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चुनाव की थकान मिटाने छुट्टी पर चले गए अफसर
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बरेली। मतदान के बाद तमाम अधिकारियों के अवकाश पर चले गए हैं। इससे दूसरे कई विभागों सहित कलक्ट्रेट में भी सरकारी कामकाज पर इसका असर दिखाई दे रहा है। फरियादी कलक्ट्रेट पहुंच रहे हैं लेकिन वहां अधिकारी ही न मिलने से वे अपनी शिकायतें नहीं बता पा रहे है। वे केवल बाबुओं के पास अपने प्रार्थना पत्र जमा करके वापस चल जा रहे हैं। ऐसे में तमाम पटल पर भी लंबित फाइलों का ढेर बढ़ रहा है।
23 अप्रैल को मतदान के बाद से ही अधिकारियों का थकान मिटाने के लिए छुट्टी पर जाने का सिलसिला शुरू हो गया था। सिटी मजिस्ट्रेट, एडीएम सिटी के साथ ही तीनों ही एसीएम सहित दूसरे कई अफसर एक-एक कर छुट्टी लेकर चले गए थे। इधर तहसील में भी कई स्टाफ ने अवकाश ले लिया था। जो अधिकारी या कर्मचारी आए भी, वो भी विभागीय कामों को लेकर सुस्ती दिखा कर रहे हैं। हालत यह है कि सोमवार को एक बंदी का पोस्टमार्टम के बाद उसका पंचायतनामा कराने के लिए मजिस्ट्रेट का आर्डर कराने के लिए भी एक पुलिस अफसर को कलक्ट्रेट में भटकना पड़ा। इसके अलावा सबसे ज्यादा परेशानी दूर-दराज से आने वाले फरियादियों को झेलना पड़ रहा है। भोजीपुरा के एक गांव से आए ग्रामीण ने बताया कि उसकी जमीन पर कब्जा करने की शिकायत करनी है। तुरंत कार्रवाई होनी है, लेकिन अधिकारी नहीं मिल रहे। बाद में वह डीएम दफ्तर में प्रार्थनापत्र एक बाबू को देकर चला गया। यही हाल कलक्ट्रेट से संबंधित दूसरे कामों का भी है। तमाम पटल के बाबुओं का कहना है कि एक साथ कई अधिकारियों के चले जाने से कई महत्वपूर्ण आर्डर कराने में विलंब हो रहा है।
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23 अप्रैल को मतदान के बाद से ही अधिकारियों का थकान मिटाने के लिए छुट्टी पर जाने का सिलसिला शुरू हो गया था। सिटी मजिस्ट्रेट, एडीएम सिटी के साथ ही तीनों ही एसीएम सहित दूसरे कई अफसर एक-एक कर छुट्टी लेकर चले गए थे। इधर तहसील में भी कई स्टाफ ने अवकाश ले लिया था। जो अधिकारी या कर्मचारी आए भी, वो भी विभागीय कामों को लेकर सुस्ती दिखा कर रहे हैं। हालत यह है कि सोमवार को एक बंदी का पोस्टमार्टम के बाद उसका पंचायतनामा कराने के लिए मजिस्ट्रेट का आर्डर कराने के लिए भी एक पुलिस अफसर को कलक्ट्रेट में भटकना पड़ा। इसके अलावा सबसे ज्यादा परेशानी दूर-दराज से आने वाले फरियादियों को झेलना पड़ रहा है। भोजीपुरा के एक गांव से आए ग्रामीण ने बताया कि उसकी जमीन पर कब्जा करने की शिकायत करनी है। तुरंत कार्रवाई होनी है, लेकिन अधिकारी नहीं मिल रहे। बाद में वह डीएम दफ्तर में प्रार्थनापत्र एक बाबू को देकर चला गया। यही हाल कलक्ट्रेट से संबंधित दूसरे कामों का भी है। तमाम पटल के बाबुओं का कहना है कि एक साथ कई अधिकारियों के चले जाने से कई महत्वपूर्ण आर्डर कराने में विलंब हो रहा है।
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