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सैन्य अफसरों ने लाल फाटक ओवरब्रिज का निर्माण देखा
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बरेली। लाल फाटक ओवरब्रिज निर्माण के लिए लीज पर ली जाने वाली सेना, मिलिट्री फार्म और कैंट बोर्ड की जमीन का शनिवार को अधिकारियों ने औचक निरीक्षण किया। उन्होंने वहां चल रहे निर्माण कार्य का जायजा लिया। निर्माण कार्य में अड़चन से स्थानीय निवासियों और राहगीरों की समस्याओं को भी नोट किया। उच्चाधिकारियों से मंथन के बाद सकारात्मक निर्णय लेने की संभावना जताई है।
रक्षा संपदा विभाग ने प्रशासन के लीज के प्रस्ताव पर अनौपचारिक सहमति जताते हुए संबंधित मामले पर सेना, कैंट और मिलिट्री फार्म के अफसरों से राय मांगी थी। शुक्रवार को पत्र मिलने के बाद सैन्य और कैंट बोर्ड के अधिकारियों ने डीईओ के साथ शनिवार पूर्वान्ह 11:30 बजे लाल फाटक ओवरब्रिज के निर्माण कार्य का जायजा लेने पहुंचे। कैं ट बोर्ड के एई आरके माहेश्वरी ने बताया कि मौके पर निर्माण कार्य देखा गया। साथ ही, लीज के प्रस्ताव के बाबत प्रशासन को दी जाने वाली जमीन का भी मुआयना किया। उन्होंने यातायात में आ रही समस्याओं को देखते हुए सेना की ओर से भी जनहित में सकारात्मक सहमति बनने की संभावना जताई है। बताया कि 30 वर्षों के लिए करीब चार करोड़ रुपये के प्रस्ताव को आगामी बोर्ड बैठक में रखा जाएगा। बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पास होने पर उसे पीडी लखनऊ को भेजा जाएगा। वहां से प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। लीज के प्रस्ताव पर आखिरी निर्णय रक्षा मंत्रालय ही लेगा।
पुल निर्माण में अड़चन से सैन्य अफसर भी परेशान
एडम कमांडेंट कर्नल पी. अमित ने बताया कि निर्माण कार्य प्रभावित होने से इस मार्ग से सेना को भी मूवमेंट में दिक्कत होती है, लेकिन सबसे ज्यादा दिक्कत पब्लिक को हो रही है। कहा, ओवरब्रिज निर्माण जल्द पूरा हो जाए तो यह सभी के लिए बेहतर रहेगा। जनहित को देखते हुए सकारात्मक निर्णय लिए जाने का आश्वासन दिया है। बताया कि लीज के प्रस्ताव पर आखिरी निर्णय रक्षा मंत्रालय का होगा। रूटीन निरीक्षण में लाल फाटक पर चल रही गतिविधियों को देखा गया।
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लीज पर जमीन लेने का निर्णय सही
कैंट बोर्ड के एई आरके माहेश्वरी के मुताबिक जमीन के बदले जमीन देने में लंबी कवायद चलती रहती। क्योंकि प्रशासन ने बभिया में जो जमीन दिखाई गई थी वह छावनी क्षेत्र से करीब करीब सवा चार किलोमीटर दूर होने से उसका उपयोग नहीं था। इसलिए जमीन को लेने से इंकार किया गया। वहीं, प्रशासन ने आस-पास जमीन देने में असमर्थता जताते हुए 30 वर्षों की लीज पर जमीन देने का प्रस्ताव भेजा है। रक्षा संपदा अधिकारी की ओर से प्रस्ताव पर विचार के लिए पत्र भेजा गया है। जिसके संबंध में निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार की गई है।
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रक्षा संपदा विभाग ने प्रशासन के लीज के प्रस्ताव पर अनौपचारिक सहमति जताते हुए संबंधित मामले पर सेना, कैंट और मिलिट्री फार्म के अफसरों से राय मांगी थी। शुक्रवार को पत्र मिलने के बाद सैन्य और कैंट बोर्ड के अधिकारियों ने डीईओ के साथ शनिवार पूर्वान्ह 11:30 बजे लाल फाटक ओवरब्रिज के निर्माण कार्य का जायजा लेने पहुंचे। कैं ट बोर्ड के एई आरके माहेश्वरी ने बताया कि मौके पर निर्माण कार्य देखा गया। साथ ही, लीज के प्रस्ताव के बाबत प्रशासन को दी जाने वाली जमीन का भी मुआयना किया। उन्होंने यातायात में आ रही समस्याओं को देखते हुए सेना की ओर से भी जनहित में सकारात्मक सहमति बनने की संभावना जताई है। बताया कि 30 वर्षों के लिए करीब चार करोड़ रुपये के प्रस्ताव को आगामी बोर्ड बैठक में रखा जाएगा। बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पास होने पर उसे पीडी लखनऊ को भेजा जाएगा। वहां से प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। लीज के प्रस्ताव पर आखिरी निर्णय रक्षा मंत्रालय ही लेगा।
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पुल निर्माण में अड़चन से सैन्य अफसर भी परेशान
एडम कमांडेंट कर्नल पी. अमित ने बताया कि निर्माण कार्य प्रभावित होने से इस मार्ग से सेना को भी मूवमेंट में दिक्कत होती है, लेकिन सबसे ज्यादा दिक्कत पब्लिक को हो रही है। कहा, ओवरब्रिज निर्माण जल्द पूरा हो जाए तो यह सभी के लिए बेहतर रहेगा। जनहित को देखते हुए सकारात्मक निर्णय लिए जाने का आश्वासन दिया है। बताया कि लीज के प्रस्ताव पर आखिरी निर्णय रक्षा मंत्रालय का होगा। रूटीन निरीक्षण में लाल फाटक पर चल रही गतिविधियों को देखा गया।
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लीज पर जमीन लेने का निर्णय सही
कैंट बोर्ड के एई आरके माहेश्वरी के मुताबिक जमीन के बदले जमीन देने में लंबी कवायद चलती रहती। क्योंकि प्रशासन ने बभिया में जो जमीन दिखाई गई थी वह छावनी क्षेत्र से करीब करीब सवा चार किलोमीटर दूर होने से उसका उपयोग नहीं था। इसलिए जमीन को लेने से इंकार किया गया। वहीं, प्रशासन ने आस-पास जमीन देने में असमर्थता जताते हुए 30 वर्षों की लीज पर जमीन देने का प्रस्ताव भेजा है। रक्षा संपदा अधिकारी की ओर से प्रस्ताव पर विचार के लिए पत्र भेजा गया है। जिसके संबंध में निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार की गई है।