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तो ये सब बाबरिया गिरोह की करतूत है
Bareilly
Updated Fri, 25 Apr 2014 05:30 AM IST
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बरेली। थाना बारादरी इलाके की पाश कॉलोनी सुरेश शर्मा नगर के ट्रिपल मर्डर केस में पश्चिमी यूपी के कई जिलों में पुलिस की टीमें बाबारियों की तलाश में जुट गई है। इसके अलावा योगेश मिश्रा के पड़ोस में मकान बनवाने वाले मिठाई विक्रेता सतीश गुप्ता के यहां काम कर रहे अन्नू और गुड्डू समेत कई लोगों को शक के आधार पर उठाकर पुलिस पूछताछ कर रही है। फील्ड यूनिट ने मिलान करने के लिए अन्नू और गुड्डू के फिंगर प्रिंट लिए हैं। गुड्डू शाहजहांपुर के जलालाबाद कोतवाली इलाके के सुरई प्रतापपुर गांव का रहने वाला है। जबकि उसका दूसरा थाना बिथरी चैनपुर के रजऊ गांव का रहने वाला है। ये दोनों जोगीनवादा इलाके में किराए का मकान लेकर रहते हैं।
ट्रिपल मर्डर केस के खुलासे को एसएसपी ने तीन इंस्पेक्टर और सात दरोगाओं के अलावा कई और टीमें लगाई गई है। मुजफ्फर नगर में बाबरिया जाति के करीब 13 गांव हैं। वहां का झिनझिना इलाका इस जाति के अपराधियों का गढ़ कहा जाता है। वहां के लिए पुलिस टीम रवाना कर दी है। कटरी के अनुभवी इंस्पेक्टर विजय राणा शाहजहांपुर के कटरी इलाके में बाबारियों की तलाश में गढ़िया रंगीन गए हैं। बदायूं के दातागंज के कटरी इलाके के कई गांव में पुलिस टीम ने बाबारियों की तलाश में मुखबिरों का जाल बिछा दिया है। मुरादाबाद के भोजपुर के अलावा लखीमपुर, रामपुर आदि जिलों में भी बाबारियों की तलाश शुरू हो गई है। लेकिन अभी तक कोई नतीजा नहीं निकला है। एसपी क्राइम डा. एसपी सिंह ने बताया कि सभी बिंदुओं पर विवेचना की जा रही है। कई जिलों को टीमें भेजी गई है। लेकिन अभी कोई सुराग नहीं मिला है।
बाबरिया गैंग के जॉनी और महरूम की तलाश
जेल में बंद सरगना मोइन और फरमान से एसटीएफ करेगी पूछताछ
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। सुरेश शर्मा नगर के ट्रिपल मर्डर केस और लूटपाट के मामले का खुलासा करने से लिए एसटीएफ भी जुट गई है। एसटीएफ इस वारदात को बाबरियों के गैंग से जोड़कर देख रही है। कई साल से फरार चले रहे दस हजार के इनामी बदमाश जॉनी और महरूम की तलाश की जा रही है। एसटीएफ शुक्रवार को जेल में सजा काट रहे बाबरिया गैंग के सरगना मोइन और उसके साथी फरमान से पूछताछ करेगी।
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बहेड़ी का पचपेड़ा और मुरादाबाद का भोजपुर गांव बरेली जोन में बाबरिया गैंग के शातिर बदमाशों का गढ़ रहा है। पचपेड़ा गांव का 50 हजार रुपये के इनामी बदमाश मोइन को एसटीएफ ने सुभाषनगर से गिरफ्तार कर ढाई साल पहले जेल भेजा था। वह पेशी पर दूसरे जिले जाते वक्त अमरोहा के सिपाहियों को धक्का देकर फरार हो गया था। भोजपुर गांव का इसी के गैंग का शातिर बदमाश फरमान भी ट्रेन से पेशी पर जाते वक्त पुलिस कस्टडी से फरार हो गया था। डेढ़ साल पहले एसटीएफ ने ही फरमान को लखीमपुर से गिरफ्तार कर जेल भेजा था। दोनों जेलों में सजा काट रहे हैं। उनके दो शातिर साथी जॉनी और महरूम कई साल से फरार हैं।