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आईएमए के 30 फीसदी डॉक्टर खतरे में.. मरीज कितने पता नहीं
Thu, 28 May 2020 01:48 AM IST
बरेली ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
Published by: बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 28 May 2020 01:48 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : PTI
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किसी को नहीं बताया क्वारंटीन होने का मिला है निर्देश, स्वास्थ्य विभाग ने भी नहीं की निगरानी
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डॉक्टरों के परिवारों पर भी छाया संकट, हालांकि उन्हें क्वारंटीन होने के निर्देश नहीं
बरेली। वैसे तो रेडियोलॉजिस्ट की लापरवाही की वजह से आईएमए से संबद्ध सभी डॉक्टर क्वारंटीन हो गए हैं, लेकिन उन 30 फीसदी डॉक्टरों को ज्यादा खतरे की आशंका जताई जा रही है जो रेडियोलॉजिस्ट के नजदीकी थे। उन मरीजों की गिनती का अंदाजा लगाना मुश्किल है जो इस बीच रेडियोलॉजिस्ट के अल्ट्रासाउंड सेंटर में जांच कराने पहुंचे या फिर जिन्होंने उनके संपर्क में आए डॉक्टरों से इलाज कराया।
खुद आईएमए से संबद्ध कई डॉक्टर कह रहे हैं कि संक्रमित पाए गए रेडियोलॉजिस्ट ने स्वास्थ्य विभाग की ओर से क्वारंटीन होने के निर्देश मिलने पर भी मामला छिपाए रखा। किसी को इसकी भनक तक नहीं लगने दी। रेडियोलॉजिस्ट ने आईएमए की बैठकों में भी हिस्सा नहीं लिया। पिछले दिनों डॉ. रितेश के बीमार होने पर उन्हें देखने अस्पताल भी गए थे। मंगलवार देर रात जब डॉक्टरों को संक्रमित रेडियोलॉजिस्ट के इस गैरजिम्मेदाराना रवैये का पता लगा तो उन्होंने उन्हें फोन करके या मेसेज भेजकर नाराजगी जताई। हालांकि आईएमए अध्यक्ष डॉ. राजेश अग्रवाल ने ऐसे किसी मामले की जानकारी होने से इनकार किया है।
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आईएएमए अध्यक्ष ने बताया कि संक्रमित रेडियोलॉजिस्ट निर्देशों के बावजूद क्वारंटीन नहीं हुए थे। उन्होंने कई बैठकों में भी हिस्सा लिया था, लिहाजा उनमें संक्रमण की पुष्टि होने के बाद उनके संपर्क में आए आईएमए के करीब 30 फीसदी डॉक्टर होम क्वारंटीन हो गए हैं। हालांकि फिलहाल स्वास्थ्य विभाग से लेकर आईएमए तक इस बात की चर्चा से कतरा रहा है कि संक्रमित रेडियोलॉजिस्ट के गैरजिम्मेदाराना रवैये की वजह से कितने मरीज और खुद डॉक्टरों के कितने परिवारों खतरे का साया मंडरा रहा है।
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और तो किसी को नहीं बताया मगर अपने घरवालों से दूरी बनाए रखी
रामपुर बाग के संक्रमित रेडियोलॉजिस्ट ने संक्रमण का खतरा फैलाने में खुदगर्जी भी दिखाई। उन्होंने आईएमए बिरादरी और मरीजों को तो इसकी भनक नहीं लगने दी कि उसने संक्रमित महिला की जांच की है, लेकिन जिला सर्विलांस अधिकारी एसीएमओ डॉ. गौतम ने बताया कि संक्रमित रेडियोलॉजिस्ट के परिवार वालों को इसकी जानकारी थी। यही नहीं रेडियोलॉजिस्ट ने इसके बाद अपने परिवार से दूरी भी बनाए रखी थी। एसीएमओ ने बताया कि रेडियोलॉजिस्ट के परिवार वालों को भी अब होम क्वारंटीन होने के निर्देश दिए गए हैं। तीन दिन बाद उनकी पत्नी और बेटी का सैंपल लेकर जांच कराई जाएगी। हालांकि इस बीच निगरानी भी रखी जाएगी ताकि दोनों घर से बाहर न निकल पाएं।
