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सर्दी में जलभराव से कंपकंपीः निगम टीम सरकारी रकम खपाने में और अफसरों को फुर्सत नहीं

Fri, 04 Jan 2019 01:38 AM IST
pawan chandra पवन चंद्रा
Updated Fri, 04 Jan 2019 01:38 AM IST
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सर्दी में जलभराव से कंपकंपीः निगम टीम सरकारी रकम खपाने में और अफसरों को फुर्सत नहीं
बरेली। बारिश के दौरान संजयनगर, रेजीडेंसी गार्डन, नीलकंठ, सिटी हार्ट कॉलोनी समेत आसपास के पूरे इलाके को भारी जलभराव से जूझना पड़ा था। उस दौरान अगली बारिश से बचाने के लिए तमाम वादे और दावे किए गए थे। करीब छह महीने बीत भी चुके हैं। मगर जलभराव रोकने के इंतजाम करने बजाय वहां बढ़ाने के इंतजाम हो रहे हैं। निगम के कारिंदे बजट को खपाने के लिए मनमाने तरीके से निर्माण करने में लगे हैं और निगम के अफसर आंखें मूंदकर बैठे हैं, उन्हें मौका मुआयना करने की भी फुर्सत नहीं है।
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पिछले साल अगस्त में हुई मूसलाधार बारिश ने संजयनगर इलाके को जलमग्न कर दिया था। सड़क और गलियों में कई फुट तक पानी भर गया था। संपवेल जलमग्न हुआ तो रेजीडेंसी, नीलकंठ, सिटी हार्ट कॉलोनी में भी कई फुट पानी भर गया। मेयर उमेश गौतम ने ट्रैक्टर पर बैठकर निरीक्षण किया और पूर्व मेयर डॉ. आईएस तोमर पर खूब जुबानी तीर चलाए। निगम अफसरों ने भी अगली बार जल निकासी के पुख्ता इंतजाम करने के बड़े-बड़े दावे किए, जो अब धराशायी होते दिख रहे हैं। पहले से ही ओवरलोड संपवेल का लोड कम करने के बजाय उसे और बढ़ाने की तैयारी है। संजयनगर में बन रहे नाले का पानी भी संपवेल तक पहुंचाने की कोशिशें चल रही हैं, जबकि इस नाले को थोड़ा आगे बढ़ाकर बड़े नाले में मिलाया जा सकता है। इसके चलते यहां के लोग सर्दी में भी जलभराव से होने वाली समस्याओं को लेकर सोच रहे हैं।
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सड़क के दोनों ओर बने नाले जलनिकास विपरीत दिशा में
संजयनगर में जल निकासी के इंतजाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं। सड़क के दोनों ओर नाले बने हैं। एक बड़ा नाला है, जिसमें संपवेल से पानी आता है और दूसरा छोटा नाला है, जिसका पानी संपवेल में जाता है। संपवेल पर काम करने वाले कर्मचारियों की मानें तो यह विपरीत नाले ही असली समस्या हैं। पार्षद अवनेश कुमार ने बताया कि संजयनगर के जिस नाले से संपवेल में पानी जा रहा है, अगर उस नाले को सीधे बड़े नाले में जोड़कर ढलान को पीलीभीत बाईपास की ओर कर दिया जाए तो काफी समाधान हो जाएगा।
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छह मोटर लगीं, चलती सिर्फ दो
संपवेल पर मौजूद स्टाफ ने बताया कि यहां दो 40 केवीए, तीन 25 केवीए और 20 केवीए की एक मोटर लगी है। संपवेल से निकलने वाले पाइप का घनत्व कम होने के कारण एक बार में दो मोटरों का पानी ही निकल पाता है। जब तक जल निकासी के लिए पाइप नहीं बढ़ाए जाएंगे, छह मोटर लगी होने का कोई फायदा नहीं होगा।

बिल्डर ने मोटर लगाकर बढ़ाया लोड
पास में बनी कॉलोनी का पानी बाहर निकालने के लिए बिल्डर ने 25 केवीए का एक मोटर संपवेल के पास ही लगा दिया है, जो वहां से पानी बाहर निकालने में मदद करता है। ऐसा करके बिल्डर ने निगम की मदद करने के बजाय लोड और बढ़ा दिया है क्योंकि इस मोटर का पानी भी संपवेल के ही पाइप में जाता है।

मोटर फुंकने से बचाने के हो रहे इंतजाम
संपवेल पर कार्यरत निगमकर्मी एजाज ने बताया कि कई बार बिजली जाने के बाद उल्टे फेस आ जाते हैं। इसके कारण कभी मोटर फुंक जाता है तो कभी पानी उल्टा चलने लगता है। इस समस्या का समाधान करने के लिए ऑटोमेटिक स्टार्टर लगवाया जा रहा है, इससे उल्टे फेस आने की समस्या खत्म हो जाएगी और मोटर फुंकने से बच जाएंगे।


संजयनगर क्षेत्र में जलनिकासी के इंतजाम को लेकर काम चल रहा है। एक नया नाला संजयनगर में बनवाया जा रहा है। इसके अलावा जगतपुर समेत कई अन्य नाले बन रहे हैं, जिससे संपवेल का लोड कम हो जाएगा। - उमेश गौतम, मेयर
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