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फेसबुक के बाद फेस-टू-फेस मुलाकात
Bareilly
Updated Mon, 12 Nov 2012 12:00 PM IST
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देश-विदेश से बरेली आकर 22 साल बाद मिले केवी एएसएल के बिछड़े दोस्त
शहर के एक होटल में जमी महफिल
बरेली। तू कितना बदल गया यार...। अबे तूने दाढ़ी क्यों रख ली, थोड़ा पेट तो अंदर कर मोटू। बाईस सालों बाद स्कूल के समय के दोस्तों की मुलाकात रविवार को कुछ इसी अंदाज में हुई। जिस उम्र की दोस्ती उनकी यादों में थी, तकरीबन उतनी ही उम्र के बच्चे उनके साथ थे। बचपन में साथ गुजरे सुख-दुख के पलों की यादें ताजा हुईं तो कई बार आंखों से आंसू छलक आए। केवी एएसएल में पढ़ने वाले दोस्तों का री-यूनियन गेट-टू-गेदर था यह।
रविवार को शहर के एक होटल में लंबे समय बाद ये दोस्त मिले तो संकोच की एक दीवार बीच में जरूर थी। बचपन में देखे चेहरे और कद-काठी बदल चुकी थी। किसी का पेट निकल आया था तो किसी के भोले-भाले चेहरे पर ढाढ़ी थी। मगर संकोच की यह दीवार दोस्ती के अपनेपन में ढहने में ज्यादा देर नहीं लगी। फिर क्या था, वही पुराना अंदाज लौट आया। परिवार के लोगों का इस मुलाकात में शामिल होना इसे और खास बना गया।
इन दोस्तों को दरअसल मिलाया फेसबुक ने। पुराने दोस्तों को फेसबुक पर खोजने के लिए केवी एसी का प्रोफाइल शहर के दो दोस्त सतनाम सिंह रंधावा और पुनीत सक्सेना ने बनाया। इसके बाद दोस्तों की तलाश शुरू हुई जो कामयाब भी रही। एक-एक कर कई दोस्त फेसबुक पर जुड़े। 22 साल बाद त्योहार से पहले ये लोग एक-दूसरे से मिलने देश-विदेश से बरेली पहुंचे। इन दोस्तों में यूएसए में शिकागो एयरलाइंस के ऑपरेशन मैनेजर संजय सावंत, दुबई में एक होटल में उच्च पद पर कार्यरत रश्मि, दिल्ली में बैटरी कारोबारी बलजिंदर सिंह, आगरा में इलेक्ट्रिक कंपनी में ब्रांच हेड कपिल सोनी पूरे परिवार के साथ आए थे। देहरादून में शिक्षक रितु हुड्डा तोमर पति के साथ दोस्तों से मिलने बरेली पहुंची।
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ये सभी दोस्त अपने स्कूल भी गए जहां अपने गुरुजनों से मुलाकात की। जो शिक्षक रिटायर हो चुके थे उनसे फोन से संपर्क किया। सभी ने अब कभी नहीं बिछड़ने और एक-दूसरे के संपर्क में रहने का वायदा किया। हर साल दिवाली के मौके पर ही गेट टू गेदर करने का फैसला भी हुआ। सभी ने फेसबुक का भी शुक्रिया भी अदा किया।
शहर के एक होटल में जमी महफिल
बरेली। तू कितना बदल गया यार...। अबे तूने दाढ़ी क्यों रख ली, थोड़ा पेट तो अंदर कर मोटू। बाईस सालों बाद स्कूल के समय के दोस्तों की मुलाकात रविवार को कुछ इसी अंदाज में हुई। जिस उम्र की दोस्ती उनकी यादों में थी, तकरीबन उतनी ही उम्र के बच्चे उनके साथ थे। बचपन में साथ गुजरे सुख-दुख के पलों की यादें ताजा हुईं तो कई बार आंखों से आंसू छलक आए। केवी एएसएल में पढ़ने वाले दोस्तों का री-यूनियन गेट-टू-गेदर था यह।
रविवार को शहर के एक होटल में लंबे समय बाद ये दोस्त मिले तो संकोच की एक दीवार बीच में जरूर थी। बचपन में देखे चेहरे और कद-काठी बदल चुकी थी। किसी का पेट निकल आया था तो किसी के भोले-भाले चेहरे पर ढाढ़ी थी। मगर संकोच की यह दीवार दोस्ती के अपनेपन में ढहने में ज्यादा देर नहीं लगी। फिर क्या था, वही पुराना अंदाज लौट आया। परिवार के लोगों का इस मुलाकात में शामिल होना इसे और खास बना गया।
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इन दोस्तों को दरअसल मिलाया फेसबुक ने। पुराने दोस्तों को फेसबुक पर खोजने के लिए केवी एसी का प्रोफाइल शहर के दो दोस्त सतनाम सिंह रंधावा और पुनीत सक्सेना ने बनाया। इसके बाद दोस्तों की तलाश शुरू हुई जो कामयाब भी रही। एक-एक कर कई दोस्त फेसबुक पर जुड़े। 22 साल बाद त्योहार से पहले ये लोग एक-दूसरे से मिलने देश-विदेश से बरेली पहुंचे। इन दोस्तों में यूएसए में शिकागो एयरलाइंस के ऑपरेशन मैनेजर संजय सावंत, दुबई में एक होटल में उच्च पद पर कार्यरत रश्मि, दिल्ली में बैटरी कारोबारी बलजिंदर सिंह, आगरा में इलेक्ट्रिक कंपनी में ब्रांच हेड कपिल सोनी पूरे परिवार के साथ आए थे। देहरादून में शिक्षक रितु हुड्डा तोमर पति के साथ दोस्तों से मिलने बरेली पहुंची।
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ये सभी दोस्त अपने स्कूल भी गए जहां अपने गुरुजनों से मुलाकात की। जो शिक्षक रिटायर हो चुके थे उनसे फोन से संपर्क किया। सभी ने अब कभी नहीं बिछड़ने और एक-दूसरे के संपर्क में रहने का वायदा किया। हर साल दिवाली के मौके पर ही गेट टू गेदर करने का फैसला भी हुआ। सभी ने फेसबुक का भी शुक्रिया भी अदा किया।