रामपुर गार्डन के हर घर के सदस्यों की होगी जांच
आईसीएमआर की गाइडलाइन के मुताबिक, अल्ट्रासाउंड सेंटर को सील कर करीब 250 मीटर एरिया को हॉटस्पॉट बना दिया गया है। प्रतिबंधित क्षेत्र में लोगों के प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। मगर, संक्रमित डॉक्टर क्वारंटीन के नियमों का उल्लंघन कर घूमते रहे। ऐसे में रामपुर गार्डन के प्रत्येक घर का स्वास्थ्य विभाग की टीम स्क्रीनिंग करेंगी। संदिग्ध संक्रमित लोगों के सैंपल लेकर जांच भी कराई जाएगी।
हॉटस्पॉट में जारी रहेंगी स्वास्थ्य सुविधाएं
एसीएमओ डॉ. गौतम के मुताबिक रामपुर बाग के हॉटस्पॉट बनने के बावजूद आईसीएमआर की गाइड लाइन के अनुसार वहां अस्पताल, क्लिनिक, पैथोलॉजी समेत सभी स्वास्थ्य सेवाएं जारी रहेंगी। इस दायरे में आने वाले अस्पतालों को इन्फेक्शन प्रिवेन्शन प्रोटोकॉल के नियमों का पूरा पालन करना होगा ताकि मरीज से डॉक्टरों तक में संक्रमण की आशंका न रहे।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कहा.. कई अस्पताल ही खतरे से बेपरवाह
बरेली। एक डॉक्टर की वजह से शहर में कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ने की खबर के दौरान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कई अस्पतालों में इन्फेक्शन प्रिवेंशन प्रोटोकॉल का पालन न करने पर सवाल उठाया है। बोर्ड के अफसरों के मुताबिक स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रशिक्षण के साथ सारे नियमों की जानकारी देने के बाद भी उनकी अनदेखी कर मरीजों की जान को खतरे में डाला जा रहा है। अस्पताल अपने बायो वेस्ट का निस्तारण तक ठीक तरह नहीं कर रहे हैं।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी प्रेमचंद के मुताबिक अस्पतालों का लगातार निरीक्षण कर देखा जा रहा है कि उनमें प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन हो रहा है या नहीं। उन्होंने बताया कि कोरोना का भयावह खतरा होने के बावजूद अब तक करीब दस अस्पतालों में निर्देशों और नियमों की अनदेखी करके ओपीडी चलाने के मामले पकड़े गए हैं। इसके साथ कई अस्पतालों का बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण में भी कमियां पाए जाने के बाद नोटिस जारी कर जवाबतलब किया गया है। एक क्लिनिक के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया जा चुका है। क्षेत्रीय अधिकारी के मुताबिक फिलहाल जहां से भी शिकायतें मिल रही हैं, वहां जांच की जा रही है। अस्पतालों का निरीक्षण कर रही टीम में शामिल स्वासथ्य विभाग के अफसर को भी कॉल की गई लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।
अईएमए अध्यक्ष बोले.. संक्रमण की आशंका नहीं, फिर भी होंगे क्वारंटीन
