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Bareilly News: नियमित टीकाकरण का विरोध कर रहे हैं 530 परिवार, बच्चे असुरक्षित
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बरेली। बचपन में लगने वाले 12 टीके जीवन भर की सुरक्षा देते हैं। फिर भी जिले के 530 परिवार ऐसे हैं, जो अपने बच्चों को टीका नहीं लगवा रहे हैं। ऐसा करके वह अपने बच्चों की जान जोखिम में डाल रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों और डाक्टरों के समझाने के बावजूद वह टीका नहीं लगवा रहे हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने इसकी सूचना शासन को भेज दी है।
नियमित टीकाकरण करवाने पर 12 गंभीर बीमारियां नहीं होती हैं। इसमें टीबी, पोलियो, हेपेटाइटिस बी, डिप्थीरिया, टिटनेस, मीजल्स, काली खांसी, रूबेला, जेई (दिमागी बुखार), निमोनिया, डायरिया और इंफ्लूएंजा हैं। टीका लगने के बाद जीवनभर इन बीमारियों का खतरा टल जाता है।
निजी अस्पतालों में यह टीके बेहद महंगे हैं। जबकि सरकारी अस्पतालों में निशुल्क लगते हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम यह टीका लगाने के लिए कई बार घर- घर भी जाती है। पिछले वर्ष तक टीकाकरण का विरोध करने वालों परिवारों की संख्या करीब चार हजार थी। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. प्रशांत रंजन ने बताया कि जागरूकता मुहिम और कार्यक्रमों के जरिए समझाने से अधिकतर लोग मान गए और बच्चों को टीका लगवा लिया है।
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विरोध करने वाले परिवारों को आशंका है कि टीका लगवाने से नपुंसकता जैसी समस्या न हो जाय। इस भ्रांति को दूर करने के लिए डाक्टरों और धर्मगुरुओं ने उनको समझाया है फिर भी सफलता नहीं मिली। टीका का विरोध करने वाले मुस्लिम परिवार के हैं। सबसे ज्यादा टीकाकरण के विरोधी परिवार बिथरी चैनपुर और बाकरगंज में है।
डा. प्रशांत ने बताया कि विरोधी परिवार को टीका लगवाने के फायदे और न लगवाने के नुकसान बताए जा रहे हैं। अजीत प्रताप सिंह
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नियमित टीकाकरण करवाने पर 12 गंभीर बीमारियां नहीं होती हैं। इसमें टीबी, पोलियो, हेपेटाइटिस बी, डिप्थीरिया, टिटनेस, मीजल्स, काली खांसी, रूबेला, जेई (दिमागी बुखार), निमोनिया, डायरिया और इंफ्लूएंजा हैं। टीका लगने के बाद जीवनभर इन बीमारियों का खतरा टल जाता है।
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निजी अस्पतालों में यह टीके बेहद महंगे हैं। जबकि सरकारी अस्पतालों में निशुल्क लगते हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम यह टीका लगाने के लिए कई बार घर- घर भी जाती है। पिछले वर्ष तक टीकाकरण का विरोध करने वालों परिवारों की संख्या करीब चार हजार थी। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. प्रशांत रंजन ने बताया कि जागरूकता मुहिम और कार्यक्रमों के जरिए समझाने से अधिकतर लोग मान गए और बच्चों को टीका लगवा लिया है।
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विरोध करने वाले परिवारों को आशंका है कि टीका लगवाने से नपुंसकता जैसी समस्या न हो जाय। इस भ्रांति को दूर करने के लिए डाक्टरों और धर्मगुरुओं ने उनको समझाया है फिर भी सफलता नहीं मिली। टीका का विरोध करने वाले मुस्लिम परिवार के हैं। सबसे ज्यादा टीकाकरण के विरोधी परिवार बिथरी चैनपुर और बाकरगंज में है।
डा. प्रशांत ने बताया कि विरोधी परिवार को टीका लगवाने के फायदे और न लगवाने के नुकसान बताए जा रहे हैं। अजीत प्रताप सिंह