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक शासन से दस हजार इनाम घोषित होने के बाद दोनों बदमाश भेष बदलकर यूपी में रहते हैं और ठिकाने बदलकर आपराधिक वारदातों को अंजाम देते हैं। एसटीएफ उनके ठिकानों का पता लगवा रही है। भोजपुर और पचपेड़ा गांवों में मुखबिरों लगा दिया गया है। एसपी सिटी राजीव मल्होत्रा ने बताया कि लूट की वारदात करने से पहले बाबरिया गैंग रैकी कराने के लिए हर फंडा अपनाता है। उनके परिवार की महिलाएं घरों में कम पैसे पर काम करने को भी तैयार हो जाती हैं।
हथियार लेकर नहीं चलते बाबरिए
बाबरिया गैंग के बदमाश कभी हथियार लेकर नहीं चलते हैं। पहले वह घटना को अंजाम देने के लिए नल के हत्थे का इस्तेमाल करते थे, लेकिन अब नल बाहर लगे नहीं मिलते। कॉलोनी कल्चर में तो हत्थे वाले नल मिलना और मुश्किल है। ऐसे में बदमाशों ने नल के हत्थे की जगह रॉड का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। गैंग के बदमाश मोबाइल का इस्तेमाल भी नहीं करते हैं। सुरेश शर्मा नगर में हुए तिहरे हत्याकांड में भी बदमाशों की ओर से मोबाइल का इस्तेमाल नहीं करने की बात सामने आ रही है। नल के हत्थे के स्थान पर घटना में रॉड का इस्तेमाल किया गया है।
फोटो---------
योगेश, प्रिया और पुष्पा का अंतिम संस्कार किया
बरेली। सुरेशनगर कॉलोनी के मकान नंबर-25 ए के योगेश मिश्रा और उनकी पत्नी प्रिया मिश्रा और मां पुष्पादेवी के शव का संजयनगर श्मशान भूमि में अंतिम संस्कार कर दिया। उधर एसपी सिटी राजीव मल्होत्रा और क्राइम ब्रांच की टीम ने मौके पर पहुंचकर छानबीन की।
एसपी सिटी ने योगेश के छोटे भाई रविकांत मिश्रा से बात की। शाहजहांपुर जिले जलालाबाद कोतवाली के खेड़ा गांव के आए योगेश के चाचा सत्यदेव मिश्रा ने एसपी से कहा कि ऐसा लग रहा है कि बदमाश हत्या के इरादे से ही आए थे। उन्हें लूटपाट करनी होती तो तीनों को बंधक बनाकर भी की जा सकती थी। इस पर एसपी सिटी ने कहा कि पुलिस के लिए तो अभी तक यह केस ब्लाइंड है। इसलिए इसमें जिसके पास जो जानकारी है, वह पुलिस के शेयर कर ले। ताकि हत्यारों के पहुंचने में पुलिस को कुछ मद्द मिल जाए। एसपी सिटी के बाद क्राइम ब्रांच टीम भी मौके पर छानबीन करने के लिए पहुंची।
छोटे भाई से हुई थी योगेश की बात
-घटना की रात को नौ बजे योगेश की अपने छोटे भाई इन्कम टेक्स इंस्पेक्टर रविकांत मिश्रा से बात हुई थी। इसके बाद उनकी किसी से बात नहीं हुई। दो मोबाइल घटना के दिन ही पुलिस को मिल गए थे। तीसरा मोबाइल भी पुलिस को बृहस्पतिवार को मिल गया है।
इंस्पेक्टर को शादी के बारे में छानबीन करने को लगाया