आईएमए अध्यक्ष डॉ. राजेश अग्रवाल ने कहा है कि रामपुर बाग में संक्रमित मिले रेडियोलॉजिस्ट भले ही क्वारंटीन न हुए हों लेकिन उनकी जानकारी के मुताबिक अब तक उनके संपर्क में आने वाले डॉक्टर मास्क लगाकर और सामाजिक दूरी का पालन करते हुए ही उनसे मिले हैं। लिहाजा काफी हद तक उम्मीद है कि उनके साथ बातचीत करने वाले डॉक्टर और दूसरे लोग संक्रमित नहीं हुए होंगे। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद संक्रमित रेडियोलॉजिस्ट के साथ मौजूद रहने की वजह से एहतियातन सभी डॉक्टर और दूसरे लोग क्वारंटीन होंगे। आईएमए अध्यक्ष ने कहा कि जिले में करीब साढ़े तीन सौ से ज्यादा अस्पताल, क्लिनिक, पैथोलॉजी, अल्ट्रासाउंड और दूसरे सेंटर हैं। इसमें चार सौ से ज्यादा डॉक्टर इन्फेक्शन प्रिवेन्शन प्रोटोकॉल के तहत प्रशिक्षण में शामिल हुए थे। उन्होंने दावा किया कि सभी डॉक्टर प्रोटोकॉल का पालन कर रहे हैं।
क्वारंटीन होंगे डॉक्टर पर मरीजों को नहीं होगी दिक्कत
आईएमए अध्यक्ष ने यह भी कहा कि आईएमए में करीब आठ सौ से ज्यादा डॉक्टर हैं। संक्रमित रेडियोलॉजिस्ट के संपर्क में अधिकतम 30 फीसद ही डॉक्टर आए होंगे। ऐसी स्थिति में भी करीब 70 फीसद डॉक्टर अपनी सेवाएं जारी रखेंगे, क्योंकि वह किसी के संपर्क में नहीं आए हैं। इसलिए मरीजों को इलाज मिलने में कोई दिक्कत नहीं होगी।
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डॉक्टरों के परिवारों पर भी छाया संकट, हालांकि उन्हें क्वारंटीन होने के निर्देश नहीं बरेली। वैसे तो रेडियोलॉजिस्ट की लापरवाही की वजह से आईएमए से संबद्ध सभी डॉक्टर क्वारंटीन हो गए हैं, लेकिन उन 30 फीसदी डॉक्टरों को ज्यादा खतरे की आशंका जताई जा रही है जो रेडियोलॉजिस्ट के नजदीकी थे। उन मरीजों की गिनती का अंदाजा लगाना मुश्किल है जो इस बीच रेडियोलॉजिस्ट के अल्ट्रासाउंड सेंटर में जांच कराने पहुंचे या फिर जिन्होंने उनके संपर्क में आए डॉक्टरों से इलाज कराया।
खुद आईएमए से संबद्ध कई डॉक्टर कह रहे हैं कि संक्रमित पाए गए रेडियोलॉजिस्ट ने स्वास्थ्य विभाग की ओर से क्वारंटीन होने के निर्देश मिलने पर भी मामला छिपाए रखा। किसी को इसकी भनक तक नहीं लगने दी। रेडियोलॉजिस्ट ने आईएमए की बैठकों में भी हिस्सा नहीं लिया। पिछले दिनों डॉ. रितेश के बीमार होने पर उन्हें देखने अस्पताल भी गए थे। मंगलवार देर रात जब डॉक्टरों को संक्रमित रेडियोलॉजिस्ट के इस गैरजिम्मेदाराना रवैये का पता लगा तो उन्होंने उन्हें फोन करके या मेसेज भेजकर नाराजगी जताई। हालांकि आईएमए अध्यक्ष डॉ. राजेश अग्रवाल ने ऐसे किसी मामले की जानकारी होने से इनकार किया है।
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आईएएमए अध्यक्ष ने बताया कि संक्रमित रेडियोलॉजिस्ट निर्देशों के बावजूद क्वारंटीन नहीं हुए थे। उन्होंने कई बैठकों में भी हिस्सा लिया था, लिहाजा उनमें संक्रमण की पुष्टि होने के बाद उनके संपर्क में आए आईएमए के करीब 30 फीसदी डॉक्टर होम क्वारंटीन हो गए हैं। हालांकि फिलहाल स्वास्थ्य विभाग से लेकर आईएमए तक इस बात की चर्चा से कतरा रहा है कि संक्रमित रेडियोलॉजिस्ट के गैरजिम्मेदाराना रवैये की वजह से कितने मरीज और खुद डॉक्टरों के कितने परिवारों खतरे का साया मंडरा रहा है।
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और तो किसी को नहीं बताया मगर अपने घरवालों से दूरी बनाए रखी
