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साध्वी कोयल बनीं दबंगों का शिकार, आग से झुलसकर हालत गंभीर
Updated Sun, 25 Nov 2018 12:01 AM IST
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तिलहर/बरेली। तिलहर कस्बे की रहने वाली साध्वी कोयल गिरि उर्फ सीमा वर्मा शुक्रवार रात दबंगों का शिकार बन गईं। परिवार ने रिपोर्ट दर्ज कराई है कि लाखों रुपये की जमीन को लेकर रंजिश रखने वाले चार लोगों ने उन्हें लखनऊ से लौटते वक्त घर के पास ही घेरकर आग लगा दी, जिससे वह गंभीर रूप से झुलस गईं। वहीं कोयल गिरि ने एक वीडियो में खुद को आग लगाने की बात कही है।
तिलहर विधानसभा क्षेत्र से पीस पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ चुकीं कोयल गिरि कस्बे के बहादुरगंज मोहल्ले में रहती हैं। मां रामकली के मुताबिक कोयल गिरि लखनऊ के एक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद समर्थकों के साथ शुक्रवार शाम शाहजहांपुर लौट रही थीं। तब ट्रेन के आरक्षित कोच में उन पर हमला किया गया। कोच में मौजूद कुछ युवकों ने आंझी शाहबाद स्टेशन के पास ट्रेन से खींचने की कोशिश की। यात्रियों के आड़े आने से वह बच गईं। मगर रात करीब आठ बजे ट्रेन तिलहर पहुंचने के बाद जब वह अपने घर के पास पहुंचीं तो ट्रेन में घेरने वाले ही दबंगों ने गली में उन्हें दोबारा घेर लिया। वह घर की तरफ भागीं तो उन पर मिट्टी का तेल छिड़क दिया और आग लगा दी। उन्हें बरेली के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया है। आईजी रेंज डीके ठाकुर के निर्देश पर दर्ज हुई रिपोर्ट में व्यवसायी तीन भाइयों तिलहर के सुशील गुप्ता, पंकज और अनिल के अलावा अनुराग गुप्ता को जानलेवा हमले का आरोपी बनाया गया है। वहीं एक अन्य दौलतगिरि पर धमकाने का आरोप है।
करीब 80 प्रतिशत झुलसीं कोयल गिरि ने अस्पताल में उन्होंने मजिस्ट्रेट को बयान दिए हैं। इस बीच उनका एक वीडियो वायरल हुआ है, इसमें उन्होंने कहा है कि उनकी जमीनों पर कब्जा कर लिया गया। इन्हें छुड़ाने की कोशिश की तो उन पर झूठे मुकदमे लिखवा दिए गए। डीएम-एसपी किसी ने उनकी नहीं सुनी। फिर तरह-तरह से दबंग उन्हें परेशान करने लगे, कई अनैतिक शब्दों का इस्तेमाल किया। अब फोन पर धमकियां दी जा रही थीं। इससे परेशान होकर उन्होंने खुद को आग लगा ली। उनके इस बयान के बीच पुलिस ने मौका मुआयना किया तो एक कमरे में मिट्टी के तेल की पिपिया भी मिली।
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यह है विवाद
लेखपाल रहे पिता राजाराम ने अलग-अलग स्थानों पर खाली पड़ी जमीनों को अपने जीवित रहते सीमा की मां रामलली के नाम बैनामा कराया था। राजाराम की मृत्यु के बाद कुछ लोगों ने इन्हीं जमीनों का बैनामा अपने नाम करा लिया। इसी विवाद में कोयल गिरि ने भी कई मुकदमे लिखाए। एसडीएम तिलहर मोईन उल इस्लाम का कहना है कि जमीन आबादी के बीच हैं, मामला सिविल कोर्ट में चल रह है। कोर्ट ही इस मामले में फैसला करेगा। इसलिए वह कुछ नहीं कर सकते थे।
ऐसे बनीं साध्वी
