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अवैध खनन कारोबार में ‘नेताजी’ भी थे पाताराम के पार्टनर

Sun, 20 Jan 2019 01:54 AM IST
pawan chandra पवन चंद्रा
Updated Sun, 20 Jan 2019 01:54 AM IST
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अवैध खनन कारोबार में ‘नेताजी’ भी थे पाताराम के पार्टनर
बरेली। हिस्ट्रीशीटर पाताराम के अवैध खनन के कारोबार में ‘नेताजी’ भी बराबर के पार्टनर थे। पाताराम खनन से रोजाना होने वाली वसूली में से आधा हिस्सा ‘नेताजी’ की पत्नी यानी भाभी जी और उनके छोटे भाई को पहुंचाता था। ‘नेताजी’ के भाई रामगंगा किनारे के गांवों से होने वाले खनन से होने वाली आमदनी का हिसाब-किताब रखते थे। इसमें हर माह करोड़ों का खेल था।
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रामगंगा के किनारे करीब डेढ़ दर्जन गांवों में प्रतिदिन शाम सात बजे से सुबह छह बजे तक अवैध खनन का बड़ा कारोबार चलता है। माफिया नदी के किनारे से रेत और मिट्टी का अनधिकृत तरीके से खनन करके उसे बुग्गी-तांगा, ट्राली-ट्रैक्टर, डंपर आदि में लाकर शहर में बेचते हैं। सूत्र बताते हैं कि हिस्ट्रीशीटर पाताराम खनन करने वाले हर माफिया से प्रति बुग्गी या ट्रैक्टर ट्राली 100 से 250 रुपये तक वसूलता था। कैंट टोल से रोजाना गुजरने वाले खनन वाहनों से हिस्ट्रीशीटर के गुर्गे वसूली करते थे। पूरे दिन में खनन से जो भी पैसा इकट्ठा होता था, उसका आधा हिस्सा ‘नेताजी’ को उनके भाई या भाभी के माध्यम से पहुंचता था। ‘नेताजी’ के भाई खनन से रोजाना होने वाली आमदनी का हिसाब-किताब रखते थे। ‘नेताजी’ भी करोड़ों की आमदनी के चलते पाताराम को पुलिस की गिरफ्तारी से बचाते थे।
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जमीन विवाद में भी कूद गया था पाताराम
हिस्ट्रीशीटर पाताराम का खनन कारोबार तो बेरोकटोक चल रहा था। मगर, कैंट में लालफाटक रेलवे क्रासिंग से आगे वाले गांवों में बिकने वाली जमीनों में भी पाताराम का दखल बढ़ गया था। राजनीतिक संरक्षण के चलते पाताराम ने महंगी जमीनों के विवाद में भी दखल देना शुरू कर दिया था। लाल फाटक के आगे एक गांव में कुछ दिन पहले दुकानों की बिक्री के विवाद में दो पक्षों में समझौता कराया गया था। उस विवाद में 50 लाख से ज्यादा की डील हुई थी। पाताराम को ‘नेताजी’ के सजातीय होने का भी फायदा मिला।
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