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Bareilly News: 40 फीसदी लोग नहीं लगवा रहे चौथी डोज, भारी पड़ सकता है रैबीज का हमला
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- दो वर्ष में रैबीज की चपेट में आने से नौ लोगों की हुई मौत, छह वर्ष बाद भी उभर सकते हैं लक्षण
बरेली। कुत्ते के काटने के बाद एंटी रैबीज वैक्सीन (एआरवी) नहीं लगवाने से बीते सप्ताह एक महिला की मौत हो गई। यही अनदेखी बीते वर्ष भी सात लोगों ने की थी। वे भी रैबीज की चपेट में आकर जान गंवा बैठे। विशेषज्ञों के मुताबिक अगर रैबीज संक्रमित पशु ने काटा है तो एआरवी की चारों डोज लगवानी चाहिए। एक भी डोज छूटी तो भविष्य में रैबीज का खतरा रहता है। इसके बाद भी 40 फीसदी लोग इसके प्रति बेपरवाह हैं।
राष्ट्रीय रैबीज नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. मीसम अब्बास के मुताबिक कुत्ते, बंदर, सियार, बिल्ली, चूहे-छछूंदर या अन्य किसी जानवर के काटने पर एआरवी की चारों डोज लगना जरूरी है। तीन डोज लगवाने के बाद चौथी को हल्के में न लें। रैबीज की चपेट में आने के बाद मेडिकल साइंस में इसका कोई इलाज नहीं है। इसके लक्षण तभी दिखते हैं, जब वायरस मस्तिष्क तक पहुंच जाता है। छह वर्ष बाद भी इसके लक्षण उभर सकते हैं।
पहली डोज के दौरान कार्ड बनाने के साथ दी जाती है पूरी जानकारी
तीन सौ बेड अस्पताल में संचालित मंडलीय रैबीज क्लीनिक के प्रभारी डॉ. वैभव शुक्ला के मुताबिक एआरवी लगवाने पहुंचे प्रत्येक पीड़ित को टीकाकरण पूरा करने का सुझाव दिया जाता है। कार्ड भी देते हैं, जिसमें टीकाकरण का पूरा विवरण होता है। पहली डोज तत्काल, दूसरी तीन दिन में, तीसरी सातवें चौथी 28वें दिन लगती है। जून में 1,602, जुलाई में 1,525, अगस्त में 1,637 लोगों ने एआरवी की पहली डोज लगवाई। क्रमवार 855, 977, 693 लोगों को चौथी डोज लगी। सीएचसी पर भी यही स्थिति रहती है। गंभीर रूप से जख्मी लोगों को जिला अस्पताल की इमरजेंसी में एंटी रैबीज सीरम लगाया जाता है। अधिक जानकारी के लिए 18001805145 पर कॉल कर सकते हैं। ब्यूरो
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बचाव के उपाय
- पालतू पशुओं का नियमित टीकाकरण कराएं।
- पशुओं की खरोंच, चाटने से हुए घाव की अनदेखी न करें।
- घाव को खुला रखें, टांके न लगवाएं।
- घाव को धोकर आयोडीन, स्प्रिट, एंटीसेप्टिक लगाएं।
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बरेली। कुत्ते के काटने के बाद एंटी रैबीज वैक्सीन (एआरवी) नहीं लगवाने से बीते सप्ताह एक महिला की मौत हो गई। यही अनदेखी बीते वर्ष भी सात लोगों ने की थी। वे भी रैबीज की चपेट में आकर जान गंवा बैठे। विशेषज्ञों के मुताबिक अगर रैबीज संक्रमित पशु ने काटा है तो एआरवी की चारों डोज लगवानी चाहिए। एक भी डोज छूटी तो भविष्य में रैबीज का खतरा रहता है। इसके बाद भी 40 फीसदी लोग इसके प्रति बेपरवाह हैं।
राष्ट्रीय रैबीज नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. मीसम अब्बास के मुताबिक कुत्ते, बंदर, सियार, बिल्ली, चूहे-छछूंदर या अन्य किसी जानवर के काटने पर एआरवी की चारों डोज लगना जरूरी है। तीन डोज लगवाने के बाद चौथी को हल्के में न लें। रैबीज की चपेट में आने के बाद मेडिकल साइंस में इसका कोई इलाज नहीं है। इसके लक्षण तभी दिखते हैं, जब वायरस मस्तिष्क तक पहुंच जाता है। छह वर्ष बाद भी इसके लक्षण उभर सकते हैं।
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पहली डोज के दौरान कार्ड बनाने के साथ दी जाती है पूरी जानकारी
तीन सौ बेड अस्पताल में संचालित मंडलीय रैबीज क्लीनिक के प्रभारी डॉ. वैभव शुक्ला के मुताबिक एआरवी लगवाने पहुंचे प्रत्येक पीड़ित को टीकाकरण पूरा करने का सुझाव दिया जाता है। कार्ड भी देते हैं, जिसमें टीकाकरण का पूरा विवरण होता है। पहली डोज तत्काल, दूसरी तीन दिन में, तीसरी सातवें चौथी 28वें दिन लगती है। जून में 1,602, जुलाई में 1,525, अगस्त में 1,637 लोगों ने एआरवी की पहली डोज लगवाई। क्रमवार 855, 977, 693 लोगों को चौथी डोज लगी। सीएचसी पर भी यही स्थिति रहती है। गंभीर रूप से जख्मी लोगों को जिला अस्पताल की इमरजेंसी में एंटी रैबीज सीरम लगाया जाता है। अधिक जानकारी के लिए 18001805145 पर कॉल कर सकते हैं। ब्यूरो
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बचाव के उपाय
- पालतू पशुओं का नियमित टीकाकरण कराएं।
- पशुओं की खरोंच, चाटने से हुए घाव की अनदेखी न करें।
- घाव को खुला रखें, टांके न लगवाएं।
- घाव को धोकर आयोडीन, स्प्रिट, एंटीसेप्टिक लगाएं।