सीमा वर्मा वर्ष 1995 में पिता के साथ लखनऊ इलाज के लिए गई थीं। तब वह मनकामेश्वर मठ पर गईं और वहां जूना अखाड़े के महंत से मिलने के बाद संत बनने का विचार किया। वर्ष 1998 में अखाड़ा के नियम के अनुसार 6 माह तक घर में रहकर योग अनुष्ठान किया। उसके बाद साध्वी बन गईं।
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तिलहर विधानसभा क्षेत्र से पीस पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ चुकीं कोयल गिरि कस्बे के बहादुरगंज मोहल्ले में रहती हैं। मां रामकली के मुताबिक कोयल गिरि लखनऊ के एक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद समर्थकों के साथ शुक्रवार शाम शाहजहांपुर लौट रही थीं। तब ट्रेन के आरक्षित कोच में उन पर हमला किया गया। कोच में मौजूद कुछ युवकों ने आंझी शाहबाद स्टेशन के पास ट्रेन से खींचने की कोशिश की। यात्रियों के आड़े आने से वह बच गईं। मगर रात करीब आठ बजे ट्रेन तिलहर पहुंचने के बाद जब वह अपने घर के पास पहुंचीं तो ट्रेन में घेरने वाले ही दबंगों ने गली में उन्हें दोबारा घेर लिया। वह घर की तरफ भागीं तो उन पर मिट्टी का तेल छिड़क दिया और आग लगा दी। उन्हें बरेली के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया है। आईजी रेंज डीके ठाकुर के निर्देश पर दर्ज हुई रिपोर्ट में व्यवसायी तीन भाइयों तिलहर के सुशील गुप्ता, पंकज और अनिल के अलावा अनुराग गुप्ता को जानलेवा हमले का आरोपी बनाया गया है। वहीं एक अन्य दौलतगिरि पर धमकाने का आरोप है।
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करीब 80 प्रतिशत झुलसीं कोयल गिरि ने अस्पताल में उन्होंने मजिस्ट्रेट को बयान दिए हैं। इस बीच उनका एक वीडियो वायरल हुआ है, इसमें उन्होंने कहा है कि उनकी जमीनों पर कब्जा कर लिया गया। इन्हें छुड़ाने की कोशिश की तो उन पर झूठे मुकदमे लिखवा दिए गए। डीएम-एसपी किसी ने उनकी नहीं सुनी। फिर तरह-तरह से दबंग उन्हें परेशान करने लगे, कई अनैतिक शब्दों का इस्तेमाल किया। अब फोन पर धमकियां दी जा रही थीं। इससे परेशान होकर उन्होंने खुद को आग लगा ली। उनके इस बयान के बीच पुलिस ने मौका मुआयना किया तो एक कमरे में मिट्टी के तेल की पिपिया भी मिली।
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यह है विवाद
लेखपाल रहे पिता राजाराम ने अलग-अलग स्थानों पर खाली पड़ी जमीनों को अपने जीवित रहते सीमा की मां रामलली के नाम बैनामा कराया था। राजाराम की मृत्यु के बाद कुछ लोगों ने इन्हीं जमीनों का बैनामा अपने नाम करा लिया। इसी विवाद में कोयल गिरि ने भी कई मुकदमे लिखाए। एसडीएम तिलहर मोईन उल इस्लाम का कहना है कि जमीन आबादी के बीच हैं, मामला सिविल कोर्ट में चल रह है। कोर्ट ही इस मामले में फैसला करेगा। इसलिए वह कुछ नहीं कर सकते थे।
ऐसे बनीं साध्वी
सीमा वर्मा वर्ष 1995 में पिता के साथ लखनऊ इलाज के लिए गई थीं। तब वह मनकामेश्वर मठ पर गईं और वहां जूना अखाड़े के महंत से मिलने के बाद संत बनने का विचार किया। वर्ष 1998 में अखाड़ा के नियम के अनुसार 6 माह तक घर में रहकर योग अनुष्ठान किया। उसके बाद साध्वी बन गईं।