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Bareilly News: यहां कार्रवाई सिफर, उत्तराखंड में पकड़े जा रहे बरेली के स्मैक तस्कर
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सीमा पर निगरानी कम होने का फायदा उठा रहे आरोपी,
बरेली। उत्तराखंड पुलिस इन दिनों स्मैक व अन्य मादक पदार्थ के तस्करों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई कर रही है। इनमें आधे से ज्यादा तस्करों का जुड़ाव बरेली जिले से निकल रहा है। दिल्ली, हरियाणा सहित दूसरे राज्यों में भी बरेली के नशा तस्कर पकड़े जाते हैं, पर यहां कार्रवाई नहीं होती। बरेली पुलिस सालों पहले की गई कार्रवाई का हवाला देकर मामले को नकार देती है।
जिले के तस्कर अफीम से स्मैक तैयार कर दूसरे प्रदेशों तक सप्लाई करते हैं। इसके लिए फतेहगंज पश्चिमी कस्बा और फरीदपुर क्षेत्र का बेहरा गांव बदनाम हैं। अलीगंज, भमोरा, सिरौली, मीरगंज आदि इलाकों में भी तस्कर झारखंड से क्रूड लाकर उसमें कट और पावर पाउडर मिलाकर स्मैक बनाते हैं। एक किलो स्मैक की कीमत लाखों में होती है। यही कारण है जो तस्कर इसका मोह नहीं छोड़ पा रहे हैं।
नए साल के पहले दिन रुद्रपुर पुलिस ने फतेहगंज पश्चिमी के चर्चित तस्कर रिफाकत को पैर में गोली मारकर गिरफ्तार किया था। 17 जनवरी को रुद्रपुर कोतवाली पुलिस ने फतेहगंज पश्चिमी निवासी स्मैक तस्कर नजाकत अली को मुठभेड़ में गिरफ्तार किया था। 30 जनवरी को सहारनपुर पुलिस ने देवर-भाभी मुस्तफा, रईस व नवाबो को स्मैक के साथ गिरफ्तार किया था। उनके पास से 50 लाख रुपये कीमत की स्मैक मिली। पिछले साल तो बरेली कैंट थाने का सिपाही और बरेली के दो छात्र स्मैक की तस्करी में पकड़े गए थे। हाल ही में इज्जतनगर निवासी तस्कर शहजाद को एसटीएफ ने देहरादून से 300 ग्राम स्मैक सहित गिरफ्तार किया था।
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फतेहगंज पश्चिमी में कल्लू डॉन और उस्मान फिर सक्रिय
फतेहगंज पश्चिमी का चर्चित स्मैक तस्कर शाहिद उर्फ कल्लू डॉन फिर सक्रिय हो गया है। जेल से छूटने के बाद वह सफेदपोश की भूमिका में है। उस्मान और रेहाना भी फतेहगंज पश्चिमी से लेकर बरेली तक सक्रिय हैं। सूत्र बताते हैं कि कल्लू व उस्मान आदि तस्कर सीधे तौर पर धंधा नहीं कर रहे हैं, पर गुर्गे इनके संरक्षण में काम कर रहे हैं। इशाकत और शराफत ने उत्तराखंड के रुद्रपुर व रिफाकत ने काशीपुर को अपनी गतिविधियों का केंद्र बना रखा है। यह दिखावे को उत्तराखंड में रहते हैं, पर गुर्गों के सहारे बरेली से मादक पदार्थों की सप्लाई कराते रहते हैं। नन्हे लंगड़ा ने बुजुर्ग होने की वजह से धंधे से दूरी बना ली है, पर रिश्तेदार प्रधान के जरिये वह भी पुराने धंधे को ऑक्सीजन दे रहा है।
ट्रेन से हो रही तस्करी, महिलाएं और लड़के ला रहे माल
झारखंड व पूर्वोत्तर के इलाकों में अफीम की खेती बड़े पैमाने पर होती है। सूत्र बताते हैं कि नक्सल प्रभावित इलाकों में वहां के प्रशासन का किसानों पर ज्यादा नियंत्रण नहीं है तो स्थानीय तस्करों को सस्ते में अफीम मिल जाती है। तस्कर झारखंड से ही क्रूड समेत कट व पावर पाउडर भी मंगाते हैं। तस्कर इस काम के लिए नाबालिग लड़कों और महिलाओं का इस्तेमाल करते हैं। ट्रेन के जरिये माल मंगाते हैं।
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बरेली में स्मैक तस्करों पर पहले ही बड़ी कार्रवाई हो चुकी है। इसलिए ज्यादातर आरोपी अब उत्तराखंड व दूसरे प्रदेशों में ही जाकर रहने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर उनकी सक्रियता नहीं है। फिर भी उनकी गतिविधियों की निगरानी कराई जाएगी। - मुकेश चंद्र मिश्रा, एसपी उत्तरी
