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फर्जी फार्म मामले में एफआईआर दर्ज
Bareilly
Updated Fri, 13 Dec 2013 05:49 AM IST
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बरेली। रूहेलखंड विश्वविद्यालय में जमा किए गए पांच हजार से ज्यादा फर्जी इम्प्रूवमेंट फार्मों के मामले में विश्वविद्यालय की ओर से बृहस्पतिवार को एफआईआर दर्ज करा दी गई। बारादरी थाना के रूहेलखंड चौकी के इंचार्ज राजाराम यादव ने बताया कि फिलहाल अज्ञात लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा लिखा गया है। अब जांच करके पता लगाया जाएगा कि फर्जी फार्म कहां से आए।
बता दें कि रूहेलखंड विश्वविद्यालय में तकरीबन पांच हजार इम्प्रूवमेंट फार्म जमा होेने का मुद्दा लंबे समय से गरमाया हुआ है। फार्म जमा होने के बाद रिजल्ट बनाते समय जब फार्म की जांच हुई तो होलोग्राम और सीरियल नंबर अलग-अलग मिले। इससे फार्मों के फर्जी होने का खुलासा हुआ। इसके बाद इसकी प्रिंटिंग आदि की भी जांच कराई गई है। प्रारंभिक जांच में फार्म फर्जी होने की पुष्टि के बाद रजिस्ट्रार ने बारादरी थाने में रिपोर्ट दर्ज करा दी है। फिलहाल बताया जा रहा है कि ये फार्म मुरादाबाद से ही आए हैं। लेकिन इस मामले के तार रूहेलखंड विश्वविद्यालय से भी जुड़े बताए जा रहे हैं। अब पुलिस इस मामले की जांच करेगी और पता लगाएगी कि इसके पीछे किन लोगों का हाथ है।
रजिस्ट्रार डॉ. केएन पांडेय ने बताया कि लगभग पांच हजार फार्म फर्जी मिले थे। विश्वविद्यालय स्तर पर मामले की जांच कराई जा चुकी है। अब मामला पुलिस को सौंपा दिया गया है। अब जो कुछ करेगी पुलिस करेगी, विश्वविद्यालय अपनी जांच में इन फार्मों को फर्जी मान चुका है।
बता दें कि रूहेलखंड विश्वविद्यालय में तकरीबन पांच हजार इम्प्रूवमेंट फार्म जमा होेने का मुद्दा लंबे समय से गरमाया हुआ है। फार्म जमा होने के बाद रिजल्ट बनाते समय जब फार्म की जांच हुई तो होलोग्राम और सीरियल नंबर अलग-अलग मिले। इससे फार्मों के फर्जी होने का खुलासा हुआ। इसके बाद इसकी प्रिंटिंग आदि की भी जांच कराई गई है। प्रारंभिक जांच में फार्म फर्जी होने की पुष्टि के बाद रजिस्ट्रार ने बारादरी थाने में रिपोर्ट दर्ज करा दी है। फिलहाल बताया जा रहा है कि ये फार्म मुरादाबाद से ही आए हैं। लेकिन इस मामले के तार रूहेलखंड विश्वविद्यालय से भी जुड़े बताए जा रहे हैं। अब पुलिस इस मामले की जांच करेगी और पता लगाएगी कि इसके पीछे किन लोगों का हाथ है।
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रजिस्ट्रार डॉ. केएन पांडेय ने बताया कि लगभग पांच हजार फार्म फर्जी मिले थे। विश्वविद्यालय स्तर पर मामले की जांच कराई जा चुकी है। अब मामला पुलिस को सौंपा दिया गया है। अब जो कुछ करेगी पुलिस करेगी, विश्वविद्यालय अपनी जांच में इन फार्मों को फर्जी मान चुका है।
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