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...तो शहर को फिर नरक बनाने की तैयारी है
Bareilly
Updated Tue, 22 Apr 2014 05:33 AM IST
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बरेली। कुछ महीनों बाद बरसात शुरू हो जाएगी। नाले-नालियों की सफाई का नगर निगम दावा भी करेगा लेकिन सड़कों पर अवैध रूप से चल रहीं डेयरियों को हटाने की फिक्र किसी को नहीं है। शहर में चार सौ से ज्यादा डेयरियों में पलने वाले करीब 10 हजार गाय-भैंसों का गोबर नाले नालियां और सीवर को चोक कर रहा है। रामपुर गार्डन जैसे पाश इलाके में भैंसें सड़क पर बंधने से राहगीरों का निकलना दुश्वार है। हैरत की बात यह है कि नगर निगम डेयरियों का ठीक तरह से सर्वे तक नहीं कर पाया है।
शहर में चल रहीं 403 से ज्यादा डेयरियां दशकों से मुसीबत का सबब बनी हुई हैं। पुराना शहर, बानखाना, कालीबाड़ी, सुभाषनगर और मॉडल टाउन आदि इलाकों में घनी आबादी के बीच गाय-भैंसें सड़क पर बंधती हैं। रामपुर गार्डन, डीडीपुरम जैसे पाश इलाके भी डेयरियों की गंदगी से अछूते नहीं हैं। डेयरियों में पलने वाली गाय-भैंसों का गोबर कहीं नाले-नालियों तो कहीं सीवर में जमा होता है। इससे न केवल 40 साल पुरानी सीवर लाइनें क्षतिग्रस्त हो रही हैं, बल्कि नाले-नालियां भी जाम हैं।
सड़कों पर चल रही 109 डेयरियां
नगर निगम के सफाई निरीक्षक ठीक से डेयरियों का सर्वे नहीं कर पाए हैं। नगर निगम के रिकार्ड में सड़क पर चलने वाली 109 डेयरियां चिह्नित की गईं, जो वास्तविक आंकड़ों से कहीं कम हैं। सड़क पर चलने वाली डेयरियों का गोबर सीवर और नालियों में पहुंचाया जाता है।
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कहां कितनी डेयरियां (आंकड़े लगभग में)
बानखाना, गुलाबनगर और चौधरी तालाब : 130
संजय नगर, डीडीपुरम, पीलीभीत बाईपास : 100
चौपला, कालीबाड़ी, बाकरगंज, रामपुर गार्डन : 70
सीबीगंज, स्वालेनगर, सुभाषनगर, पुराना शहर, नई बस्ती, प्रेमनगर, मॉडल टाउन : 100
डेयरियों से नुकसान
1- सड़कों पर जाम की समस्या
2-गोबर जमा होने से संक्रामक बीमारियों की आशंका
3-गोबर से सीवर और नाले चोक होना
4- आए दिन बढ़ती सड़क दुघर्टनाएं
कोट
डेयरियां शहर से बाहर बसाने की मांग लंबे समय से करते आ रहे हैं। नगर निगम ने जमीन देने में रुचि नहीं ली और बीडीए ने भी कोई काम नहीं किया। दोनों एक दूसरे पर दोषारोपण कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं।
- लल्लू सिंह यादव, अध्यक्ष दुग्ध संघ
नगर निगम ने परसाखेड़ा और नदौसी में जमीन देने का प्रस्ताव बोर्ड से पास कर बीडीए को भेजा था। इसमें गोकुल नगरी बसाने का काम होना था। बीडीए को कई बार पत्र भी लिखा मगर बीडीए ने इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की। 90 डेयरियां तो निगम की जमीन या सड़क पर अवैध रूप से चल रही हैं। निगम के अफसर कई बार कहने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।
-डॉ. आईएस तोमर
फाइलों में ही दफन हो गई गोकुल नगरी की योजना