-योगेश की पहली शादी का रिकार्ड खंगालने के लिए एक इंस्पेक्टर को लगाया गया है। वह शादी के दिन से कोर्ट तक के प्रकरण और रिश्ता टूटने की वजह सभी की जानकारी करेंगे। इसके अलावा इंस्पेक्टर को यह भी पता लगाना है कि परिवार वालों ने योगेश की शादी करने में जल्दबाजी की है या नहीं, जल्दबाजी की गई तो इसके पीछे वजह क्या थी। योगेश के पिता दातागंज(बदायूं) में ब्लाक में कर्मचारी थे। वहीं उनकी पहली पत्नी के पिता भी नौकरी करते थे। दोनों में बातचीत होने के बाद रिश्ता तय होकर शादी हो गई थी। कई साल तक योगेश की पहली पत्नी उसके साथ रहीं। इस बीची योगेश का ससुरवालों से कई बार विवाद भी हुआ था।
आई कॉन नाम से कंपनी चलाता था योगेश
-साफ्टवेयर इंजीनियर योगेश मिश्रा ने कई साल एक निजी इंस्टीट्यूट में नौकरी की, बाद में आमदनी बढ़ाने के लिए उन्होंने आई कॉन नाम से एक साफ्टवेयर कंसलटेंसी कंपनी बना ली। इसके जरिए वह करार करके छोटी कंपनियों को साफ्टवेयर बनाकर बेचते थे। घर से ही उनका यह काम चलता रहता था।
पल-पल की खबर ले रहे हैं अफसर
ट्रिपल मर्डर केस को चुनौती की तरह लेकर पुलिस हत्यारों की तलाश में लगी है। एसएसपी जे रविंदर गौड़ रोजाना रात को 11 बजे सारे दिन की प्रगति की समीक्षा कर रहे हैं। बृहस्पतिवार को उन्होंने सभी टीमों को बुलाकर खुलासे को हो रहे प्रयासों की जानकारी करके उन्हें टिप्स दिए। उधर आईजी और डीआईजी भी इस मामले में पल-पल की जानकारी कर रहे हैं।
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बैंक मैनेजर के घर को भी बनाया था निशाना
क्रासर
-घटना की रात मैनेजर के किचन की खिड़की तोड़ने की कोशिश की गई थी
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। सुरेश शर्मा नगर में सॉफ्टवेयर इंजीनियर योगेश मिश्रा, उनकी पत्नी प्रिया मिश्रा और मां पुष्पा देवी का बेरहमी के कत्ल कर लूटपाट करने वालों ने पहले इसी कालोनी में बैंक मैनेजर के घर को निशाना बनाया था। उन्होंने बैंक मैनेजर की लॉबी में पहुंचकर किचन की खिड़की खोली और उसकी एंगिल निकालने की कोशिश की थी। मैनेजर के बेटे के जागने की आहट से बदमाश भाग गए।
योगेश मिश्रा के घर हुई सनसनीखेज वारदात की सूचना मिलने के बाद देखा गया कि उनके घर बाहर लगी वैल के नीचे डी लिखा है। बाद में कॉलोनी में कई घरों को देखने के बाद एक घर ऐसा मिल गया कि जिसके बाहर ए लिखा है। घटना के दिन पुलिस ने भी इस बात को गंभीरता से नहीं लिखा। मजाक में कह दिया गया कि यह समाचार पत्रों के हॉकरों ने अपनी पहचान के लिए किया होगा। लेकिन सवाल यह उठा कि ऐसा है तो सिर्फ दो ही मकानों पर पहचान क्यों की गई। सर्वे करने वाले तो सभी मकान पर रीडर की पहचान बनाते।
ए और डी के बीच का राज जानने के लिए हमारी टीम बृहस्पतिवार दोपहर करीब एक बजे ए लिखे मकान पर पहुंची। वैल बजाने पर अंदर से कौन है कि आवाज आई फिर बाद सन्नाटा हो गया। फिर से वैल बजाने पर महिला ने पूछा-किससे मिलना है। महिला ने अपना नाम मीनाक्षी बताते हुए कहा कि उनके पति शरद भूमि विकास बैंक की फरीदपुर में ब्रांच मैनेजर हैं। मंगलवार रात को पहले बदमाशों ने उनके घर को निशाना बनाने की कोशिश की थी। रात करीब एक बजे उनका बेटा पानी पीने के उठा था, उसने घर में लाइट जलाई तो शायद वह लोग भाग गए। उनके किचन की खिड़की भी लॉबी की तरफ को है। किचन में दरवाजा नहीं है। बदमाशों ने किचन की खिड़की को सब्बल से खोल लिया था, लेकिन वह अंदर लगी एंगिल नहीं तोड़ पाए। क्राइम ब्रांच की टीम भी इस बारे में छानबीन करने आई थी।
