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गुस्से में छोड़ी दहलीज, लौटने में गुजर गए छह साल
Updated Sat, 29 Jul 2017 01:43 AM IST
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गुस्से में छोड़ी दहलीज, लौटने में गुजर गए छह साल
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
बरेली।
ईद के दिन पति की पिटाई के खफा होकर घर से निकली समीना को छह साल बाद परिवार मिल पाया। पिता को उसके जिंदा होने का यकीन नहीं था, जबकि मां कहती थी मेरी बेटी जिंदा है। समीना बिहार के भोजपुर जिले के थाना उधवंत नगर के बिल्लौर गांव की रहने वाली है। शुक्रवार शाम पांच बजे समीना को ममता आश्रम से उसे माता-पिता और भाई के साथ विदा करते समय सभी की आंखें भर आईं। समीना के मिलने से परिवार में खुशियां मनाई जा रही हैं।
बिल्लौर गांव का मुजीब आलम ट्रक ड्राइवर हैं। समीना उनकी पत्नी है और चार बच्चों की मां है। 30 अगस्त 2011 को ईद के दिन उनके घर में खुशियों का माहौल था। किसी बात से नाराज होकर समीना ने अपनी बेटी खुशबू की पिटाई कर दी। इससे गुस्सा होकर मुजीब ने उन्हें पीट दिया। समीना का बेटा मुराद (22), मुईन (17), महबूब आलम (13) नमाज के लिए घर से निकल गए। बेटी खुशबू भी सहेलियों के घर चली गई। इसी बीच गुस्से में समीना घर से निकल आई। इसके बाद उसका पता नहीं लगा। थाने में गुमशुदगी दर्ज कराने के बाद मुजीब ने समीना की तलाश की, लेकिन पता नहीं चला। समीना को याद नहीं वह किस तरह मेरठ पहुंच गई। वहां से एक जून को उसे ममता आश्रम हरुनगला भेज दिया गया। यहां स्पेशल एजूकेटर प्रीति अग्रवाल ने उसका मानसिक चिकित्सालय में इलाज कराया। पढ़ना-लिखना भी सिखा दिया। इससे समीना सामान्य होती चली गई। इस दिनों वह ठीक है, लेकिन दवा चल रही है।
मनोसमर्पण मनोसमाजिक सेवा समिति के अध्यक्ष परामर्श मनोवैज्ञानिक शैलेश कुमार शर्मा ने ममता आश्रम की क्लीनिकल साइकोलोजिस्ट भारती कश्यप की मदद से समीना की काउंलसिंग कर उसके घर का पता लगाया। फिर समीना के इलाके के थाने को फोन कर परिवार को सूचना दिलाई। समीना के जिंदा होने की सूचना मिलते ही मां जैनब खातून और पिता मोहम्मद नईम खुशी से झूम उठे। समीना के बच्चों में भी खुशी की लहर दौड़ पड़ी। शुक्रवार को समीना के माता-पिता, भाई और भांजा ममता आश्रम पहुंचे। ममता आश्रम की अधीक्षिका माधुरी यादव ने बताया कि कागजी खानापूर्ति के बाद समीना को परिवार वालों के सुपुर्द कर दिया गया है।
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छह माह से नहीं मिला मानदेय
बरेली। ममता आश्रम में 22 कर्मचारी संविदा पर तैनात हैं, लेकिन उन्हें छह महीने से मानदेय नहीं मिला है। अधिकारियों से भी कई बार कर्मचारी मानदेय दिलाने की मांग कर चुके हैं, लेकिन किसी ने एक नहीं सुनी है। उधर, नियुक्ति होने के बाद से अभी तक किसी कर्मचारी का मानदेय नहीं बढ़ा है। इसे लेकर आश्रम के कर्मचारियों में आक्रोश है।
डॉक्टर इलाज को नहीं आते हैं
ममता आश्रम में इलाज के लिए समय से डॉक्टर नहीं पहुंचते हैं, जबकि हर महीने डॉक्टरों की ममता आश्रम में विजिट होनी चाहिए। कई बार अधिकारियों से कहने के बाद भी छह महीने से डॉक्टर ममता आश्रम नहीं आए हैं। इसकी वजह से यहां रहने वाली संवासिनियों को इलाज के लिए मानसिक चिकित्सालय ले जाना पड़ता है।
