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Bareilly News: चार महीने में 25 लाख खर्च... फिर भी कुत्ते बेकाबू

Thu, 14 Aug 2025 02:56 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 14 Aug 2025 02:56 AM IST
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25 lakhs spent in four months... yet the dogs are out of control
बरेली। नगर निगम ने चार महीने में कुत्तों को पकड़ने पर 25 लाख रुपये खर्च कर दिए। इसके बाद भी ये बेकाबू हैं और बच्चों से लेकर बड़ों तक को जख्म दे रहे हैं। सदन से लेकर सड़क तक पार्षद नगर निगम के अभियान को कागजी बता चुके हैं।
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नगर क्षेत्र में कुत्तों को पकड़कर उन्हें वैक्सीन लगवाने और नसबंदी कराने की जिम्मेदारी एक निजी फर्म के पास है। इसके लिए नगर निगम फर्म को प्रति कुत्ता 917 रुपये का भुगतान करता है। दावा है कि अप्रैल 2025 से 31 जुलाई 2025 तक 2700 कुत्ते पकड़े गए हैं। इन पर 24 लाख 75 हजार 900 रुपये व्यय किए गए। फर्म को इसी दर पर दिसंबर 2025 तक कुत्ते पकड़ने हैं लेकिन इस अभियान से पार्षद और शहर के तमाम लोग संतुष्ट नहीं हैं। गली-मोहल्लों में जब कुत्तों के झुंड दिखते हैं तो लोग यही कहते हैं कि अभियान कागजी है। खामियाजा शहर के लोग भुगत रहे हैं। नगर निगम के सदन में भी यह मुद्दा गूंज चुका है। ब्यूरो
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हर महीने तीन हजार लोगों को जख्मी कर रहे कुत्ते
शहर से लेकर गांव तक हर महीने कुत्ते तीन हजार से अधिक लोगों को जख्म दे रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में एंटी रैबीज वैक्सीन (एआरवी) के आंकड़े इसकी पुष्टि कर रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, एक दिन में 400 लोगों को एआरवी लगती है। इसमें करीब 100 लोग ऐसे होते हैं जो नए होते हैं। इसी हिसाब से यह माना जा रहा है कि 24 घंटे में 100 लोगों को कुत्ते काटते हैं।
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निजी एजेंसी की दो टीमें हर रोज कुत्ते पकड़ती हैंं। कुत्तों को बधिया करने के लिए नगर निगम नए एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर को जल्द ही संचालित कराएगा। तब तक लोगों से यही आग्रह है कि अगर कहीं ऐसे कुत्ते हैं जिनका वैक्सीनेशन न हीं हुआ हो तो उसके बारे में नगर निगम के टोल फ्री नंबर 1533 पर कॉल करें।

-डॉ. नैन सिंह, उप नगर स्वास्थ्य अधिकारी
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पार्षदों बयां की जमीनी हकीकत

मैंने नगर निगम में कुत्ते पकड़ने के लिए तो कई बार कहा पर कोई असर नहीं हुआ। आए दिन लोगों को कुत्ते काटते हैं। लोग अब मासूम बच्चों को अकेले घर से बाहर नहीं निकलने देते। - अजय रत्नाकर, कटरा चांद खां, पार्षद




मैंने तो नगर आयुक्त और महापौर से कहा कि आम लोग पैदल और बाइक से चलते हैं, जिन्हें कुत्ते दौड़ा लेते हैं। अभियान ऐसा नहीं है कि राहत मिले। मैं तो इस मामले को सदन से लेकर कार्यकारिणी तक में उठा चुका हूं।
-हरीशंकर लोधी, पार्षद, फाल्तूनगंज
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