किरन ही करती है दोनों घरों में काम
बरेली। मीनाक्षी ने पुलिस को बताया कि योगेश मिश्रा के घर घरेलू काम करने आने वाली किरन नाम की महिला ही उनके यहां भी काम करने आती है। उसे उनके घर के बारे में सब कुछ मालूम रहता है। उसे यह भी पता है कि उनके किचन में दरवाजा नहीं है। बृहस्पतिवार सुबह वह काम करने आई थी, देखने में लग रहा था कि वह डरी हुई है। सबसे अहम बात यह है कि किरन के बारे में मीनाक्षी को इतना ही मालूम है कि वह पीलीभीत बाईपास की तरफ से आती है। पुलिस किरन को भी शक की नजर से देख रही है।
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ट्रिपल मर्डर केस के खुलासे को एसएसपी ने तीन इंस्पेक्टर और सात दरोगाओं के अलावा कई और टीमें लगाई गई है। मुजफ्फर नगर में बाबरिया जाति के करीब 13 गांव हैं। वहां का झिनझिना इलाका इस जाति के अपराधियों का गढ़ कहा जाता है। वहां के लिए पुलिस टीम रवाना कर दी है। कटरी के अनुभवी इंस्पेक्टर विजय राणा शाहजहांपुर के कटरी इलाके में बाबारियों की तलाश में गढ़िया रंगीन गए हैं। बदायूं के दातागंज के कटरी इलाके के कई गांव में पुलिस टीम ने बाबारियों की तलाश में मुखबिरों का जाल बिछा दिया है। मुरादाबाद के भोजपुर के अलावा लखीमपुर, रामपुर आदि जिलों में भी बाबारियों की तलाश शुरू हो गई है। लेकिन अभी तक कोई नतीजा नहीं निकला है। एसपी क्राइम डा. एसपी सिंह ने बताया कि सभी बिंदुओं पर विवेचना की जा रही है। कई जिलों को टीमें भेजी गई है। लेकिन अभी कोई सुराग नहीं मिला है।
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जेल में बंद सरगना मोइन और फरमान से एसटीएफ करेगी पूछताछ
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। सुरेश शर्मा नगर के ट्रिपल मर्डर केस और लूटपाट के मामले का खुलासा करने से लिए एसटीएफ भी जुट गई है। एसटीएफ इस वारदात को बाबरियों के गैंग से जोड़कर देख रही है। कई साल से फरार चले रहे दस हजार के इनामी बदमाश जॉनी और महरूम की तलाश की जा रही है। एसटीएफ शुक्रवार को जेल में सजा काट रहे बाबरिया गैंग के सरगना मोइन और उसके साथी फरमान से पूछताछ करेगी।
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पुलिस सूत्रों के मुताबिक शासन से दस हजार इनाम घोषित होने के बाद दोनों बदमाश भेष बदलकर यूपी में रहते हैं और ठिकाने बदलकर आपराधिक वारदातों को अंजाम देते हैं। एसटीएफ उनके ठिकानों का पता लगवा रही है। भोजपुर और पचपेड़ा गांवों में मुखबिरों लगा दिया गया है। एसपी सिटी राजीव मल्होत्रा ने बताया कि लूट की वारदात करने से पहले बाबरिया गैंग रैकी कराने के लिए हर फंडा अपनाता है। उनके परिवार की महिलाएं घरों में कम पैसे पर काम करने को भी तैयार हो जाती हैं।
हथियार लेकर नहीं चलते बाबरिए