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ईद के दिन पति की पिटाई के खफा होकर घर से निकली समीना को छह साल बाद परिवार मिल पाया। पिता को उसके जिंदा होने का यकीन नहीं था, जबकि मां कहती थी मेरी बेटी जिंदा है। समीना बिहार के भोजपुर जिले के थाना उधवंत नगर के बिल्लौर गांव की रहने वाली है। शुक्रवार शाम पांच बजे समीना को ममता आश्रम से उसे माता-पिता और भाई के साथ विदा करते समय सभी की आंखें भर आईं। समीना के मिलने से परिवार में खुशियां मनाई जा रही हैं।
बिल्लौर गांव का मुजीब आलम ट्रक ड्राइवर हैं। समीना उनकी पत्नी है और चार बच्चों की मां है। 30 अगस्त 2011 को ईद के दिन उनके घर में खुशियों का माहौल था। किसी बात से नाराज होकर समीना ने अपनी बेटी खुशबू की पिटाई कर दी। इससे गुस्सा होकर मुजीब ने उन्हें पीट दिया। समीना का बेटा मुराद (22), मुईन (17), महबूब आलम (13) नमाज के लिए घर से निकल गए। बेटी खुशबू भी सहेलियों के घर चली गई। इसी बीच गुस्से में समीना घर से निकल आई। इसके बाद उसका पता नहीं लगा। थाने में गुमशुदगी दर्ज कराने के बाद मुजीब ने समीना की तलाश की, लेकिन पता नहीं चला। समीना को याद नहीं वह किस तरह मेरठ पहुंच गई। वहां से एक जून को उसे ममता आश्रम हरुनगला भेज दिया गया। यहां स्पेशल एजूकेटर प्रीति अग्रवाल ने उसका मानसिक चिकित्सालय में इलाज कराया। पढ़ना-लिखना भी सिखा दिया। इससे समीना सामान्य होती चली गई। इस दिनों वह ठीक है, लेकिन दवा चल रही है।
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मनोसमर्पण मनोसमाजिक सेवा समिति के अध्यक्ष परामर्श मनोवैज्ञानिक शैलेश कुमार शर्मा ने ममता आश्रम की क्लीनिकल साइकोलोजिस्ट भारती कश्यप की मदद से समीना की काउंलसिंग कर उसके घर का पता लगाया। फिर समीना के इलाके के थाने को फोन कर परिवार को सूचना दिलाई। समीना के जिंदा होने की सूचना मिलते ही मां जैनब खातून और पिता मोहम्मद नईम खुशी से झूम उठे। समीना के बच्चों में भी खुशी की लहर दौड़ पड़ी। शुक्रवार को समीना के माता-पिता, भाई और भांजा ममता आश्रम पहुंचे। ममता आश्रम की अधीक्षिका माधुरी यादव ने बताया कि कागजी खानापूर्ति के बाद समीना को परिवार वालों के सुपुर्द कर दिया गया है।
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छह माह से नहीं मिला मानदेय
बरेली। ममता आश्रम में 22 कर्मचारी संविदा पर तैनात हैं, लेकिन उन्हें छह महीने से मानदेय नहीं मिला है। अधिकारियों से भी कई बार कर्मचारी मानदेय दिलाने की मांग कर चुके हैं, लेकिन किसी ने एक नहीं सुनी है। उधर, नियुक्ति होने के बाद से अभी तक किसी कर्मचारी का मानदेय नहीं बढ़ा है। इसे लेकर आश्रम के कर्मचारियों में आक्रोश है।
डॉक्टर इलाज को नहीं आते हैं
ममता आश्रम में इलाज के लिए समय से डॉक्टर नहीं पहुंचते हैं, जबकि हर महीने डॉक्टरों की ममता आश्रम में विजिट होनी चाहिए। कई बार अधिकारियों से कहने के बाद भी छह महीने से डॉक्टर ममता आश्रम नहीं आए हैं। इसकी वजह से यहां रहने वाली संवासिनियों को इलाज के लिए मानसिक चिकित्सालय ले जाना पड़ता है।