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‘धर्म खतरे में पड़े तो धैर्य त्यागकर ‘स्ट्राइक’ जरूरी’

Thu, 28 Mar 2019 01:36 AM IST
pawan chandra पवन चंद्रा
Updated Thu, 28 Mar 2019 01:36 AM IST
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‘धर्म खतरे में पड़े तो धैर्य त्यागकर ‘स्ट्राइक’ जरूरी’
‘धर्म खतरे में पड़े तो धैर्य त्यागकर ‘स्ट्राइक’ जरूरी’ - फोटो : अमर उजाला, बरेली
बरेली। ‘जिसमें धैर्य और साहस का वास होता है, वही विजय प्राप्त करता है। द्वापर में महाभारत और त्रेता में रामायण इसकी सटीक व्याख्या करते हैं। हाल ही में हुई स्ट्राइक भी धैर्य और अभिनंदन की वीरता का प्रतीक है। धैर्य भी एक सीमा तक ही रखना चाहिए। जब धर्म खतरे में पड़े तो धैर्य को त्यागकर ‘स्ट्राइक’ जरूरी है।’ कत्था फैक्टरी में श्रीराम कथा के पांचवें दिन संत मोरारी बापू ने इसी तरह वीरता और धैर्य की व्याख्या की। उन्होंने बताया कि भगवान धैर्यवान हैं, लेकिन जब उनके भक्त का अपमान होता है तब वह क्रोधित हो जाते हैं। महाभारत में जब दुर्योधन ने श्रीकृष्ण को अपमानित करने का अपराध किया तो प्रभु शांत रहे, लेकिन उसने जब द्रौपदी का मान-मर्दन किया तो उसके साथ-साथ मूकदर्शक बनकर देखने वाले भीष्म, द्रोणाचार्य और कृपाचार्य समेत अन्य सभी को कुरुक्षेत्र में दंड का भागी बनना पड़ा। बापू ने कहा कि न्याय करने वाले व्यक्ति को अपराध और उसकी गंभीरता पर ध्यान देना चाहिए। इसी आधार पर श्रीराम ने सुग्रीव के भाई बालि का छिपकर वध किया। क्योंकि उसने अपने भाई की पत्नी को बलपूर्वक बंदी बनाकर रखा था जो शास्त्रों के अनुसार अक्षम्य अपराध है।
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भूमि और स्त्री की रक्षा जरूरी
मोरारी बापू ने कहा कि वीर पुरुष का भूमि और स्त्री की रक्षा के लिए आगे आना जरूरी है। महाभारत होने में इन्हीं दोनों की अहम भूमिका रही। स्त्री संस्कृति, समाज, मान-सम्मान और समृद्धि की प्रतीक है। भूमि मनुष्यों का आश्रय स्थल है। बिना भूमि के विकास का निर्धारण कठिन है, इसलिए इन दोनोें की सब प्रकार से रक्षा के लिए सदैव सतर्क रहना चाहिए। उन्होंने माया को छोड़कर आचरण में रहने का सुझाव दिया। बापू ने बताया कि ईष्ट आराधना से अनिष्ट कटते हैं।
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श्रीराम नाम के जप से बढ़ते हैं पुण्य
बापू ने राम नाम जप का महत्व भी बताया। बोले, जितनी बार राम नाम का जप होता है, पुण्य उतने ही बढ़ जाते हैं। जो व्यक्ति श्रीराम का नाम और लोगों तक पहुंचाते हैं वे भी पुण्य के भागी बनते हैं। उन्होंने कहा कि साधक को मंत्र, मूर्ति और माला कभी नहीं बदलनी चाहिए। ‘विश्व भरन पोषण कर जोई, ताकर नाम भरत अस होई। जाके सुमिरन से रिपु नासा, नाम शत्रुघ्न वेद प्रकासा’ चौपाई के माध्यम से उन्होंने श्रीराम नाम का महत्व समझाया।
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