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कन्हैया के लिए चुनावी चंदे पर जुटी ट्रेड यूनियनों में रार
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बरेली। देश भर में सिमटते वामपंथ को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ सियासत का एक मजबूत कोण बेगूसराय में भी बनने की उम्मीद है जहां जेएनयू प्रकरण के मुख्य किरदार रहे कन्हैया कुमार सीपीआई यानी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के टिकट पर लोकसभा चुनाव में उतरे हैं। सोमवार को बेगूसराय सीट पर मतदान हो चुका है, लेकिन इसी बीच कुछ कर्मचारी और श्रमिक संगठनों के बीच शुरू हुए विवाद से कन्हैया कुमार के चुनाव के लिए देश भर में चंदा इकट्ठा जुटाए जाने की बात उजागर हुई है। करोड़ों रुपये का चंदा इकट्ठा किए जाने की बात कहते हुए उसका इस मुद्दे पर विरोध किया जा रहा है कि संगठनों के जब विभिन्न विचारधाराओं के लोग सदस्य हैं तो उन पर सीपीआई उम्मीदवार के चुनाव के लिए चंदा देने का दबाव क्यों बनाया जा रहा है।
कन्हैया कुमार के लिए चुनावी फंड इकट्ठा किए जाने की अपील आल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस की महासचिव अमरजीत कौर की ओर से करीब महीना भर पहले जारी की गई थी। सभी कर्मचारी और श्रमिक संगठनों को जारी इस संदेश में कन्हैया कुमार को यूथ आइकन बताते हुए उनके कनॉट सर्कस नई दिल्ली की यूनियन बैंक शाखा के बचत खाता संख्या 0277010003395 में चेक या एआईटीयूसी के माध्यम से ज्यादा से ज्यादा पैसा जमा करने को कहा गया था। अपील में कहा गया था कि श्रमिक संगठनों के लोग ज्यादा से ज्यादा चंदा दें ताकि भाजपा के जहरीले अभियान को रोका जा सके। अगर कोई सक्षम है तो ज्यादा रकम भी दे सकता है। संगठनों के कुछ सदस्यों का दावा है कि इस अपील के बाद पहले ही सप्ताह में इस खाते में 70 लाख रुपये से ज्यादा रकम पहुंच गई। कहा जा रहा है कि महीना पूरा होते-होते अब चंदे की रकम करोड़ों में पहुंच गई है। हालांकि चंदा मांगने वालों ने अब तक यह नहीं बताया है कि कुल कितना चंदा इकट्ठा हो चुका है। बता दें कि बेगूसराय से कन्हैया के खिलाफ भाजपा ने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह और राजद ने तनवीर अहमद को उतारा है।
ट्रेड यूनियनों पर वामपंथ का वर्चस्व
देश भर में करीब डेढ़ करोड़ कर्मचारी आयकर देते हैं। ज्यादातर संगठनों का नेतृत्व वामपंथी नेताओं के हाथ में है। बीएमएस और इंटक इनमें प्रमुख संगठन हैं। केंद्र सरकार के विभागों के साथ बैंक, बीमा, कारखानों की यूनियन पर वामपंथ ही हावी है। संगठनों के लोगों का कहना है कि ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस के नेताओं ने कन्हैया कुमार के लिए सीधे बैंक खाते में तो चंदा जमा कराया ही है, इसके साथ जिला स्तरीय संगठन प्रमुखों के माध्यम से भी अच्छा-खासा पैसा इकट्ठा किया गया है। चंदा इकट्ठा करने का काम बेगुसराय में चुनाव होने के बाद भी चल रहा है।
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प्रचार में भी झोंकी पूरी ताकत
प्रमुख रूप से भाजपा के विरुद्ध वामपंथी मुहिम का अब कन्हैया कुमार प्रमुख चेहरा बन चुके हैं। चंदा इकट्ठा करने के साथ उनके चुनाव प्रचार में भी पूरी ताकत झोंकी गई है। शबाना आजमी और जावेद अख्तर जैसी बॉलीवुड की हस्तियों के साथ योगेंद्र यादव, जम्मू-कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट की शहला रसीद, स्वरा भास्कर, जेएनयू प्रकरण में उनके सहयोगी उमर खालिद, अनिर्वान भट्टाचार्य, जेएनयू के लापता छात्र बदायूं (यूपी) के नजीब की मां फातिमा, गुजरात के विधायक जिग्नेश मेवाणी, तीस्ता सीतलवाड़ जैसे लोगों ने बेगूसराय में उनके लिए प्रचार किया है।
