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दंगा पीड़ित सिखों को मुआवजा न मिलने का मलाल
Updated Fri, 18 Aug 2017 02:04 AM IST
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बरेली।
देश के कई शहरों में 1984 में सिख दंगों से जुड़े करीब 240 मामले बंद करने की जांच के आदेश सुप्रीम कोर्ट ने दिए हैं। इसके लिए दो पूर्व जजों की निगरानी कमेटी बनाई गई है, जो तीन महीने में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। कोर्ट के इस आदेश से शहर के दंगा पीड़ित सिखों में मुआवजा मिलने की कुछ उम्मीद जागी है।
1984 दंगा पीड़ित समिति के संयोजक और बरेली गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के संरक्षक सुरजीत सिंह ने बताया कि 2007 में सरकार की तरफ से एक नोटिफिकेशन आया था कि 1984 के सिख दंगा पीड़ितों को कम से कम डेढ़ लाख और जिनके यहां किसी की मौत हो गई है उनको पांच लाख तक का मुआवजा दिया जाएगा। उस समय यहां पर 82 पीड़ितों ने आवेदन किया था। अंतिम रूप से 78 लोगों की सूची तैयार की गई थी। उसमें तहसीलदार स्तर से जांच कराई गई थी। जांच में सुबूत मांगे। तीन बार जांच होने के बाद 2014 में केवल 14 लोगों को 30 हजार से 48 हजार तक का मुआवजा दिया गया। शेष 64 लोगों के मामले आज भी लंबित हैं उन्हें नहीं पता कि उनके बारे में क्या किया जा रहा है या उन्हें मुआवजा मिलेगा कि नहीं। बताया, पीड़ितों ने प्रधानमंत्री, गृह मंत्रालय आदि तक पत्र भेजे, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अब उनका कहना है कि सरकार जब कह चुकी है तो मुआवजा दे, नहीं तो साफ मना कर दे। हम कोई भीख नहीं मांग रहे हैं।
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देश के कई शहरों में 1984 में सिख दंगों से जुड़े करीब 240 मामले बंद करने की जांच के आदेश सुप्रीम कोर्ट ने दिए हैं। इसके लिए दो पूर्व जजों की निगरानी कमेटी बनाई गई है, जो तीन महीने में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। कोर्ट के इस आदेश से शहर के दंगा पीड़ित सिखों में मुआवजा मिलने की कुछ उम्मीद जागी है।
1984 दंगा पीड़ित समिति के संयोजक और बरेली गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के संरक्षक सुरजीत सिंह ने बताया कि 2007 में सरकार की तरफ से एक नोटिफिकेशन आया था कि 1984 के सिख दंगा पीड़ितों को कम से कम डेढ़ लाख और जिनके यहां किसी की मौत हो गई है उनको पांच लाख तक का मुआवजा दिया जाएगा। उस समय यहां पर 82 पीड़ितों ने आवेदन किया था। अंतिम रूप से 78 लोगों की सूची तैयार की गई थी। उसमें तहसीलदार स्तर से जांच कराई गई थी। जांच में सुबूत मांगे। तीन बार जांच होने के बाद 2014 में केवल 14 लोगों को 30 हजार से 48 हजार तक का मुआवजा दिया गया। शेष 64 लोगों के मामले आज भी लंबित हैं उन्हें नहीं पता कि उनके बारे में क्या किया जा रहा है या उन्हें मुआवजा मिलेगा कि नहीं। बताया, पीड़ितों ने प्रधानमंत्री, गृह मंत्रालय आदि तक पत्र भेजे, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अब उनका कहना है कि सरकार जब कह चुकी है तो मुआवजा दे, नहीं तो साफ मना कर दे। हम कोई भीख नहीं मांग रहे हैं।
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