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ड्रेस निर्माता पर छापा, 50 लाख रुपये का माल सीज
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बरेली। फीस और किताबों के साथ स्कूल यूनिफार्म के नाम पर भी अभिभावकों की जेबें ढीली कराने में जुटे हुए हैं। मंगलवार को इसका खुलासा तब हुआ जब वाणिज्य कर विभाग की टीम ने वीरसावरकर नगर में स्कूलों की यूनिफार्म बनाने वाले एक कारखाने पर छापा मारा। नैनीताल-पीलीभीत समेत कई जिलों के तमाम स्कूलों को यूनिफार्म की सप्लाई करने वाले इस कारखाने की ओर से सरकारी खजाने में एक भी रुपये का टैक्स जमा नहीं किया जा रहा था। वाणिज्य कर टीम ने कारखाने में मिला करीब 50 लाख रुपये कीमत का तैयार माल सीज कर दिया। कारखाना मालिक ने बिलों में आईजीएसटी वसूल किए जाने का तर्क दिया मगर टीम ने उसे खारिज कर दिया।
वाणिज्य कर विभाग के अधिकारियों को सूचना मिली थी कि आसपास के कई जिलों के स्कूल अपने यहां पढ़ने वाले बच्चों के लिए बरेली के कई कारखानों में यूनिफार्म बनवाते हैं और इन कारखानों का कुल सालाना टर्न ओवर करोड़ों में है। चूंकि इस मद में वाणिज्य कर विभाग में कोई टैक्स जमा नहीं हो रहा था, लिहाजा इन कारखानों पर कार्रवाई का फैसला लिया गया। एडिशनल कमिश्नर एसपी सिंह ने कारखानों पर छापा मारने के लिए टीमें बना दीं। एक टीम ने मंगलवार दोपहर वीर सावरकर नगर में विद्यार्थी ड्रेसेज के नाम से चल रहे कारखाने में छापा मारा जहां करीब तीन दर्जन टेलरिंग मशीन और पांच ऑपरेटिंग मशीनों पर स्कूलों की यूनिफार्म बनाने का काम चलता मिला।
छानबीन के दौरान कारखाने में यूनिफार्म के निर्माण, कपड़े की खरीद और बिक्री से संबंधित कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। टीम के मुताबिक कारखाने का पूरा कारोबार अवैध निकला, कागजों की छानबीन में कई जिलों से करोड़ों रुपये का कारोबार करने की पुष्टि हुई। टीम ने मौके पर लगभग 4500 मीटर कपड़े का स्टॉक और बीस हजार तैयार यूनिफॉर्म पकड़ीं। इन पर बरेली और आसपास के कई जिलों के तमाम स्कूलों के मोनोग्राम लगे हुए थे। कारखाने से स्कूलों को यूनिफार्म सप्लाई के थोक कारोबार की पुष्टि के बाद टीम ने टैक्स अदायगी के प्रमाण मांगे जो कारोबारी नहीं दे पाया। इस पर टीम नेे करीब 50 लाख रुपये का स्टाक सीज कर दिया। टीम के मुताबिक प्रारंभिक जांच में एक करोड़ रुपये की टैक्स चोरी सामने आई है। विभाग अब यहां यूनिफार्म बनवाने वाले स्कूलों के बारे में भी जानकारी जुटाएगा। छापे की इस कार्रवाई में नीरज श्रीवास्तव, राहुल मिश्रा, प्रवेश कुमार, संजय भटनागर आदि अफसरों ने हिस्सा लिया।
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वाणिज्य कर विभाग के अधिकारियों को सूचना मिली थी कि आसपास के कई जिलों के स्कूल अपने यहां पढ़ने वाले बच्चों के लिए बरेली के कई कारखानों में यूनिफार्म बनवाते हैं और इन कारखानों का कुल सालाना टर्न ओवर करोड़ों में है। चूंकि इस मद में वाणिज्य कर विभाग में कोई टैक्स जमा नहीं हो रहा था, लिहाजा इन कारखानों पर कार्रवाई का फैसला लिया गया। एडिशनल कमिश्नर एसपी सिंह ने कारखानों पर छापा मारने के लिए टीमें बना दीं। एक टीम ने मंगलवार दोपहर वीर सावरकर नगर में विद्यार्थी ड्रेसेज के नाम से चल रहे कारखाने में छापा मारा जहां करीब तीन दर्जन टेलरिंग मशीन और पांच ऑपरेटिंग मशीनों पर स्कूलों की यूनिफार्म बनाने का काम चलता मिला।
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छानबीन के दौरान कारखाने में यूनिफार्म के निर्माण, कपड़े की खरीद और बिक्री से संबंधित कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। टीम के मुताबिक कारखाने का पूरा कारोबार अवैध निकला, कागजों की छानबीन में कई जिलों से करोड़ों रुपये का कारोबार करने की पुष्टि हुई। टीम ने मौके पर लगभग 4500 मीटर कपड़े का स्टॉक और बीस हजार तैयार यूनिफॉर्म पकड़ीं। इन पर बरेली और आसपास के कई जिलों के तमाम स्कूलों के मोनोग्राम लगे हुए थे। कारखाने से स्कूलों को यूनिफार्म सप्लाई के थोक कारोबार की पुष्टि के बाद टीम ने टैक्स अदायगी के प्रमाण मांगे जो कारोबारी नहीं दे पाया। इस पर टीम नेे करीब 50 लाख रुपये का स्टाक सीज कर दिया। टीम के मुताबिक प्रारंभिक जांच में एक करोड़ रुपये की टैक्स चोरी सामने आई है। विभाग अब यहां यूनिफार्म बनवाने वाले स्कूलों के बारे में भी जानकारी जुटाएगा। छापे की इस कार्रवाई में नीरज श्रीवास्तव, राहुल मिश्रा, प्रवेश कुमार, संजय भटनागर आदि अफसरों ने हिस्सा लिया।
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