{"_id":"120-98004","slug":"Bareilly-98004-120","type":"story","status":"publish","title_hn":"एक नहीं कई घपले हुए बरेली कालेज में","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एक नहीं कई घपले हुए बरेली कालेज में
Bareilly
Updated Wed, 16 Jul 2014 05:34 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
बरेली। सीएमओ डॉ. विजय यादव की अध्यक्षता में बनी तीन सदस्यीय कमेटी की जांच रिपोर्ट बरेली कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. आरपी सिंह के कार्यकाल में कुल मिलाकर करोड़ों के घपले बयान कर रही है। रिपोर्ट के मुताबिक विभिन्न मदों में लाखों के खर्च के बावजूद उनके बिल भी प्रस्तुत नहीं किए गए।
प्रास्पेक्टस छपाई कभी आठ तो कभी 16 रुपये में
जांच रिपोर्ट में प्रॉस्पेक्टस की छपाई पर तीन सालों में अलग-अलग की धनराशि खर्च दिखाने का जिक्र है। वर्ष 2005 का ज्ञान प्रेस में 17.07 रुपये प्रति प्रॉस्पेक्टस छपाई हुई तो 2006 में हिंद प्रिंटर्स पर 8.27 रुपये प्रति प्रॉस्पेक्टस। वर्ष 2007 में हिंद प्रिंटर्स पर इसकी छपाई 16.80 रुपये प्रति कॉपी की दर से कराई गई। एक ही प्रेस में प्रिंटिंग के खर्च में दोगुने से भी ज्यादा का अंतर है। बरेली कॉलेज को इससे लगभग 1,37,760 रुपये का नुकसान हुआ।
कौन से गोपनीय कामों पर खर्च कर दिए 35 लाख
जांच रिपोर्ट के मुताबिक बरेली कॉलेज में गोपनीय कार्यों पर वर्ष 2005 में 8,10,363 रुपये का खर्च दिखाया गया। इसी साल 44314 रुपये के 11 बिजली के बिलों का भुगतान किया गया। वर्ष 2006 में 10,20,054 रुपये गोपनीय कार्य पर खर्च किए गए। वर्ष 2007 में 15,74556 रुपये और गोपनीय कामों पर खर्च किए गए लेकिन कोई भी बिल सीए को नहीं दिखाया गया।
विज्ञापन
कहां छपवाए गए 93.68 लाख के फार्म
रिपोर्ट बताई है कि इस साल लगभग 93.68 लाख का खर्च फार्म की छपाई पर किया गया। जेमनी कंसलटेंसी सर्विस दिल्ली और केएल बंसल आगरा प्रेस से फार्म छपवाने की बात कही गई लेकिन उनकी रसीदों, बिलों और कोटेशन में अलग-अलग पते दिखाए गए हैं। यही नहीं बरेली-आगरा और बरेली-दिल्ली के बीच टैक्सी पर 33,892 रुपये व्यय दिखाया गया जो बाजार के रेट से ज्यादा है। इसका भी कोई वाउचर नहीं दिखाया गया।
बिना कुटेशन छात्रसंघ भवन पर नौ लाख खर्च
वर्ष 2006-07 में छात्रसंघ भवन के निर्माण पर 9,28,640 रुपये दर्शाए गए हैं। इसके लिए कोई कोटेशन नहीं लिया गया। बल्कि इंजीनियर का खर्च अलग से दिखाया गया। 2006-07 में स्नातकोत्तर के आठ हजार प्रॉस्पेक्टस 18.3 रुपये प्रति प्रॉस्पेक्टस की दर से कुल 1,44031 रुपये में छपवाए गए। इसमें कुल 2,973 प्रॉस्पेक्टर ही बिके। पांच हजार प्रॉस्पेक्टस न बिकने से कॉलेज को 90,150 रुपये का नुकसान हुआ। 2007 में 13 हजार रुपये स्टाफ को अग्रिम दिया गया जिसकी कोई रिकवरी नहीं हुई।
आवेदन फीस में भी 15 लाख का गोलमाल
व्यक्तिगत परीक्षा के आवेदन पत्रों से स्नातक स्तर पर 40 रुपये और स्नातकोत्तर स्तर पर 60 रुपये की फीस ली गई। यह रकम 17,51,980 रुपये बनती है। इसके अलावा प्रति छात्र 10 रुपये अग्रसारण लिए जाने से 2,78,240 रुपये की आय हुई। दोनों मद में 20,30,220 रुपये की आय दशाई गई है। इसमें 1,11,132 रुपये प्राचार्य और अन्य स्टाफ को दिया गया। इस मद में 7,41,741 रुपये खर्च किया गया। 1999 में प्रदेश सरकार के अध्यादेश में निर्देश में दिया गया है कि इस मद की रकम में 25 फीसदी अग्रसारण अधिकारी व कर्मचारियों में वितरित होना चाहिए। लेकिन सीए की रिपोर्ट के मुताबिक 75 फीसदी से ज्यादा धनराशि पूर्व प्राचार्य और स्टाफ पर खर्च कर दी गई।
----------------