एक दशक पूर्व डेयरियों को शहर से बाहर शिफ्ट करने के लिए नदौसी में गोकुल नगरी बसाने की योजना बनी। यहां इसके लिए 66 बीघे जमीन भी चिह्नित की गई। गोकुल नगरी बसाने के लिए नगर निगम ने परसाखेड़ा में भी जमीन देने का प्रस्ताव रखा। बीडीए को इस दिशा में काम आगे बढ़ाना था। फिलहाल गोकुल नगरी बसाने की योजना फाइलों में ही दफन हो गई।
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शहर में चल रहीं 403 से ज्यादा डेयरियां दशकों से मुसीबत का सबब बनी हुई हैं। पुराना शहर, बानखाना, कालीबाड़ी, सुभाषनगर और मॉडल टाउन आदि इलाकों में घनी आबादी के बीच गाय-भैंसें सड़क पर बंधती हैं। रामपुर गार्डन, डीडीपुरम जैसे पाश इलाके भी डेयरियों की गंदगी से अछूते नहीं हैं। डेयरियों में पलने वाली गाय-भैंसों का गोबर कहीं नाले-नालियों तो कहीं सीवर में जमा होता है। इससे न केवल 40 साल पुरानी सीवर लाइनें क्षतिग्रस्त हो रही हैं, बल्कि नाले-नालियां भी जाम हैं।
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सड़कों पर चल रही 109 डेयरियां
नगर निगम के सफाई निरीक्षक ठीक से डेयरियों का सर्वे नहीं कर पाए हैं। नगर निगम के रिकार्ड में सड़क पर चलने वाली 109 डेयरियां चिह्नित की गईं, जो वास्तविक आंकड़ों से कहीं कम हैं। सड़क पर चलने वाली डेयरियों का गोबर सीवर और नालियों में पहुंचाया जाता है।
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कहां कितनी डेयरियां (आंकड़े लगभग में)
बानखाना, गुलाबनगर और चौधरी तालाब : 130
संजय नगर, डीडीपुरम, पीलीभीत बाईपास : 100
चौपला, कालीबाड़ी, बाकरगंज, रामपुर गार्डन : 70
सीबीगंज, स्वालेनगर, सुभाषनगर, पुराना शहर, नई बस्ती, प्रेमनगर, मॉडल टाउन : 100
डेयरियों से नुकसान
1- सड़कों पर जाम की समस्या
2-गोबर जमा होने से संक्रामक बीमारियों की आशंका
3-गोबर से सीवर और नाले चोक होना
4- आए दिन बढ़ती सड़क दुघर्टनाएं
कोट
डेयरियां शहर से बाहर बसाने की मांग लंबे समय से करते आ रहे हैं। नगर निगम ने जमीन देने में रुचि नहीं ली और बीडीए ने भी कोई काम नहीं किया। दोनों एक दूसरे पर दोषारोपण कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं।
- लल्लू सिंह यादव, अध्यक्ष दुग्ध संघ
नगर निगम ने परसाखेड़ा और नदौसी में जमीन देने का प्रस्ताव बोर्ड से पास कर बीडीए को भेजा था। इसमें गोकुल नगरी बसाने का काम होना था। बीडीए को कई बार पत्र भी लिखा मगर बीडीए ने इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की। 90 डेयरियां तो निगम की जमीन या सड़क पर अवैध रूप से चल रही हैं। निगम के अफसर कई बार कहने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।
-डॉ. आईएस तोमर
फाइलों में ही दफन हो गई गोकुल नगरी की योजना
एक दशक पूर्व डेयरियों को शहर से बाहर शिफ्ट करने के लिए नदौसी में गोकुल नगरी बसाने की योजना बनी। यहां इसके लिए 66 बीघे जमीन भी चिह्नित की गई। गोकुल नगरी बसाने के लिए नगर निगम ने परसाखेड़ा में भी जमीन देने का प्रस्ताव रखा। बीडीए को इस दिशा में काम आगे बढ़ाना था। फिलहाल गोकुल नगरी बसाने की योजना फाइलों में ही दफन हो गई।