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देखो, लगने के बाद ये एस्केलेटर चलता भी है या नहीं
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बरेली। तीन साल बाद जंक्शन पर एस्केलेटर लगाने की कवायद शुरू हुई तो पता चला कि सभी मशीनों की वायरिंग चूहों ने काट दी है। लगने के बाद ये चलेंगे या नहीं ये तो बाद में पता चलेगा पर काम तेजी से शुरू हो गया है।
तीन साल तक बरसात, धूप में पड़े रहने के बाद शुक्रवार से एस्केलेटर लगाने का काम शुरू हो गया। क्रेन से मशीनरी को प्लेटफॉर्म पर रखा गया। इसके बाद देखा तो सभी तार कटे मिले। यह देखकर ठेकेदार ने मुरादाबाद से इलेक्ट्रिशियन को बुलाया। वह दिनभर तार ही जोड़ता रहा। अब रविवार से एस्केलेटर लगने की शुरुआत होगी। बता दें कि तीन साल पहले एस्केलेटर पार्सल ऑफिस के पास से लगने थे, लेकिन ऐन मौके पर जीआरपी की ओर लगाने का प्लान बनने लगा। इस पशोपेश में वेटिंग हॉल की ओर एस्केलेटर की मशीनरी कबाड़ की तरह पड़ी रही। यात्रियों ने इसे कूड़ादान बना दिया। इस खबर को अमर उजाला ने प्रमुखता से छापा तो निर्माण विभाग ने प्लास्टिक का कवर डलवा दिया था। जानकारों का कहना है कि हठधर्मिता के चलते एस्केलेटर का ये हाल हुआ है। मशीनरी के अंदर का फॉल्ट बाद में मालूम चलेगा। जंक्शन के रेल निदेशक मनोज मीणा ने बताया कि एस्केेलेटर की मशीनरी फिट है। फरवरी के अंत मेें यात्रियों को सुविधा मिलनी शुरू हो जाएगी।
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तीन साल तक बरसात, धूप में पड़े रहने के बाद शुक्रवार से एस्केलेटर लगाने का काम शुरू हो गया। क्रेन से मशीनरी को प्लेटफॉर्म पर रखा गया। इसके बाद देखा तो सभी तार कटे मिले। यह देखकर ठेकेदार ने मुरादाबाद से इलेक्ट्रिशियन को बुलाया। वह दिनभर तार ही जोड़ता रहा। अब रविवार से एस्केलेटर लगने की शुरुआत होगी। बता दें कि तीन साल पहले एस्केलेटर पार्सल ऑफिस के पास से लगने थे, लेकिन ऐन मौके पर जीआरपी की ओर लगाने का प्लान बनने लगा। इस पशोपेश में वेटिंग हॉल की ओर एस्केलेटर की मशीनरी कबाड़ की तरह पड़ी रही। यात्रियों ने इसे कूड़ादान बना दिया। इस खबर को अमर उजाला ने प्रमुखता से छापा तो निर्माण विभाग ने प्लास्टिक का कवर डलवा दिया था। जानकारों का कहना है कि हठधर्मिता के चलते एस्केलेटर का ये हाल हुआ है। मशीनरी के अंदर का फॉल्ट बाद में मालूम चलेगा। जंक्शन के रेल निदेशक मनोज मीणा ने बताया कि एस्केेलेटर की मशीनरी फिट है। फरवरी के अंत मेें यात्रियों को सुविधा मिलनी शुरू हो जाएगी।
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