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बाहर जन्मे बच्चों को न भर्ती करेंगे न इलाज
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बरेली। अगर आपका नवजात शिशु बीमार है और बाहर किसी अस्पताल में जन्मा है तो जिला महिला अस्पताल इलाज कराने की उम्मीद से मत जाना। यहां की सीएमएस ने एक अजीबोगरीब फरमान जारी किया है। अस्पताल के बाहर नोटिस चस्पा करा दिया है कि यहां बाहर जन्मे बच्चे का न इलाज किया जाता है और न ही भर्ती, जबकि स्वास्थ्य महकमा जिला महिला अस्पताल में आधुनिक सुविधाएं होने का दम भरता है। नोटिस की बात फैलने पर अधिकारियों में खलबली मच गई। सीएमओ ने सीएमएस से जवाब तलब किया है।
जिला महिला अस्पताल में न्यू बोर्न स्टेबलाइजेशन (एनबीसीयू) सेंटर बना है। इसमें नवजात शिशुओं के इलाज के लिए बेहतर सुविधाएं हैं। जिला महिला अस्पताल में सीएचसी पीएचसी से नवजात शिशु रेफर होकर आते हैं। अस्पताल प्रशासन का तर्क है कि न्यू बोर्न सेंटर पूरी तरह से सुविधाओं से लैस नहीं है। सेंटर पर 16 तरह की सुविधाएं चाहिए, जबकि मौजूदा वक्त में वार्मर और फोटोग्राफी की सुविधा है। इसके अलावा ऑक्सीजन सप्लाई, वीटल मॉनिटरिंग समेत 14 सुविधाएं नहीं हैं। असुविधाओं का हवाला देकर महिला अस्पताल ने बाहर जन्मे बच्चों का इलाज करने से ही हाथ खड़े कर दिए। नोटिस में लिखा है कि जिला महिला अस्पताल की सीएमएस की ओर से जारी नोटिस में कहा, जिला महिला चिकित्सालय बरेली में इस चिकित्सालय के बाहर पैदा हुए नवजात शिशु एवम अति गंभीर नवजात शिशु को भर्ती नहीं किया जाता। नोटिस की जानकारी मिलने के बाद सीएमओ ने सीएमएस से जवाब तलब किया है।
जिला महिला अस्पताल पूरे जिले के लिए है। यहां बाहर पैदा हुए बच्चों को भर्ती करना या इलाज से मना करना गलत है। महिला अस्पताल में एनबीसीयू आधुनिक सुविधाओं से लैस है। इस मामले में सीएमएस से बात की जाएगी।
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- डॉ. विनीत कुमार शुक्ल, सीएमओ
हमारे पास पर्याप्त सुविधाएं नहीं है, इसलिए नोटिस चस्पा किया कि बाहर पैदा हुए बच्चों को यहां भर्ती नहीं किया जाता। केयर यूनिट में 16 चीजों की जरूरत है जबकि हमारे पास दो ही हैं। अगर बच्चा ज्यादा गंभीर नहीं तो उसे हम भर्ती भी करते हैं।
- डॉ. अलका शर्मा, सीएमएस जिला महिला अस्पताल
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जिला महिला अस्पताल में न्यू बोर्न स्टेबलाइजेशन (एनबीसीयू) सेंटर बना है। इसमें नवजात शिशुओं के इलाज के लिए बेहतर सुविधाएं हैं। जिला महिला अस्पताल में सीएचसी पीएचसी से नवजात शिशु रेफर होकर आते हैं। अस्पताल प्रशासन का तर्क है कि न्यू बोर्न सेंटर पूरी तरह से सुविधाओं से लैस नहीं है। सेंटर पर 16 तरह की सुविधाएं चाहिए, जबकि मौजूदा वक्त में वार्मर और फोटोग्राफी की सुविधा है। इसके अलावा ऑक्सीजन सप्लाई, वीटल मॉनिटरिंग समेत 14 सुविधाएं नहीं हैं। असुविधाओं का हवाला देकर महिला अस्पताल ने बाहर जन्मे बच्चों का इलाज करने से ही हाथ खड़े कर दिए। नोटिस में लिखा है कि जिला महिला अस्पताल की सीएमएस की ओर से जारी नोटिस में कहा, जिला महिला चिकित्सालय बरेली में इस चिकित्सालय के बाहर पैदा हुए नवजात शिशु एवम अति गंभीर नवजात शिशु को भर्ती नहीं किया जाता। नोटिस की जानकारी मिलने के बाद सीएमओ ने सीएमएस से जवाब तलब किया है।
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जिला महिला अस्पताल पूरे जिले के लिए है। यहां बाहर पैदा हुए बच्चों को भर्ती करना या इलाज से मना करना गलत है। महिला अस्पताल में एनबीसीयू आधुनिक सुविधाओं से लैस है। इस मामले में सीएमएस से बात की जाएगी।
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- डॉ. विनीत कुमार शुक्ल, सीएमओ
हमारे पास पर्याप्त सुविधाएं नहीं है, इसलिए नोटिस चस्पा किया कि बाहर पैदा हुए बच्चों को यहां भर्ती नहीं किया जाता। केयर यूनिट में 16 चीजों की जरूरत है जबकि हमारे पास दो ही हैं। अगर बच्चा ज्यादा गंभीर नहीं तो उसे हम भर्ती भी करते हैं।
- डॉ. अलका शर्मा, सीएमएस जिला महिला अस्पताल