शुरू हुआ विवाद.. क्यों दें इतना चंदा
अब चंदे पर बरेली के साथ कई जिलों की इकाइयों में विवाद शुरू हो गया है। कर्मचारी और श्रमिक संगठनों का एक गुट का कहना है कि संगठनों पर जबरन वामपंथी विचारधारा थोपने की कोशिश हो रही है। सोशल मीडिया पर भी कर्मचारी और श्रमिक संगठनों से कन्हैया कुमार के लिए चंदा इकट्ठा किए जाने का विरोध किया जा रहा है। पूछा जा रहा है कि कन्हैया ने आखिर ट्रेड यूनियंस में क्या योगदान किया है। कन्हैया को देशद्रोह का आरोपी भी बताया जा रहा है।
वर्जन: फोटो
पिछले महीने ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस ने कन्हैया के लिए चंदा इकट्ठा करने की अपील जारी की थी। तमाम कर्मचारी ऐसी अपील किए जाने से नाराज हैं। कन्हैया देशद्रोह जैसे गंभीर आरोपों में फंसा है। वह खुद यह भी कह चुका है कि वह कम्युनिस्ट नहीं है तो देश भर में सीपीआई से जुड़े संगठनों में करोड़ों रुपये का चंदा इकट्ठा किए जाने का क्या औचित्य रह जाता है। केंद्रीय विभागों में विभिन्न विचारधाराओँ के लोग हैं। तमाम लोगों ने चंदा देने से साफ इंकार कर दिया है। -डीसी सक्सेना, जिला महासचिव, बीटीयूएएफ
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एक तो वैसे ही लोकतंत्र के लिए यह मजाक से कम नहीं है कि देशद्रोह के आरोपी को सीपीआई ने अपना प्रत्याशी बना दिया, ऊपर से उसके लिए करोड़ों रुपये चंदा इकट्ठा किया जा रहा है। यूनियन कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए हैं, किसी विवादित शख्सियत चुनाव लड़ाने के लिए चंदा इकट्ठा करने की परंपरा गलत है। ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस ने सर्कुलर जारी कर देश भर से चंदा मांगा है। इसके लिए अंदरूनी तौर पर दबाव भी बनाया गया। मेरे ख्याल से करोड़ों का चंदा इकट्ठा करने की जांच के साथ इस मामले में प्रभावी कार्रवाई भी होनी चाहिए। - सतीश मेहता, जिलाध्यक्ष इंटक
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कन्हैया कुमार के लिए चुनावी फंड इकट्ठा किए जाने की अपील आल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस की महासचिव अमरजीत कौर की ओर से करीब महीना भर पहले जारी की गई थी। सभी कर्मचारी और श्रमिक संगठनों को जारी इस संदेश में कन्हैया कुमार को यूथ आइकन बताते हुए उनके कनॉट सर्कस नई दिल्ली की यूनियन बैंक शाखा के बचत खाता संख्या 0277010003395 में चेक या एआईटीयूसी के माध्यम से ज्यादा से ज्यादा पैसा जमा करने को कहा गया था। अपील में कहा गया था कि श्रमिक संगठनों के लोग ज्यादा से ज्यादा चंदा दें ताकि भाजपा के जहरीले अभियान को रोका जा सके। अगर कोई सक्षम है तो ज्यादा रकम भी दे सकता है। संगठनों के कुछ सदस्यों का दावा है कि इस अपील के बाद पहले ही सप्ताह में इस खाते में 70 लाख रुपये से ज्यादा रकम पहुंच गई। कहा जा रहा है कि महीना पूरा होते-होते अब चंदे की रकम करोड़ों में पहुंच गई है। हालांकि चंदा मांगने वालों ने अब तक यह नहीं बताया है कि कुल कितना चंदा इकट्ठा हो चुका है। बता दें कि बेगूसराय से कन्हैया के खिलाफ भाजपा ने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह और राजद ने तनवीर अहमद को उतारा है।