पहले बरेली कॉलेज का पैनल ऑडिट रिपोर्ट की जांच करता है। फिर सीए से जांच कराई जाती है। इस ऑडिट रिपोर्ट पर दो बार जांच हो चुकी है, अब तीसरी बार कराई जा रही है। आखिर कितनी बार जांच होगी। दरअसल मैं भाजपा से एमएलसी के चुनाव के लिए मजबूत दावेदार हूं और शायद इसीलिए वीरपाल सिंह यादव मुझे टारगेट बना रहे हैं। - डॉ. आरपी सिंह, पूर्व प्राचार्य
प्रास्पेक्टस छपाई कभी आठ तो कभी 16 रुपये में
जांच रिपोर्ट में प्रॉस्पेक्टस की छपाई पर तीन सालों में अलग-अलग की धनराशि खर्च दिखाने का जिक्र है। वर्ष 2005 का ज्ञान प्रेस में 17.07 रुपये प्रति प्रॉस्पेक्टस छपाई हुई तो 2006 में हिंद प्रिंटर्स पर 8.27 रुपये प्रति प्रॉस्पेक्टस। वर्ष 2007 में हिंद प्रिंटर्स पर इसकी छपाई 16.80 रुपये प्रति कॉपी की दर से कराई गई। एक ही प्रेस में प्रिंटिंग के खर्च में दोगुने से भी ज्यादा का अंतर है। बरेली कॉलेज को इससे लगभग 1,37,760 रुपये का नुकसान हुआ।
विज्ञापन
कौन से गोपनीय कामों पर खर्च कर दिए 35 लाख
जांच रिपोर्ट के मुताबिक बरेली कॉलेज में गोपनीय कार्यों पर वर्ष 2005 में 8,10,363 रुपये का खर्च दिखाया गया। इसी साल 44314 रुपये के 11 बिजली के बिलों का भुगतान किया गया। वर्ष 2006 में 10,20,054 रुपये गोपनीय कार्य पर खर्च किए गए। वर्ष 2007 में 15,74556 रुपये और गोपनीय कामों पर खर्च किए गए लेकिन कोई भी बिल सीए को नहीं दिखाया गया।
विज्ञापन
कहां छपवाए गए 93.68 लाख के फार्म
रिपोर्ट बताई है कि इस साल लगभग 93.68 लाख का खर्च फार्म की छपाई पर किया गया। जेमनी कंसलटेंसी सर्विस दिल्ली और केएल बंसल आगरा प्रेस से फार्म छपवाने की बात कही गई लेकिन उनकी रसीदों, बिलों और कोटेशन में अलग-अलग पते दिखाए गए हैं। यही नहीं बरेली-आगरा और बरेली-दिल्ली के बीच टैक्सी पर 33,892 रुपये व्यय दिखाया गया जो बाजार के रेट से ज्यादा है। इसका भी कोई वाउचर नहीं दिखाया गया।
बिना कुटेशन छात्रसंघ भवन पर नौ लाख खर्च
वर्ष 2006-07 में छात्रसंघ भवन के निर्माण पर 9,28,640 रुपये दर्शाए गए हैं। इसके लिए कोई कोटेशन नहीं लिया गया। बल्कि इंजीनियर का खर्च अलग से दिखाया गया। 2006-07 में स्नातकोत्तर के आठ हजार प्रॉस्पेक्टस 18.3 रुपये प्रति प्रॉस्पेक्टस की दर से कुल 1,44031 रुपये में छपवाए गए। इसमें कुल 2,973 प्रॉस्पेक्टर ही बिके। पांच हजार प्रॉस्पेक्टस न बिकने से कॉलेज को 90,150 रुपये का नुकसान हुआ। 2007 में 13 हजार रुपये स्टाफ को अग्रिम दिया गया जिसकी कोई रिकवरी नहीं हुई।
आवेदन फीस में भी 15 लाख का गोलमाल
व्यक्तिगत परीक्षा के आवेदन पत्रों से स्नातक स्तर पर 40 रुपये और स्नातकोत्तर स्तर पर 60 रुपये की फीस ली गई। यह रकम 17,51,980 रुपये बनती है। इसके अलावा प्रति छात्र 10 रुपये अग्रसारण लिए जाने से 2,78,240 रुपये की आय हुई। दोनों मद में 20,30,220 रुपये की आय दशाई गई है। इसमें 1,11,132 रुपये प्राचार्य और अन्य स्टाफ को दिया गया। इस मद में 7,41,741 रुपये खर्च किया गया। 1999 में प्रदेश सरकार के अध्यादेश में निर्देश में दिया गया है कि इस मद की रकम में 25 फीसदी अग्रसारण अधिकारी व कर्मचारियों में वितरित होना चाहिए। लेकिन सीए की रिपोर्ट के मुताबिक 75 फीसदी से ज्यादा धनराशि पूर्व प्राचार्य और स्टाफ पर खर्च कर दी गई।
----------------
पहले बरेली कॉलेज का पैनल ऑडिट रिपोर्ट की जांच करता है। फिर सीए से जांच कराई जाती है। इस ऑडिट रिपोर्ट पर दो बार जांच हो चुकी है, अब तीसरी बार कराई जा रही है। आखिर कितनी बार जांच होगी। दरअसल मैं भाजपा से एमएलसी के चुनाव के लिए मजबूत दावेदार हूं और शायद इसीलिए वीरपाल सिंह यादव मुझे टारगेट बना रहे हैं। - डॉ. आरपी सिंह, पूर्व प्राचार्य