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हवा में उड़ाया जा रहा एसपी ट्रैफिक का आदेश
Bareilly
Updated Mon, 29 Oct 2012 12:00 PM IST
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कुछ साल पहले थानों में शुरू हुआ एक चलन काफी चर्चा में रहा था लाल या नीली कलम से रपट लिखने का। लाल कलम का दबा-ढका मतलब होता था पुख्ता धाराएं और तुरंत कार्रवाई और नीली कलम का मतलब इसके ठीक उलट। इधर काफी समय से थानों में तो ऐसा कोई वाकया पेश नहीं आया, लेकिन शायद यह चलन अब पुलिस महकमे के अफसरों के आदेशों में शुरू हो गया है। अफसरों का काम होता है आदेश जारी करना सो वे अपना काम करते हैं, लेकिन उनके मातहत बेहतर जानते हैं कि उनके किस आदेश पर अमल करना है और किस पर नहीं। एसपी ट्रैफिक दफ्तर से कुछ दिनों पहले जारी चौराहों के 50 मीटर के दायरे में खड़े वाहनों का चालान करने का आदेश शायद ‘नीली कलम’ से लिखा गया था जो इस पर ट्रैफिक महकमे के सिपाहियों ने अमल करने की जरूरत नहीं समझी। रविवार को हमने से शहर का जायजा लिया तो उन चौराहों पर भी एसपी के इस आदेश की धज्जियां उड़ते देखीं जहां ट्रैफिक पुलिस तैनात थी और उन पर जहां सिविल पुलिस थी।
चौराहे पर जाम, बेखबर पुलिस वाले
समय दोपहर करीब एक बजे का था, जब हम शहामतगंज चौराहे पर पहुंचे। गांधी उद्यान, चौपुला और सेटेलाइट जाने वाली सड़कों पर चौराहे से बमुश्किल दो-चार मीटर की दूरी पर ही तमाम टेंपो खड़े हुए थे और सवारियां उतार और चढ़ा रहे थे। पंद्रह मिनट तक यहां मौजूदगी के दौरान हमने देखा कि टेंपो वालों के आड़ा-तिरछा खड़े होने की वजह से कई बार सड़कों पर यातायात बाधित हुआ, लेकिन वहां ड्यूटी पर तैनात ट्रैफिक के सिपाही और दो-तीन होमगार्ड तमाशाई बने सिर्फ देखते रहे।
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इन टेंपो के लिए कहीं कोई जगह है क्या
हम ये टेंपो यहां से हटा तो दें, लेकिन आप ही बताओ कि इन टेंपो को कहां खड़ा कराया जाए। आसपास कोई और जगह है क्या। अब चौराहे से ज्यादा दूर खड़ा करा देंगे तो सवारियां वहां तक कैसे जाएंगी। सवारियां वैसे भी इतनी ज्यादा हैं कि देहात के टेंपो भी शहर में चल रहे हैं। -एसपी ट्रैफिक के आदेश के बारे में बात करने पर शहामतगंज चौराहे पर खड़ा ट्रैफिक का सिपाही
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साहब भी तमाशाई, सिपाही भी
दोपहर डेढ़ बजे हम चौपुला चौराहे पर पहुंचे तो वहां एसपी ट्रैफिक के पेशकार को भी ट्रैफिक पुलिस की टीम के साथ खड़े पाया। चौराहे पर एक किनारे पर एक टीएसआई अपनी बाइक के सहारे खड़े थे। ट्रैफिक के सिपाही चौराहे पर नजर तो आ रहे थे, लेकिन यहां भी तमाम टेंपो चौराहे के बिल्कुल नजदीक अड्डा जमाए हुए थे। कुछ ही दूरी पर डग्गामार जीपें भी खड़ी हुई थीं। एसपी ट्रैफिक के आदेश का असर जरा भी नहीं दिखाई दिया। यहां भी हम काफी देर खड़े रहे, लेकिन नजारा नहीं बदला।