बाबरिया गैंग के बदमाश कभी हथियार लेकर नहीं चलते हैं। पहले वह घटना को अंजाम देने के लिए नल के हत्थे का इस्तेमाल करते थे, लेकिन अब नल बाहर लगे नहीं मिलते। कॉलोनी कल्चर में तो हत्थे वाले नल मिलना और मुश्किल है। ऐसे में बदमाशों ने नल के हत्थे की जगह रॉड का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। गैंग के बदमाश मोबाइल का इस्तेमाल भी नहीं करते हैं। सुरेश शर्मा नगर में हुए तिहरे हत्याकांड में भी बदमाशों की ओर से मोबाइल का इस्तेमाल नहीं करने की बात सामने आ रही है। नल के हत्थे के स्थान पर घटना में रॉड का इस्तेमाल किया गया है।
फोटो---------
योगेश, प्रिया और पुष्पा का अंतिम संस्कार किया
बरेली। सुरेशनगर कॉलोनी के मकान नंबर-25 ए के योगेश मिश्रा और उनकी पत्नी प्रिया मिश्रा और मां पुष्पादेवी के शव का संजयनगर श्मशान भूमि में अंतिम संस्कार कर दिया। उधर एसपी सिटी राजीव मल्होत्रा और क्राइम ब्रांच की टीम ने मौके पर पहुंचकर छानबीन की।
एसपी सिटी ने योगेश के छोटे भाई रविकांत मिश्रा से बात की। शाहजहांपुर जिले जलालाबाद कोतवाली के खेड़ा गांव के आए योगेश के चाचा सत्यदेव मिश्रा ने एसपी से कहा कि ऐसा लग रहा है कि बदमाश हत्या के इरादे से ही आए थे। उन्हें लूटपाट करनी होती तो तीनों को बंधक बनाकर भी की जा सकती थी। इस पर एसपी सिटी ने कहा कि पुलिस के लिए तो अभी तक यह केस ब्लाइंड है। इसलिए इसमें जिसके पास जो जानकारी है, वह पुलिस के शेयर कर ले। ताकि हत्यारों के पहुंचने में पुलिस को कुछ मद्द मिल जाए। एसपी सिटी के बाद क्राइम ब्रांच टीम भी मौके पर छानबीन करने के लिए पहुंची।
छोटे भाई से हुई थी योगेश की बात
-घटना की रात को नौ बजे योगेश की अपने छोटे भाई इन्कम टेक्स इंस्पेक्टर रविकांत मिश्रा से बात हुई थी। इसके बाद उनकी किसी से बात नहीं हुई। दो मोबाइल घटना के दिन ही पुलिस को मिल गए थे। तीसरा मोबाइल भी पुलिस को बृहस्पतिवार को मिल गया है।
इंस्पेक्टर को शादी के बारे में छानबीन करने को लगाया
-योगेश की पहली शादी का रिकार्ड खंगालने के लिए एक इंस्पेक्टर को लगाया गया है। वह शादी के दिन से कोर्ट तक के प्रकरण और रिश्ता टूटने की वजह सभी की जानकारी करेंगे। इसके अलावा इंस्पेक्टर को यह भी पता लगाना है कि परिवार वालों ने योगेश की शादी करने में जल्दबाजी की है या नहीं, जल्दबाजी की गई तो इसके पीछे वजह क्या थी। योगेश के पिता दातागंज(बदायूं) में ब्लाक में कर्मचारी थे। वहीं उनकी पहली पत्नी के पिता भी नौकरी करते थे। दोनों में बातचीत होने के बाद रिश्ता तय होकर शादी हो गई थी। कई साल तक योगेश की पहली पत्नी उसके साथ रहीं। इस बीची योगेश का ससुरवालों से कई बार विवाद भी हुआ था।
आई कॉन नाम से कंपनी चलाता था योगेश
-साफ्टवेयर इंजीनियर योगेश मिश्रा ने कई साल एक निजी इंस्टीट्यूट में नौकरी की, बाद में आमदनी बढ़ाने के लिए उन्होंने आई कॉन नाम से एक साफ्टवेयर कंसलटेंसी कंपनी बना ली। इसके जरिए वह करार करके छोटी कंपनियों को साफ्टवेयर बनाकर बेचते थे। घर से ही उनका यह काम चलता रहता था।
पल-पल की खबर ले रहे हैं अफसर
