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औरतों के मस्जिद में जाने पर पाबंदी नहीं
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बरेली। पूना के एक मुस्लिम परिवार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करते हुए शिकायत की गई थी कि मस्जिद में नमाज पढ़ने से लोग रोक रहें हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस भेज कर जवाब मांगा है। इसमें सिर्फ औरतों के मस्जिद में जाने से रोक वाली बात नहीं है।
इस मामले पर तंजीम उलमा इस्लाम के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि मस्जिद में औरतों के जाने पर पाबंदी नहीं है। पैगंबरे इस्लाम के दौर में औरतें मस्जिद में नमाज पढ़ने जाती थीं। कुछ शिकायतें मिलने पर हजरत उमर फारूख के दौरे खिलाफत में औरतों को मस्जिद में नमाज पढ़ने से रोक दिया गया। उन्होंने कहा कि जिसने भी सुप्रीम कोर्ट में इस किस्म की दरख्वास्त दी है वह सियासी मकसद के लिए भी हो सकती है।
मौलाना ने कहा कि जिन दो मुस्लिम परिवारों का नाम दिया गया है उनकी मजहबी हैसियत और उनका पृष्ठभूमि समझने की जरूरत है। यह अंदेशा जताया है कि यह दरख्वास्त सिर्फ इस लिए दी गई है ताकि तीन तलाक के बाद एक नया मुद्दा खड़ा हो जाए और लोगों का जहन भटक जाए। उन्होंने केंद्र सरकार से कहा है कि यह खालिस शरई मजहबी मुद्दा है। इस लिए उलमा से राय लेकर ही सुप्रीम कोर्ट को जवाब दिया जाना चाहिए।
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इस मामले पर तंजीम उलमा इस्लाम के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि मस्जिद में औरतों के जाने पर पाबंदी नहीं है। पैगंबरे इस्लाम के दौर में औरतें मस्जिद में नमाज पढ़ने जाती थीं। कुछ शिकायतें मिलने पर हजरत उमर फारूख के दौरे खिलाफत में औरतों को मस्जिद में नमाज पढ़ने से रोक दिया गया। उन्होंने कहा कि जिसने भी सुप्रीम कोर्ट में इस किस्म की दरख्वास्त दी है वह सियासी मकसद के लिए भी हो सकती है।
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मौलाना ने कहा कि जिन दो मुस्लिम परिवारों का नाम दिया गया है उनकी मजहबी हैसियत और उनका पृष्ठभूमि समझने की जरूरत है। यह अंदेशा जताया है कि यह दरख्वास्त सिर्फ इस लिए दी गई है ताकि तीन तलाक के बाद एक नया मुद्दा खड़ा हो जाए और लोगों का जहन भटक जाए। उन्होंने केंद्र सरकार से कहा है कि यह खालिस शरई मजहबी मुद्दा है। इस लिए उलमा से राय लेकर ही सुप्रीम कोर्ट को जवाब दिया जाना चाहिए।
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