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मनरेगा और स्थानीय निकाय ईपीएफ दायरे में आएंगे
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केंद्रीय श्रम व रोजगार मंत्रालय ने जारी किए निर्देश
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बरेली। मनरेगा और स्थानीय निकाय जैसे स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम, लोकनिर्माण विभाग समेत अन्य सेक्टरों में काम करने वाले संविदा कर्मी और श्रमिक अब जल्द ही कर्मचारी भविष्य निधि संगठन में सदस्य बन जाएंगे। केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्रालय ने इसका देश व्यापी प्लान तैयार किया है। इसके तहत ईपीएफओ ने कार्यवाही भी शुरू कर दी है। मनरेगा और स्थानीय निकायों से संबंधित अफसरों को नोटिस जारी कर दिए हैं।
देशभर में रोजगार देने के मामले में मनरेगा का दूसरा नंबर है। राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना के तहत मनरेगा में कार्यरत श्रमिक जल्द ही ईपीएफओ के सदस्य बन जाएंगे। उनका ईपीएफ खाता खुल जाएगा और साठ वर्ष पूरे करने के बाद भी उन्हें एक निश्चित राशि पेंशन के रूप में मिलेगी। इसके लिए केंद्रीय श्रम व रोजगार मंत्रालय ने प्लान बनाया था, लेकिन पिछले दिनों लोकसभा चुनाव प्रक्रिया शुरू होते ही आचार संहिता लगने से योजना में तेजी नहीं आ पाई थी। हालांकि ईपीएफओ अपना काम करता रहा। इसके तहत उसने मनरेगा श्रमिक (जॉब कार्ड धारक), स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय निकाय मेें कार्यरत संविदा कर्मचारी और इस क्षेत्र के ठेकेदारों को नोटिस थमा दिए हैं। साथ ही स्थानीय निकाय, सीएमओ, सीएमएस आदि से कहा गया है कि विभाग में काम करने वाले ठेकेदारों के श्रमिकों को सदस्य बनाने के लिए सहयोग करें। संविदा पर कार्यरत स्टाफ की सूची भी उपलब्ध कराने को कहा गया है।
3.34 लाख श्रमिक मनरेगा दायरे में आएंगे
देश भर में करोड़ों की तादाद में मनरेगा श्रमिक कार्यरत हैं। उत्तर प्रदेश में 101.47 और बरेली में 3.34 लाख श्रमिक मनरेगा जॉब कार्ड धारक हैं। इन सभी को ईपीएफओ योजना का लाभ मिलना तय है। इसी तरह स्थानीय निकायों आदि में भी बड़ी तादाद में ठेकेदारों की लेबर काम करती है। स्वास्थ्य विभाग में केंद्रीय और राज्य स्तरीय योजना में संविदा कर्मी कार्यरत हैं। यह सभी ईपीएफओ दायरे में आ जाएंगे। वहीं अफसरों का कहना है कि श्रमिक अपना अंश तो कटवा देंगे, लेकिन नियोक्ता यानि मनरेगा विभाग किस मद से अपना अंश जमा कराएगा।
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‘ईपीएफओ से नोटिस मिला है। लेकिन मनरेगा श्रमिका का अंश कैसे जमा होगा, इस पर कवायद हो रही है। क्याेंकि इस योजना में अतिरिक्त मद नहीं है। इस पर उच्च स्तर पर बात कर रहे हैं।’
- गंगाराम, जिला समन्वयक मनरेगा
‘मनरेगा, स्वास्थ्य और नगर निकाय प्राथमिकता से ईपीएफओ में शामिल किए जा रहे हैं। इससे लाखों श्रमिक और संविदा कर्मियों को सीधा लाभ होगा। इन्हें ईपीएफ सदस्य बनाने के लिए विभाग ने अभियान शुरू कर दिया है।’
- अंकुर गुप्ता, क्षेत्रीय आयुक्त, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन
देशभर में रोजगार देने के मामले में मनरेगा का दूसरा नंबर है। राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना के तहत मनरेगा में कार्यरत श्रमिक जल्द ही ईपीएफओ के सदस्य बन जाएंगे। उनका ईपीएफ खाता खुल जाएगा और साठ वर्ष पूरे करने के बाद भी उन्हें एक निश्चित राशि पेंशन के रूप में मिलेगी। इसके लिए केंद्रीय श्रम व रोजगार मंत्रालय ने प्लान बनाया था, लेकिन पिछले दिनों लोकसभा चुनाव प्रक्रिया शुरू होते ही आचार संहिता लगने से योजना में तेजी नहीं आ पाई थी। हालांकि ईपीएफओ अपना काम करता रहा। इसके तहत उसने मनरेगा श्रमिक (जॉब कार्ड धारक), स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय निकाय मेें कार्यरत संविदा कर्मचारी और इस क्षेत्र के ठेकेदारों को नोटिस थमा दिए हैं। साथ ही स्थानीय निकाय, सीएमओ, सीएमएस आदि से कहा गया है कि विभाग में काम करने वाले ठेकेदारों के श्रमिकों को सदस्य बनाने के लिए सहयोग करें। संविदा पर कार्यरत स्टाफ की सूची भी उपलब्ध कराने को कहा गया है।
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3.34 लाख श्रमिक मनरेगा दायरे में आएंगे
देश भर में करोड़ों की तादाद में मनरेगा श्रमिक कार्यरत हैं। उत्तर प्रदेश में 101.47 और बरेली में 3.34 लाख श्रमिक मनरेगा जॉब कार्ड धारक हैं। इन सभी को ईपीएफओ योजना का लाभ मिलना तय है। इसी तरह स्थानीय निकायों आदि में भी बड़ी तादाद में ठेकेदारों की लेबर काम करती है। स्वास्थ्य विभाग में केंद्रीय और राज्य स्तरीय योजना में संविदा कर्मी कार्यरत हैं। यह सभी ईपीएफओ दायरे में आ जाएंगे। वहीं अफसरों का कहना है कि श्रमिक अपना अंश तो कटवा देंगे, लेकिन नियोक्ता यानि मनरेगा विभाग किस मद से अपना अंश जमा कराएगा।
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‘ईपीएफओ से नोटिस मिला है। लेकिन मनरेगा श्रमिका का अंश कैसे जमा होगा, इस पर कवायद हो रही है। क्याेंकि इस योजना में अतिरिक्त मद नहीं है। इस पर उच्च स्तर पर बात कर रहे हैं।’
- गंगाराम, जिला समन्वयक मनरेगा
‘मनरेगा, स्वास्थ्य और नगर निकाय प्राथमिकता से ईपीएफओ में शामिल किए जा रहे हैं। इससे लाखों श्रमिक और संविदा कर्मियों को सीधा लाभ होगा। इन्हें ईपीएफ सदस्य बनाने के लिए विभाग ने अभियान शुरू कर दिया है।’
- अंकुर गुप्ता, क्षेत्रीय आयुक्त, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन