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परीक्षाओं के साथ अब प्रैक्टिकल भी सीसीटीवी की निगरानी में होंगें
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बरेली। एमजेपी रुहेलखंड मुख्य परीक्षाओं के साथ अब प्रैक्टिकल भी सीसीटीवी की निगरानी में कराएगा। प्रैक्टिकल में होने वाली गड़बड़ियों पर लगाम लगाने के लिए यह कदम उठाया गया है। साथ ही वॉयस रिकॉर्डर भी लगाए जाएंगे। विश्वविद्यालय ने इसकी तैयारी कर ली है। 20 जनवरी के बाद प्रैक्टिकल शुरू हो जाएंगे।
अब तक विश्वविद्यालय प्रैक्टिकल सीसीटीवी की निगरानी में नहीं होते थे। छात्र को किस आधार पर नंबर दिए जा रहे, उपस्थित है या नहीं। कई बार परीक्षाओं में धांधली का भी आरोप लगते थे। प्राइवेट कॉलेजों में पैसे लेकर नंबर देने के कई बार मामले सामने आए। यहां तक कई बार परीक्षक ही कॉलेज नहीं जाते। घर बैठे ही शिक्षक नंबर की लिस्ट पर हस्ताक्षर कर देते थे। पिछले साल मुख्य परीक्षाएं सीसीटीवी की निगरानी में हुई। इस बार वॉयस रिकॉर्डर भी लगाए जा रहे हैं। अब विश्वविद्यालय प्रैक्टिकल की भी मॉनिटरिंग सीसीटीवी से करना चाहता है। इसलिए अब प्रैक्टिकल और वायवा सीसीटीवी की निगरानी में होंगे। वहां वॉयस रिकॉर्डर भी लगाना होगा। सीसीटीवी रिकॉर्डिंग भी सुरक्षित रखनी होगी। परीक्षा नियंत्रक संजीव कुमार ने बताया कि इस बार से नई व्यवस्था लागू कर दी जाएगी।
फेल छात्रों के सामने रोल नंबर बना मुसीबत
प्राइवेट फॉर्म भरने में रोल नंबर छात्रों के लिए मुसीबत बन रहे हैं। फेल छात्र उसी साल का रोल नंबर डाल रहे हैं जिससे वह फॉर्म नहीं भर पा रहे हैं। परीक्षा नियंत्रक संजीव कुमार ने बताया कि इस तरह तमाम शिकायतें आ रही हैं। अगर छात्र थर्ड ईयर के फेल हुआ तो उसको इस साल सेकेंड ईयर के रोल नंबर से फॉर्म भरना है। अगर सेकेंड ईयर में फेल हुआ है तो उसको प्रथम वर्ष का रोल नंबर डालना होगा।
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अब तक विश्वविद्यालय प्रैक्टिकल सीसीटीवी की निगरानी में नहीं होते थे। छात्र को किस आधार पर नंबर दिए जा रहे, उपस्थित है या नहीं। कई बार परीक्षाओं में धांधली का भी आरोप लगते थे। प्राइवेट कॉलेजों में पैसे लेकर नंबर देने के कई बार मामले सामने आए। यहां तक कई बार परीक्षक ही कॉलेज नहीं जाते। घर बैठे ही शिक्षक नंबर की लिस्ट पर हस्ताक्षर कर देते थे। पिछले साल मुख्य परीक्षाएं सीसीटीवी की निगरानी में हुई। इस बार वॉयस रिकॉर्डर भी लगाए जा रहे हैं। अब विश्वविद्यालय प्रैक्टिकल की भी मॉनिटरिंग सीसीटीवी से करना चाहता है। इसलिए अब प्रैक्टिकल और वायवा सीसीटीवी की निगरानी में होंगे। वहां वॉयस रिकॉर्डर भी लगाना होगा। सीसीटीवी रिकॉर्डिंग भी सुरक्षित रखनी होगी। परीक्षा नियंत्रक संजीव कुमार ने बताया कि इस बार से नई व्यवस्था लागू कर दी जाएगी।
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फेल छात्रों के सामने रोल नंबर बना मुसीबत
प्राइवेट फॉर्म भरने में रोल नंबर छात्रों के लिए मुसीबत बन रहे हैं। फेल छात्र उसी साल का रोल नंबर डाल रहे हैं जिससे वह फॉर्म नहीं भर पा रहे हैं। परीक्षा नियंत्रक संजीव कुमार ने बताया कि इस तरह तमाम शिकायतें आ रही हैं। अगर छात्र थर्ड ईयर के फेल हुआ तो उसको इस साल सेकेंड ईयर के रोल नंबर से फॉर्म भरना है। अगर सेकेंड ईयर में फेल हुआ है तो उसको प्रथम वर्ष का रोल नंबर डालना होगा।
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