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बाघ या तेंदुआ? असमंजस बरकरार
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,लखीमपुर खीरी
Updated Fri, 20 Jul 2018 12:32 AM IST
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घायल पवन हमला करने वाले को लगातार बाघ बता रहा है। पवन कहना है कि वह बाघ और तेंदुए को बखूबी पहचानता है, इसलिए दावा करता है कि हमला करने वाला बाघ ही था। वहीं, डीएफओ समीर वर्मा कहते हैं कि बाघ की प्रकृति तेंदुए से भिन्न होती है। बाघ अपने शिकार पर टूटता है तो वह बच नहीं सकता। बाघ का हमला तेंदुए की अपेक्षा काफी घातक होता है। सड़क किनारे कुछ लोगों के शोर मचाने मात्र से बाघ कभी नहीं भागता, इसलिए प्रथम दृष्टया हमला तेंदुए का प्रतीत होता है। फिलहाल जिस पर हमला हुआ उसकी जुबानी और वन अधिकारियों के अनुभव को देखते हुए बाघ अथवा तेंदुए के हमले को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रही।
गोला पश्चिम के जंगल बाघों के लिए अनुकूल
वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. वीपी सिंह का मानना है कि पश्चिम गोला वनक्षेत्र के बीच से होकर गुजरी बड़ी नहर जंगल में भोजन, पानी और आवास के लिए अनुकूल वातावरण मिलने से यहां बाघों की आबादी तेजी से बढ़ रही है। जंगल क्षेत्र कम होने और जंगल के बीच से होकर नहर में बाघ अपनी प्यास बुझाने के लिए पहुंच जाते हैं। इस दौरान सड़क से गुजर रहे राहगीरों पर इनका हमला करना स्वाभाविक है।
बाघों के छिपने का ठिकाना बनी रोड किनारे खड़ीं झाड़ियां
गोला कुकरा जंगल रोड किनारे उगी लंबी और ऊंची झाड़ियां बाघों के छिपने का साधन बनती जा रहीं हैं। जिससे इस व्यस्त रोड पर राहगीरों पर बाघ हमले की आशंका बनी रहती है। इसके चलते इलाकाई ग्रामीण हरजिंदर सिंह, गुरपाल सिंह, विकास जोशी, मंगल सिंह आदि ने वन विभाग से झाड़ियों की साफ-सफाई की मांग की है।
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गोला पश्चिम के जंगल बाघों के लिए अनुकूल
वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. वीपी सिंह का मानना है कि पश्चिम गोला वनक्षेत्र के बीच से होकर गुजरी बड़ी नहर जंगल में भोजन, पानी और आवास के लिए अनुकूल वातावरण मिलने से यहां बाघों की आबादी तेजी से बढ़ रही है। जंगल क्षेत्र कम होने और जंगल के बीच से होकर नहर में बाघ अपनी प्यास बुझाने के लिए पहुंच जाते हैं। इस दौरान सड़क से गुजर रहे राहगीरों पर इनका हमला करना स्वाभाविक है।
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बाघों के छिपने का ठिकाना बनी रोड किनारे खड़ीं झाड़ियां
गोला कुकरा जंगल रोड किनारे उगी लंबी और ऊंची झाड़ियां बाघों के छिपने का साधन बनती जा रहीं हैं। जिससे इस व्यस्त रोड पर राहगीरों पर बाघ हमले की आशंका बनी रहती है। इसके चलते इलाकाई ग्रामीण हरजिंदर सिंह, गुरपाल सिंह, विकास जोशी, मंगल सिंह आदि ने वन विभाग से झाड़ियों की साफ-सफाई की मांग की है।
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