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ट्रेड यूनियनों पर वामपंथ का वर्चस्व
देश भर में करीब डेढ़ करोड़ कर्मचारी आयकर देते हैं। ज्यादातर संगठनों का नेतृत्व वामपंथी नेताओं के हाथ में है। बीएमएस और इंटक इनमें प्रमुख संगठन हैं। केंद्र सरकार के विभागों के साथ बैंक, बीमा, कारखानों की यूनियन पर वामपंथ ही हावी है। संगठनों के लोगों का कहना है कि ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस के नेताओं ने कन्हैया कुमार के लिए सीधे बैंक खाते में तो चंदा जमा कराया ही है, इसके साथ जिला स्तरीय संगठन प्रमुखों के माध्यम से भी अच्छा-खासा पैसा इकट्ठा किया गया है। चंदा इकट्ठा करने का काम बेगुसराय में चुनाव होने के बाद भी चल रहा है।
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प्रचार में भी झोंकी पूरी ताकत
प्रमुख रूप से भाजपा के विरुद्ध वामपंथी मुहिम का अब कन्हैया कुमार प्रमुख चेहरा बन चुके हैं। चंदा इकट्ठा करने के साथ उनके चुनाव प्रचार में भी पूरी ताकत झोंकी गई है। शबाना आजमी और जावेद अख्तर जैसी बॉलीवुड की हस्तियों के साथ योगेंद्र यादव, जम्मू-कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट की शहला रसीद, स्वरा भास्कर, जेएनयू प्रकरण में उनके सहयोगी उमर खालिद, अनिर्वान भट्टाचार्य, जेएनयू के लापता छात्र बदायूं (यूपी) के नजीब की मां फातिमा, गुजरात के विधायक जिग्नेश मेवाणी, तीस्ता सीतलवाड़ जैसे लोगों ने बेगूसराय में उनके लिए प्रचार किया है।
शुरू हुआ विवाद.. क्यों दें इतना चंदा
अब चंदे पर बरेली के साथ कई जिलों की इकाइयों में विवाद शुरू हो गया है। कर्मचारी और श्रमिक संगठनों का एक गुट का कहना है कि संगठनों पर जबरन वामपंथी विचारधारा थोपने की कोशिश हो रही है। सोशल मीडिया पर भी कर्मचारी और श्रमिक संगठनों से कन्हैया कुमार के लिए चंदा इकट्ठा किए जाने का विरोध किया जा रहा है। पूछा जा रहा है कि कन्हैया ने आखिर ट्रेड यूनियंस में क्या योगदान किया है। कन्हैया को देशद्रोह का आरोपी भी बताया जा रहा है।
वर्जन: फोटो
पिछले महीने ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस ने कन्हैया के लिए चंदा इकट्ठा करने की अपील जारी की थी। तमाम कर्मचारी ऐसी अपील किए जाने से नाराज हैं। कन्हैया देशद्रोह जैसे गंभीर आरोपों में फंसा है। वह खुद यह भी कह चुका है कि वह कम्युनिस्ट नहीं है तो देश भर में सीपीआई से जुड़े संगठनों में करोड़ों रुपये का चंदा इकट्ठा किए जाने का क्या औचित्य रह जाता है। केंद्रीय विभागों में विभिन्न विचारधाराओँ के लोग हैं। तमाम लोगों ने चंदा देने से साफ इंकार कर दिया है। -डीसी सक्सेना, जिला महासचिव, बीटीयूएएफ
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एक तो वैसे ही लोकतंत्र के लिए यह मजाक से कम नहीं है कि देशद्रोह के आरोपी को सीपीआई ने अपना प्रत्याशी बना दिया, ऊपर से उसके लिए करोड़ों रुपये चंदा इकट्ठा किया जा रहा है। यूनियन कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए हैं, किसी विवादित शख्सियत चुनाव लड़ाने के लिए चंदा इकट्ठा करने की परंपरा गलत है। ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस ने सर्कुलर जारी कर देश भर से चंदा मांगा है। इसके लिए अंदरूनी तौर पर दबाव भी बनाया गया। मेरे ख्याल से करोड़ों का चंदा इकट्ठा करने की जांच के साथ इस मामले में प्रभावी कार्रवाई भी होनी चाहिए। - सतीश मेहता, जिलाध्यक्ष इंटक