एसपी का आदेश...मुझे पता नहीं
क्या करें ये टेंपो वाले तो मानते ही नहीं हैं। कुछ ही देर पहले इन्हें यहां से भगाया था, अब फिर आकर खड़े हो गए। अब कितनी बार भगाएं। अब इन्हें कहां खड़े होने देना है और कहां नहीं, यह मुझे नहीं पता। मुझे तो ट्रैफिक पुलिस में तैनात हुए बस एक-डेढ़ महीना ही हुआ है। -एसपी ट्रैफिक के आदेश के बारे में बात करने पर चौपुला चौराहे पर खड़ा ट्रैफिक का सिपाही
यहां ट्रैफिक पुलिस नहीं लगती
समय करीब दो बजे का रहा होगा, जब हम अयूब खां चौराहे पर पहुंचे। इस चौराहे पर ट्रैफिक पुलिस का एक भी जवान ड्यूटी पर तैनात नजर नहीं आया। सिविल लाइंस पुलिस चौकी के कुछ सिपाही जरूर चौराहे के एक तरफ एक चबूतरे पर कुर्सी डालकर बैठे हुए थे। यहां भी नजारा शहामतगंज और चौपुला चौराहे जैसा ही था। टेंपो और दूसरे वाहनों की भीड़ चौराहे के इर्द-गिर्द इकट्ठी थी। त्योराहों के कारण अच्छी-खासी भीड़भाड़ के बावजूद चौराहे से हनुमान मंदिर तक सड़क के दोनों ओर तमाम गाड़ियां पार्क थीं।
यह हमारी ड्यूटी नहीं
चौराहों के पास गाड़ियों को नहीं खड़े होने देना है, यह आदेश ट्रैफिक पुलिस के लिए है। लेकिन इस चौराहे पर तो ट्रैफिक वालों की ड्यूटी ही नहीं लगाई जाती। हम अपनी ड्यूटी करें या टेंपो वालों को देखें। -एसपी ट्रैफिक के आदेश के बारे में बात करने पर अयूब खां चौराहे पर खड़ा सिविल पुलिस का सिपाही
सेटेलाइट चौराहा: सबसे बुरा हाल
शाम को साढ़े चार बजे के करीब सेटेलाइट चौराहे पर टेंपो, टाटा मैजिक और डग्गामार जीपों का जबर्दस्त जमावड़ा लगा हुआ था। इस चौराहे पर ट्रैफिक पुलिस के जवान भी तैनात थे और जगतपुर पुलिस चौकी के सिपाही भी, लेकिन सड़क पर फंस-फंसकर ड्यूटी पर थे, लेकिन किसी को कोई मतलब नहीं था। यह वही चौराहा है जहां शहर में दंगा होने के बाद पिछले दिनों पुलिस वाले ट्रकों से अवैध वसूली के चक्कर में कई रातों तक लगातार जाम लगाते रहे थे। ऐसे में यहां का यह हाल स्वाभाविक ही लगा।
नेताओं की सिफारिश का क्या करें
डग्गामार जीप वाले हों या टेंपो वाले, बिना कार्रवाई के कोई नहीं सुधरता। इन लोगों का चालान भी किया जाए तो कोई नतीजा नहीं निकलता। फौरन किसी न किसी की सिफारिश आ जाती है। लोग खुद ही नहीं सुधरना चाहते तो पुलिस क्या करे। -एसपी ट्रैफिक के आदेश के बारे में बात करने पर सेटेलाइट चौराहे पर खड़ा सिविल पुलिस का सिपाही
ट्रैफिक इंस्पेक्टर बाहर गए हैं। एक टीएसआई के पैर में फ्रैक्चर हो गया है। ऊपर से आजकल रोजाना तमाम जुलूस निकल रहे हैं, जिसमें ड्यूटी लगानी पड़ती है। फिर भी नियमों का पालन सख्ती से कराया जाएगा। लापरवाह सिपाहियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। -डीपी श्रीवास्तव, एसपी ट्रैफिक