा पर्चा ढाई बजे भाजपाइयों के साथ दाखिल करने आए।
भाजपा, बसपा में भी रहे हैं घनश्याम लोधी
रामपुर। घनश्याम सिंह लोधी बरेली-रामपुर एमएलसी सीट से 2004 में चुनाव जीतकर एमएलसी रह चुके हैं। उस वक्त सपा और राष्ट्रीय क्रांति पार्टी के बीच गठबंधन था। लोधी कल्याण सिंह के आशीर्वाद से राष्ट्रीय क्रांति पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़े थे और जीते थे। उससे पहले वह बसपा से 1998 का लोकसभा चुनाव रामपुर संसदीय सीट पर लड़े। यहीं से उन्होंने फिर बसपा के टिकट पर 2009 का लोकसभा चुनाव भी लड़ा लेकिन जीत न सके। लोधी ने राजनीतिक करियर की शुरूआत खैरुलापुर गांव के प्रधान के रूप में की थी। इसके बाद ही वह भाजपा में सक्रिय होकर राजनीति में उतरे और भाजयुमो के रामपुर जिलाध्यक्ष भी रहे। कल्याण सिंह ने जब भाजपा से अलग होकर राष्ट्रीय क्रांति पार्टी बनाई थी तो लोधी उनके साथ चले गए। वह 2011 में सपा में शामिल हो गए थे।
प्रमुख प्रत्याशियों के दावे-
मुझे रविवार रात 11 बजे पता लगा कि प्रत्याशी बनाया जा रहा है। अनिल शर्मा का टिकट क्यों काटा गया, मुझे नहीं मालूम इसलिए कुछ नहीं बता सकता। सपा हाईकमान ने जो विश्वास व्यक्त किया है उस पर खरा उतरूंगा। जीतने के बाद बरेली और रामपुर में समान रूप से विकास कार्य कराएंगे।
-घनश्याम लोधी, सपा प्रत्याशी
सत्ताधारी सपा की गुंडई इस चुनाव में नहीं चल पाएगी। भाजपा हाईकमान के आदेश पर चुनाव लड़ा हूं और जीतकर दिखाऊंगा। जो लोग इस चुनाव को सत्ताधारी दल का मानकर चल रहे हैं, मतगणना के बाद नतीजे देखकर चौंक जाएंगे।
-पीपी सिंह गंगवार, भाजपा प्रत्याशी
भावुक हुए अनिल, पर्चा वापस लेंगे
सपा के पूर्व एमएलसी प्रत्याशी डा. अनिल शर्मा का कहना है कि पार्टी हाईकमान का वह निर्णय भी मुझे स्वीकार थे जिसमें एमएलसी प्रत्याशी बनाया गया था। मुझे येे निर्णय भी स्वीकार है जिसमें मेरा एमएलसी का टिकट कट गया। मैंने नामांकन दाखिल कर दिया था। उसे 18 फरवरी को वापस ले लूंगा। जिन साथियों को मेरे प्रत्याशी बनने से कष्ट था, मैं उनसे कहना चाहता हूं कि जब मुझे चार कंधों पर ले जाने का वक्त होगा, अगर वह उस समय तक पार्टी में रहे तो उनको मेरे समाजवादी होने पर फख्र होगा।