रामपुर बाग के संक्रमित रेडियोलॉजिस्ट ने संक्रमण का खतरा फैलाने में खुदगर्जी भी दिखाई। उन्होंने आईएमए बिरादरी और मरीजों को तो इसकी भनक नहीं लगने दी कि उसने संक्रमित महिला की जांच की है, लेकिन जिला सर्विलांस अधिकारी एसीएमओ डॉ. गौतम ने बताया कि संक्रमित रेडियोलॉजिस्ट के परिवार वालों को इसकी जानकारी थी। यही नहीं रेडियोलॉजिस्ट ने इसके बाद अपने परिवार से दूरी भी बनाए रखी थी। एसीएमओ ने बताया कि रेडियोलॉजिस्ट के परिवार वालों को भी अब होम क्वारंटीन होने के निर्देश दिए गए हैं। तीन दिन बाद उनकी पत्नी और बेटी का सैंपल लेकर जांच कराई जाएगी। हालांकि इस बीच निगरानी भी रखी जाएगी ताकि दोनों घर से बाहर न निकल पाएं।रामपुर गार्डन के हर घर के सदस्यों की होगी जांच
आईसीएमआर की गाइडलाइन के मुताबिक, अल्ट्रासाउंड सेंटर को सील कर करीब 250 मीटर एरिया को हॉटस्पॉट बना दिया गया है। प्रतिबंधित क्षेत्र में लोगों के प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। मगर, संक्रमित डॉक्टर क्वारंटीन के नियमों का उल्लंघन कर घूमते रहे। ऐसे में रामपुर गार्डन के प्रत्येक घर का स्वास्थ्य विभाग की टीम स्क्रीनिंग करेंगी। संदिग्ध संक्रमित लोगों के सैंपल लेकर जांच भी कराई जाएगी।हॉटस्पॉट में जारी रहेंगी स्वास्थ्य सुविधाएं
एसीएमओ डॉ. गौतम के मुताबिक रामपुर बाग के हॉटस्पॉट बनने के बावजूद आईसीएमआर की गाइड लाइन के अनुसार वहां अस्पताल, क्लिनिक, पैथोलॉजी समेत सभी स्वास्थ्य सेवाएं जारी रहेंगी। इस दायरे में आने वाले अस्पतालों को इन्फेक्शन प्रिवेन्शन प्रोटोकॉल के नियमों का पूरा पालन करना होगा ताकि मरीज से डॉक्टरों तक में संक्रमण की आशंका न रहे।प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कहा.. कई अस्पताल ही खतरे से बेपरवाह
बरेली। एक डॉक्टर की वजह से शहर में कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ने की खबर के दौरान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कई अस्पतालों में इन्फेक्शन प्रिवेंशन प्रोटोकॉल का पालन न करने पर सवाल उठाया है। बोर्ड के अफसरों के मुताबिक स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रशिक्षण के साथ सारे नियमों की जानकारी देने के बाद भी उनकी अनदेखी कर मरीजों की जान को खतरे में डाला जा रहा है। अस्पताल अपने बायो वेस्ट का निस्तारण तक ठीक तरह नहीं कर रहे हैं।प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी प्रेमचंद के मुताबिक अस्पतालों का लगातार निरीक्षण कर देखा जा रहा है कि उनमें प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन हो रहा है या नहीं। उन्होंने बताया कि कोरोना का भयावह खतरा होने के बावजूद अब तक करीब दस अस्पतालों में निर्देशों और नियमों की अनदेखी करके ओपीडी चलाने के मामले पकड़े गए हैं। इसके साथ कई अस्पतालों का बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण में भी कमियां पाए जाने के बाद नोटिस जारी कर जवाबतलब किया गया है। एक क्लिनिक के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया जा चुका है। क्षेत्रीय अधिकारी के मुताबिक फिलहाल जहां से भी शिकायतें मिल रही हैं, वहां जांच की जा रही है। अस्पतालों का निरीक्षण कर रही टीम में शामिल स्वासथ्य विभाग के अफसर को भी कॉल की गई लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।