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पहले डिग्री फिर इंटर्नशिप, मुश्किल में पड़े मेडिकल छात्र
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बरेली। एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय के मेडिकल छात्रों के लिए विश्वविद्यालय के नियम ही मुश्किल बन गए। इंटर्नशिप से पहले ही डिग्री जारी का नियम उनके लिए जॉब और विदेश में इंटर्नशिप के लिए मुसीबत खड़ी कर रहा है। उनकी डिग्रियों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। विश्वविद्यालय द्वारा क्लियरेंस सर्टिफिकेट न देने पर कई की जॉब तक दांव पर लग गई है। अब छात्र विश्वविद्यालय में क्लियरेंस सर्टिफिकेट के लिए चक्कर काट रहे हैं।
दरअसल विश्वविद्यालय मेडिकल छात्रों को इंटर्नशिप पूरी होने से पहले ही दीक्षांत समारोह पर डिग्री और मार्कशीट साथ में दे देता था। डिग्री पर उस दिन की तिथि भी डाल दी जाती थी। एमडी, बीडीएस, एमबीबीएस के छात्रों को डिग्री जारी होने से पहले अनिवार्य रूप से इंटर्नशिप पूरी करनी होती है। एमबीबीएस में एक साल की इंटर्नशिप होती है यानी साढ़े पांच साल में उनका कोर्स पूरा होता है। कई संस्थान इस बात पर आपत्ति करते थे कि इंटर्नशिप पूरी होने से पहले डिग्री कैसे जारी हो गई। उसकी सत्यता पर सवाल उठाते थे। पूर्व वर्षों तक विश्वविद्यालय मेडिकल छात्रों को दीक्षांत समारोह पर डिग्री दे देता था और इंटर्नशिप या जॉब के लिए एक क्लियरेंस सर्टिफिकेट देता था। अब विश्वविद्यालय ने यह सर्टिफिकेट देने से मना कर दिया। कुछ वर्षों से इंटर्नशिप पूरी होने के बाद ही डिग्री जारी होती है। सोमवार को कुछ मामले सामने आए जिसमें परीक्षा नियंत्रक ने क्लियरेंस सर्टिफिकेट देने से मना कर दिया। उनका कहना है कि नियम बदल चुका है। कई छात्र विदेश में जॉब और इंटर्नशिप कर रहे हैं। अब उनको फर्जीवाड़े में फंसने का खतरा है। अगर उनको क्लियरेंस सर्टिफिकेट नहीं मिलता है तो यही माना जाएगा कि उनकी डिग्री कोर्स पूरा होने से पहले ही जारी हुई। अब ऐसे छात्रों के सामने विश्वविद्यालय के पुराना नियम मुसीबत बन रहा है।
पूर्व वर्षों में क्या होता रहा, इसपर मैं कुछ नहीं कह सकता। अब जो नियमानुसार है वैसी ही कार्यवाही की जाएगी। ऐसे छात्रों के लिए क्या किया जा सकता है विचार कर रहे हैं।
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-संजीव कुमार सिंह, परीक्षा नियंत्रक
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दरअसल विश्वविद्यालय मेडिकल छात्रों को इंटर्नशिप पूरी होने से पहले ही दीक्षांत समारोह पर डिग्री और मार्कशीट साथ में दे देता था। डिग्री पर उस दिन की तिथि भी डाल दी जाती थी। एमडी, बीडीएस, एमबीबीएस के छात्रों को डिग्री जारी होने से पहले अनिवार्य रूप से इंटर्नशिप पूरी करनी होती है। एमबीबीएस में एक साल की इंटर्नशिप होती है यानी साढ़े पांच साल में उनका कोर्स पूरा होता है। कई संस्थान इस बात पर आपत्ति करते थे कि इंटर्नशिप पूरी होने से पहले डिग्री कैसे जारी हो गई। उसकी सत्यता पर सवाल उठाते थे। पूर्व वर्षों तक विश्वविद्यालय मेडिकल छात्रों को दीक्षांत समारोह पर डिग्री दे देता था और इंटर्नशिप या जॉब के लिए एक क्लियरेंस सर्टिफिकेट देता था। अब विश्वविद्यालय ने यह सर्टिफिकेट देने से मना कर दिया। कुछ वर्षों से इंटर्नशिप पूरी होने के बाद ही डिग्री जारी होती है। सोमवार को कुछ मामले सामने आए जिसमें परीक्षा नियंत्रक ने क्लियरेंस सर्टिफिकेट देने से मना कर दिया। उनका कहना है कि नियम बदल चुका है। कई छात्र विदेश में जॉब और इंटर्नशिप कर रहे हैं। अब उनको फर्जीवाड़े में फंसने का खतरा है। अगर उनको क्लियरेंस सर्टिफिकेट नहीं मिलता है तो यही माना जाएगा कि उनकी डिग्री कोर्स पूरा होने से पहले ही जारी हुई। अब ऐसे छात्रों के सामने विश्वविद्यालय के पुराना नियम मुसीबत बन रहा है।
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पूर्व वर्षों में क्या होता रहा, इसपर मैं कुछ नहीं कह सकता। अब जो नियमानुसार है वैसी ही कार्यवाही की जाएगी। ऐसे छात्रों के लिए क्या किया जा सकता है विचार कर रहे हैं।
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-संजीव कुमार सिंह, परीक्षा नियंत्रक