मरते मरते बेटे की जान बचा गए अफसान
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सिंगाही गांव के मैंथा टैंक में तीन लोगों की जिंदगी दस मिनट में ही खत्म हो गई। जबतक लोग कुछ समझते तीन परिवारों की खुशियां लुट चुकी थीं। प्लांट मालिक किसान अफसार के बेटे अजहर की भी जान जाते- जाते बची। पिता को बचाने के लिए अजहर टैंक में उतरने को बढ़ चला था लेकिन आखिरी सांस ले रहे अफसान ने इशारों में हाथ हिलाकर मना किया। उसका इशारा समझकर जैसे ही अजहर रुका अफसान निढाल होकर गिर गए। इस खौफनाम मंजर को देखने वाले झब्बू और प्रेमपाल देर तक कांपते रहे। उनका कहना था कि एक ही पल में इतना बड़ा हादसा हो गया वह कुछ नहीं कर सके।
प्रत्यक्षदर्शी मजदूर झब्बू और प्रेमपाल काफी सदमे में थे। उन्होंने दस मिनट के अंतराल का वो वाकया सुनाया तो सुनने वाले सन्न रह गए। बताया कि विकास के पछाड़ खाने के बाद अफसान नहीं समझ पाये कि उसकी मौत हो चुकी है। उन्होंने सोचा कि किसी कमजोरी की वजह से वह गिरा है। इसका जिक्र अफसान ने उन लोगों से किया और नीचे उतर गए। करीब मिनट भर वे सही खड़े रहे। विकास को उठाकर कंधे पर रखा। ऊपर खड़े वे लोग उम्मीद से अफसान की ओर देखने लगे। अफसान ने चिल्लाकर कहा कि वे विकास को अकेले नहीं ला पाएंगे, एक आदमी और आओ। इससे पहले उनमें से कोई उतरता अफसान खुद लुढ़क गए। इसे देख रहा अजहर नीचे उतरने को चेन पकड़ने लगा तो अफसान ने हाथ से उसे न उतरने का इशारा किया और शांत हो गए। तब उन लोगों ने अजहर को रोक लिया। राजेश इन सब लोगों में तगड़ा था। उसने उनसे कहा कि वही इन लोगों को निकालकर लाएगा और नीचे उतर गया। इन्हें उठाने का उपक्रम करते हुए जब वह भी इन्हीं के ऊपर गिर गया तो उनको किसी बड़े खतरे का आभास हुआ। प्रेमपाल ने बताया कि दिल में आया इन लोगों को लेने वे नीचे उतरें पर कदम ठिठक गए। वे लोग अंत तक ये समझ रहे थे कि ये लोग बेहोश हुए हैं पर जब इन्हें ऊपर लाया गया तो समझ सके कि इनकी मौत हो चुकी है।