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पिता और पुत्र के हाथ रहेगी नवसंवत्सर की सत्ता
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बरेली। छह अप्रैल से नवसंवत्सर भारी राजनीतिक हलचल के साथ शुरू होेगा। ज्योतिष के विद्वानों के अनुसार नवसंवत्सर में इस बार ग्रहों की संसद में पुत्र शनि राजा और पिता सूर्य मंत्री होंगे। इस कारण नवसंवत्सर 2076 को परिधावी नाम से जाना जाएगा। ग्रहों का यह मेल राजनीतिक माहौल बेहद अनिश्चित बनाएगा। देश के कुछ भागों में प्राकृतिक आपदाएं होने की भी आशंका जताई गई है।
ज्योतिषाचार्य डॉ. सौरभ शंखधार के अनुसार नया संवत इस बार छह अप्रैल बदल रहा है। इसलिए वर्ष का राजपाट शनि के पास रहेगा। आमतौर पर मकर संक्रांति का पुण्य काल हर वर्ष 14 जनवरी और मेष संक्रांति का पुण्यकाल 14 अप्रैल को पड़ता है। प्रतिवर्ष 14 अप्रैल को जो भी दिन होता है, वही दिन वर्ष का मंत्री बनता है। ज्योतिषाचार्य नीरज शर्मा ने बताया कि नवसंवत्वर के प्रवेश के दौरान राजा शनि का वाहन भैंसा होगा। वर्ष के बीच वह वाहन बदलकर घोड़े पर भी सवार होंगे। दोनों ही वाहनों से शनि का आगमन अशुभ है। भैंसा वाहन होने से कहीं अतिवृष्टि तो कहीं सूखा पड़ेगा। पूर्व और दक्षिण के राज्यों में प्राकृतिक प्रकोप के संकेत हैं। घोड़ा वाहन होने पर राजसत्ता के लिए राजनीतिक गठजोड़ चुनौती बनेंगे। महंगाई बढ़ने से सत्ता विरोध की संभावना है। गुरु और शुक्र का समसप्तक और मंगल और शनि का षडाष्टक योग बनेगा जो अशुभ फलदायी है और महानगरों में प्रदूषण, पेयजल संकट, भूकंप, अग्निकांड, तूफान आदि के योग बनाएगा। हालांकि औद्योगिक क्रांति से रोजगार के अवसर बनेंगे। नवीन तकनीक शिक्षा में लागू हो सकती हैं।
59 वर्ष साल बाद पुनरावृत्ति
ज्योतिषाचार्य डॉ. शंखधार ने बताया कि इससे करीब 59 वर्ष पहले भी परिधावी नवसंवत्सर में शनि राजा और सूर्य मंत्री बने थे। परस्पर एकदूसरे के विरोधी पिता-पुत्र की इस राजसत्ता का देश पर काफी प्रभाव पड़ा था। तब ये प्रमुख घटनाएं हुई थीं।
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- चीन के खिलाफ भारत की ओर से युद्ध की तैयारी
- बंबई का गुजरात और महाराष्ट्र के बीच विभाजन
- चक्रवाती तूफान में 1600 लोगों की मौत की घटना
- नासिक में रूसी विमान मिग का उत्पादन शुरू हुआ
- भारत समेत 44 देशों के बीच शांति सम्मेलन हुआ
माना गया है सृष्टि उत्पत्ति का दिन
धर्म शास्त्रों के अनुसार चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि ही वह दिन है, जब जगत पिता ब्रह्म देव ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी। इसी दिन भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार लिया था। सतयुग का प्रारंभ भी इसी तिथि को हुआ था। इसी दिन राजा विक्रमादित्य ने शकों पर विजय प्राप्त कर विक्रम संवत का शुभारंभ किया था। यही वह कारण है कि सृष्टि रचना के दिन को अनादिकाल से नववर्ष के रूप में जाना हाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन दुनिया में पहला सूर्योदय हुआ था।
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ज्योतिषाचार्य डॉ. सौरभ शंखधार के अनुसार नया संवत इस बार छह अप्रैल बदल रहा है। इसलिए वर्ष का राजपाट शनि के पास रहेगा। आमतौर पर मकर संक्रांति का पुण्य काल हर वर्ष 14 जनवरी और मेष संक्रांति का पुण्यकाल 14 अप्रैल को पड़ता है। प्रतिवर्ष 14 अप्रैल को जो भी दिन होता है, वही दिन वर्ष का मंत्री बनता है। ज्योतिषाचार्य नीरज शर्मा ने बताया कि नवसंवत्वर के प्रवेश के दौरान राजा शनि का वाहन भैंसा होगा। वर्ष के बीच वह वाहन बदलकर घोड़े पर भी सवार होंगे। दोनों ही वाहनों से शनि का आगमन अशुभ है। भैंसा वाहन होने से कहीं अतिवृष्टि तो कहीं सूखा पड़ेगा। पूर्व और दक्षिण के राज्यों में प्राकृतिक प्रकोप के संकेत हैं। घोड़ा वाहन होने पर राजसत्ता के लिए राजनीतिक गठजोड़ चुनौती बनेंगे। महंगाई बढ़ने से सत्ता विरोध की संभावना है। गुरु और शुक्र का समसप्तक और मंगल और शनि का षडाष्टक योग बनेगा जो अशुभ फलदायी है और महानगरों में प्रदूषण, पेयजल संकट, भूकंप, अग्निकांड, तूफान आदि के योग बनाएगा। हालांकि औद्योगिक क्रांति से रोजगार के अवसर बनेंगे। नवीन तकनीक शिक्षा में लागू हो सकती हैं।
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59 वर्ष साल बाद पुनरावृत्ति
ज्योतिषाचार्य डॉ. शंखधार ने बताया कि इससे करीब 59 वर्ष पहले भी परिधावी नवसंवत्सर में शनि राजा और सूर्य मंत्री बने थे। परस्पर एकदूसरे के विरोधी पिता-पुत्र की इस राजसत्ता का देश पर काफी प्रभाव पड़ा था। तब ये प्रमुख घटनाएं हुई थीं।
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- बंबई का गुजरात और महाराष्ट्र के बीच विभाजन
- चक्रवाती तूफान में 1600 लोगों की मौत की घटना
- नासिक में रूसी विमान मिग का उत्पादन शुरू हुआ
- भारत समेत 44 देशों के बीच शांति सम्मेलन हुआ
माना गया है सृष्टि उत्पत्ति का दिन
धर्म शास्त्रों के अनुसार चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि ही वह दिन है, जब जगत पिता ब्रह्म देव ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी। इसी दिन भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार लिया था। सतयुग का प्रारंभ भी इसी तिथि को हुआ था। इसी दिन राजा विक्रमादित्य ने शकों पर विजय प्राप्त कर विक्रम संवत का शुभारंभ किया था। यही वह कारण है कि सृष्टि रचना के दिन को अनादिकाल से नववर्ष के रूप में जाना हाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन दुनिया में पहला सूर्योदय हुआ था।