{"_id":"5c305c07bdec2256af3f5883","slug":"22-psychopaths-free-after-intervention-of-the-court-in-budaun","type":"story","status":"publish","title_hn":"बदायूं: न्यायालय के दखल के बाद मुक्त कराए गए दरगाह पर जंजीरों से बंधे 22 मनोरोगी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बदायूं: न्यायालय के दखल के बाद मुक्त कराए गए दरगाह पर जंजीरों से बंधे 22 मनोरोगी
Sat, 05 Jan 2019 12:55 PM IST
पवन चंद्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बदायूं
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बदायूं
Published by: पवन चंद्रा
Updated Sat, 05 Jan 2019 12:55 PM IST
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बदायूं स्थित बड़े सरकार दरगाह पर रूहानी इलाज के नाम पर मानसिक रोगियों को जंजीरों से बांधकर रखने पर उच्चतम न्यायालय की नाराजगी के बाद प्रशासन ने दरगाह पर बंधे लगभग 22 मनोरोगियों को छुड़वाकर उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार ने आज यहां बताया कि उच्चतम न्यायालय ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा है कि रूहानी इलाज के नाम पर लोगों को जंजीर में बांधा जाना नृशंस और अमानवीय है। शुक्रवार रात इस मामले को लेकर प्रशासन तथा पुलिस की टीमों ने दरगाह पहुंचकर वहां के पीरजादा से मुलाकात की और जंजीरों में बांध कर रखे गए 22 से ज्यादा मानसिक रोगियों को मुक्त कराया। उन्हें उनके परिजनों के हवाले कर दिया गया है।
उपजिलाधिकारी सदर पारस नाथ मौर्य ने बताया कि बड़े सरकार की दरगाह पर लोग मानसिक रोगों के इलाज के लिए आते हैं। लोगों की मान्यता है कि यहाँ पर लोगों को बुरी प्रेतात्माओं से छुटकारा मिलता है। यहां मरीज लेकर आने वाले लोग दरगाह के निकट बने आश्रय स्थल पर मौजूद एक महिला और एक पुरुष की निगरानी में रोगी को छोड़कर चले जाते हैं। यहां रूहानी इलाज के नाम पर रोगियों को बेड़ियों और जंजीरों में बांधकर रखा जाता है ताकि रोगी कहीं भाग ना सके या किसी पर हमला न कर दे।
विज्ञापन
मालूम हो कि उच्चतम न्यायालय ने इस मामले से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए गत गुरुवार को कहा था कि मानसिक रोगियों को जंजीर में बांधकर रखने की इजाजत नहीं दी जा सकती। न्यायमूर्ति ए.के. सीकरी और न्यायमूर्ति एस. अब्दुल नजीर की पीठ ने कहा था कि मानसिक रोगियों को जंजीर में बांधकर रखना जीवन और व्यक्तिगत आजादी से सम्बन्धित संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है।
विज्ञापन
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार ने आज यहां बताया कि उच्चतम न्यायालय ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा है कि रूहानी इलाज के नाम पर लोगों को जंजीर में बांधा जाना नृशंस और अमानवीय है। शुक्रवार रात इस मामले को लेकर प्रशासन तथा पुलिस की टीमों ने दरगाह पहुंचकर वहां के पीरजादा से मुलाकात की और जंजीरों में बांध कर रखे गए 22 से ज्यादा मानसिक रोगियों को मुक्त कराया। उन्हें उनके परिजनों के हवाले कर दिया गया है।
विज्ञापन
उपजिलाधिकारी सदर पारस नाथ मौर्य ने बताया कि बड़े सरकार की दरगाह पर लोग मानसिक रोगों के इलाज के लिए आते हैं। लोगों की मान्यता है कि यहाँ पर लोगों को बुरी प्रेतात्माओं से छुटकारा मिलता है। यहां मरीज लेकर आने वाले लोग दरगाह के निकट बने आश्रय स्थल पर मौजूद एक महिला और एक पुरुष की निगरानी में रोगी को छोड़कर चले जाते हैं। यहां रूहानी इलाज के नाम पर रोगियों को बेड़ियों और जंजीरों में बांधकर रखा जाता है ताकि रोगी कहीं भाग ना सके या किसी पर हमला न कर दे।
विज्ञापन
मालूम हो कि उच्चतम न्यायालय ने इस मामले से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए गत गुरुवार को कहा था कि मानसिक रोगियों को जंजीर में बांधकर रखने की इजाजत नहीं दी जा सकती। न्यायमूर्ति ए.के. सीकरी और न्यायमूर्ति एस. अब्दुल नजीर की पीठ ने कहा था कि मानसिक रोगियों को जंजीर में बांधकर रखना जीवन और व्यक्तिगत आजादी से सम्बन्धित संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है।