अमर उजाला ब्यूरो
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बरेली। उत्तराखंड पुलिस इन दिनों स्मैक व अन्य मादक पदार्थ के तस्करों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई कर रही है। इनमें आधे से ज्यादा तस्करों का जुड़ाव बरेली जिले से निकल रहा है। दिल्ली, हरियाणा सहित दूसरे राज्यों में भी बरेली के नशा तस्कर पकड़े जाते हैं, पर यहां कार्रवाई नहीं होती। बरेली पुलिस सालों पहले की गई कार्रवाई का हवाला देकर मामले को नकार देती है।
जिले के तस्कर अफीम से स्मैक तैयार कर दूसरे प्रदेशों तक सप्लाई करते हैं। इसके लिए फतेहगंज पश्चिमी कस्बा और फरीदपुर क्षेत्र का बेहरा गांव बदनाम हैं। अलीगंज, भमोरा, सिरौली, मीरगंज आदि इलाकों में भी तस्कर झारखंड से क्रूड लाकर उसमें कट और पावर पाउडर मिलाकर स्मैक बनाते हैं। एक किलो स्मैक की कीमत लाखों में होती है। यही कारण है जो तस्कर इसका मोह नहीं छोड़ पा रहे हैं।
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नए साल के पहले दिन रुद्रपुर पुलिस ने फतेहगंज पश्चिमी के चर्चित तस्कर रिफाकत को पैर में गोली मारकर गिरफ्तार किया था। 17 जनवरी को रुद्रपुर कोतवाली पुलिस ने फतेहगंज पश्चिमी निवासी स्मैक तस्कर नजाकत अली को मुठभेड़ में गिरफ्तार किया था। 30 जनवरी को सहारनपुर पुलिस ने देवर-भाभी मुस्तफा, रईस व नवाबो को स्मैक के साथ गिरफ्तार किया था। उनके पास से 50 लाख रुपये कीमत की स्मैक मिली। पिछले साल तो बरेली कैंट थाने का सिपाही और बरेली के दो छात्र स्मैक की तस्करी में पकड़े गए थे। हाल ही में इज्जतनगर निवासी तस्कर शहजाद को एसटीएफ ने देहरादून से 300 ग्राम स्मैक सहित गिरफ्तार किया था।
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फतेहगंज पश्चिमी में कल्लू डॉन और उस्मान फिर सक्रिय
फतेहगंज पश्चिमी का चर्चित स्मैक तस्कर शाहिद उर्फ कल्लू डॉन फिर सक्रिय हो गया है। जेल से छूटने के बाद वह सफेदपोश की भूमिका में है। उस्मान और रेहाना भी फतेहगंज पश्चिमी से लेकर बरेली तक सक्रिय हैं। सूत्र बताते हैं कि कल्लू व उस्मान आदि तस्कर सीधे तौर पर धंधा नहीं कर रहे हैं, पर गुर्गे इनके संरक्षण में काम कर रहे हैं। इशाकत और शराफत ने उत्तराखंड के रुद्रपुर व रिफाकत ने काशीपुर को अपनी गतिविधियों का केंद्र बना रखा है। यह दिखावे को उत्तराखंड में रहते हैं, पर गुर्गों के सहारे बरेली से मादक पदार्थों की सप्लाई कराते रहते हैं। नन्हे लंगड़ा ने बुजुर्ग होने की वजह से धंधे से दूरी बना ली है, पर रिश्तेदार प्रधान के जरिये वह भी पुराने धंधे को ऑक्सीजन दे रहा है।
ट्रेन से हो रही तस्करी, महिलाएं और लड़के ला रहे माल
झारखंड व पूर्वोत्तर के इलाकों में अफीम की खेती बड़े पैमाने पर होती है। सूत्र बताते हैं कि नक्सल प्रभावित इलाकों में वहां के प्रशासन का किसानों पर ज्यादा नियंत्रण नहीं है तो स्थानीय तस्करों को सस्ते में अफीम मिल जाती है। तस्कर झारखंड से ही क्रूड समेत कट व पावर पाउडर भी मंगाते हैं। तस्कर इस काम के लिए नाबालिग लड़कों और महिलाओं का इस्तेमाल करते हैं। ट्रेन के जरिये माल मंगाते हैं।
बरेली में स्मैक तस्करों पर पहले ही बड़ी कार्रवाई हो चुकी है। इसलिए ज्यादातर आरोपी अब उत्तराखंड व दूसरे प्रदेशों में ही जाकर रहने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर उनकी सक्रियता नहीं है। फिर भी उनकी गतिविधियों की निगरानी कराई जाएगी। - मुकेश चंद्र मिश्रा, एसपी उत्तरी
अमर उजाला ब्यूरो