ट्रिपल मर्डर केस को चुनौती की तरह लेकर पुलिस हत्यारों की तलाश में लगी है। एसएसपी जे रविंदर गौड़ रोजाना रात को 11 बजे सारे दिन की प्रगति की समीक्षा कर रहे हैं। बृहस्पतिवार को उन्होंने सभी टीमों को बुलाकर खुलासे को हो रहे प्रयासों की जानकारी करके उन्हें टिप्स दिए। उधर आईजी और डीआईजी भी इस मामले में पल-पल की जानकारी कर रहे हैं।
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बैंक मैनेजर के घर को भी बनाया था निशाना
क्रासर
-घटना की रात मैनेजर के किचन की खिड़की तोड़ने की कोशिश की गई थी
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। सुरेश शर्मा नगर में सॉफ्टवेयर इंजीनियर योगेश मिश्रा, उनकी पत्नी प्रिया मिश्रा और मां पुष्पा देवी का बेरहमी के कत्ल कर लूटपाट करने वालों ने पहले इसी कालोनी में बैंक मैनेजर के घर को निशाना बनाया था। उन्होंने बैंक मैनेजर की लॉबी में पहुंचकर किचन की खिड़की खोली और उसकी एंगिल निकालने की कोशिश की थी। मैनेजर के बेटे के जागने की आहट से बदमाश भाग गए।
योगेश मिश्रा के घर हुई सनसनीखेज वारदात की सूचना मिलने के बाद देखा गया कि उनके घर बाहर लगी वैल के नीचे डी लिखा है। बाद में कॉलोनी में कई घरों को देखने के बाद एक घर ऐसा मिल गया कि जिसके बाहर ए लिखा है। घटना के दिन पुलिस ने भी इस बात को गंभीरता से नहीं लिखा। मजाक में कह दिया गया कि यह समाचार पत्रों के हॉकरों ने अपनी पहचान के लिए किया होगा। लेकिन सवाल यह उठा कि ऐसा है तो सिर्फ दो ही मकानों पर पहचान क्यों की गई। सर्वे करने वाले तो सभी मकान पर रीडर की पहचान बनाते।
ए और डी के बीच का राज जानने के लिए हमारी टीम बृहस्पतिवार दोपहर करीब एक बजे ए लिखे मकान पर पहुंची। वैल बजाने पर अंदर से कौन है कि आवाज आई फिर बाद सन्नाटा हो गया। फिर से वैल बजाने पर महिला ने पूछा-किससे मिलना है। महिला ने अपना नाम मीनाक्षी बताते हुए कहा कि उनके पति शरद भूमि विकास बैंक की फरीदपुर में ब्रांच मैनेजर हैं। मंगलवार रात को पहले बदमाशों ने उनके घर को निशाना बनाने की कोशिश की थी। रात करीब एक बजे उनका बेटा पानी पीने के उठा था, उसने घर में लाइट जलाई तो शायद वह लोग भाग गए। उनके किचन की खिड़की भी लॉबी की तरफ को है। किचन में दरवाजा नहीं है। बदमाशों ने किचन की खिड़की को सब्बल से खोल लिया था, लेकिन वह अंदर लगी एंगिल नहीं तोड़ पाए। क्राइम ब्रांच की टीम भी इस बारे में छानबीन करने आई थी।
किरन ही करती है दोनों घरों में काम
बरेली। मीनाक्षी ने पुलिस को बताया कि योगेश मिश्रा के घर घरेलू काम करने आने वाली किरन नाम की महिला ही उनके यहां भी काम करने आती है। उसे उनके घर के बारे में सब कुछ मालूम रहता है। उसे यह भी पता है कि उनके किचन में दरवाजा नहीं है। बृहस्पतिवार सुबह वह काम करने आई थी, देखने में लग रहा था कि वह डरी हुई है। सबसे अहम बात यह है कि किरन के बारे में मीनाक्षी को इतना ही मालूम है कि वह पीलीभीत बाईपास की तरफ से आती है। पुलिस किरन को भी शक की नजर से देख रही है।
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