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सब्र से काम लें मुसलमान: सुब्हानी मियां
Bareilly
Updated Sun, 12 Jan 2014 05:53 AM IST
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बरेली। दरगाह-ए-आला हजरत से सज्जादानशीन मौलाना सुब्हान रजा खां सुब्हानी मियां ने कहा कि मुसलमान सब्र से काम लें। हमें अपने मुल्क के कानून और प्रशासन पर पूरा भरोसा और विश्वास है। हम सही तरीके से पैरवी करेेंगे तो इंसाफ जरूर मिलेगा।
हिंदुस्तान के मुसलमान इस पोजीशन में नहीं हैं कि वह ऐसे जज्बात का इजहार करें जिसकी वजह से फिरकापरस्त ताकतों और मौका परस्त सियासी लीडरों को मुस्लिम मुखालिफ फसाद कराने का मौका मिले। प्यारे नबी की यौमे पैदाइश (ईद-मिलाद-नबी) 14 जनवरी को मनाया जाएगा। इसलिए हर मुसलमान को यह कोशिश करनी है कि हमारा यह त्यौहार अमन और शांति से मुकम्मल हो जाए। सुब्हानी मियां ने अपील की कि अगर किसी जगह मजहबी मकाम मस्जिद, मदरसा, कब्रस्तान, या जलसा जुलूस को लेकर कोई विवाद होता है तो उसमें सियासी लीडरों की दखल अंदाजी को रोककर सब्र और सुकून के साथ कानूनी चाराजोई करें। जज्बात में आने की जरूरत नहीं है। इससे न कभी पहले कुछ हाथ आया और न आगे हाथ आएगा। शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है कि वह मुसलमानों को उनकी मजहबी आजादी दिलाए। मुल्क के दुश्मन और फिरकापरस्त ताकतों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। ताकि आवास और मुसलमानों का शासन-प्रशासन पर विश्वास बना रहे। इस तरह के मसले शासन प्रशासन की जानकारी में आते हैं तो उसका हल तलाश करें। समाजी रहनुमाओं को एक साथ बैठाकर इस तरह से मसलों को हल किया जा सकता है। ताकि किसी मुल्क को फिर से फसाद न झेलना पड़े। आमीन।
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हिंदुस्तान के मुसलमान इस पोजीशन में नहीं हैं कि वह ऐसे जज्बात का इजहार करें जिसकी वजह से फिरकापरस्त ताकतों और मौका परस्त सियासी लीडरों को मुस्लिम मुखालिफ फसाद कराने का मौका मिले। प्यारे नबी की यौमे पैदाइश (ईद-मिलाद-नबी) 14 जनवरी को मनाया जाएगा। इसलिए हर मुसलमान को यह कोशिश करनी है कि हमारा यह त्यौहार अमन और शांति से मुकम्मल हो जाए। सुब्हानी मियां ने अपील की कि अगर किसी जगह मजहबी मकाम मस्जिद, मदरसा, कब्रस्तान, या जलसा जुलूस को लेकर कोई विवाद होता है तो उसमें सियासी लीडरों की दखल अंदाजी को रोककर सब्र और सुकून के साथ कानूनी चाराजोई करें। जज्बात में आने की जरूरत नहीं है। इससे न कभी पहले कुछ हाथ आया और न आगे हाथ आएगा। शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है कि वह मुसलमानों को उनकी मजहबी आजादी दिलाए। मुल्क के दुश्मन और फिरकापरस्त ताकतों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। ताकि आवास और मुसलमानों का शासन-प्रशासन पर विश्वास बना रहे। इस तरह के मसले शासन प्रशासन की जानकारी में आते हैं तो उसका हल तलाश करें। समाजी रहनुमाओं को एक साथ बैठाकर इस तरह से मसलों को हल किया जा सकता है। ताकि किसी मुल्क को फिर से फसाद न झेलना पड़े। आमीन।
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