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धर्मदत्त अस्पताल वाली जमीन पर शुरू हुई राजनीति
Updated Sun, 27 May 2018 02:55 AM IST
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बरेली।
धर्मदत्त अस्पताल वाली जमीन पर एक बार फिर राजनीति शुरू हो गई है। नगर विधायक डॉ. अरुण कुमार की पैरवी के बाद नगर निगम इस मामले को ठंडे बस्ते में डालकर बैठ गया था, मगर दो पार्षदों की चिट्ठी ने फिर से मामला गरमा दिया है। पार्षदों ने निगम को पत्र लिखकर जमीन को कब्जा मुक्त कराने की मांग की है।
प्रेमनगर में नगर निगम की जमीन पर धर्मदत्त सिटी अस्पताल और राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय बना है। डॉ. आईएस तोमर के कार्यकाल में नगर निगम ने यहां कुछ जमीन अपने कब्जे में ले ली थी, उस पर अब स्टोर आदि बना हुआ है। बाकी जमीन अब भी धर्मदत्त सिटी अस्पताल और राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय के कब्जे में है। अब इस मामले को लेकर पार्षद विकास शर्मा और सतीश कातिब ने नगर आयुक्त राजेश श्रीवास्तव को पत्र लिखकर जमीन को कब्जा मुक्त कराने के लिए कहा है। जब मामले की पड़ताल की गई तो सामने आया कि इस मामले में 25 जुलाई, 2017 को नगर विधायक डॉ. अरुण कुमार ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय की पैरवी की थी। उनका कहना था कि जमीन के विवाद के कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। चर्चा है कि इसके बाद ही नगर निगम प्रशासन शांत होकर बैठ गया। मगर पार्षदों की चिट्ठी मिलने के बाद मामला एक बार फिर तूल पकड़ गया है।
मामला बहुत पुराना है, मुझे ध्यान नही है। ऐसा संभव है कि आयुर्वेदिक कॉलेज के लोग आए हों तो हमने पत्र कार्रवाई के लिए मुख्यमंत्री को भेज दिया हो। मैंने व्यक्तिगत रूप से इस पर कुछ नहीं लिखा है। - डॉ. अरुण कुमार, नगर विधायक
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इस मामले में पार्षदों द्वारा भेजे पत्र देख नहीं पाया हूं। मामले की जांच कराकर नियमानुसार कार्रवाई कराई जाएगी। - राजेश श्रीवास्तव, नगर आयुक्त
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धर्मदत्त अस्पताल वाली जमीन पर एक बार फिर राजनीति शुरू हो गई है। नगर विधायक डॉ. अरुण कुमार की पैरवी के बाद नगर निगम इस मामले को ठंडे बस्ते में डालकर बैठ गया था, मगर दो पार्षदों की चिट्ठी ने फिर से मामला गरमा दिया है। पार्षदों ने निगम को पत्र लिखकर जमीन को कब्जा मुक्त कराने की मांग की है।
प्रेमनगर में नगर निगम की जमीन पर धर्मदत्त सिटी अस्पताल और राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय बना है। डॉ. आईएस तोमर के कार्यकाल में नगर निगम ने यहां कुछ जमीन अपने कब्जे में ले ली थी, उस पर अब स्टोर आदि बना हुआ है। बाकी जमीन अब भी धर्मदत्त सिटी अस्पताल और राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय के कब्जे में है। अब इस मामले को लेकर पार्षद विकास शर्मा और सतीश कातिब ने नगर आयुक्त राजेश श्रीवास्तव को पत्र लिखकर जमीन को कब्जा मुक्त कराने के लिए कहा है। जब मामले की पड़ताल की गई तो सामने आया कि इस मामले में 25 जुलाई, 2017 को नगर विधायक डॉ. अरुण कुमार ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय की पैरवी की थी। उनका कहना था कि जमीन के विवाद के कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। चर्चा है कि इसके बाद ही नगर निगम प्रशासन शांत होकर बैठ गया। मगर पार्षदों की चिट्ठी मिलने के बाद मामला एक बार फिर तूल पकड़ गया है।
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मामला बहुत पुराना है, मुझे ध्यान नही है। ऐसा संभव है कि आयुर्वेदिक कॉलेज के लोग आए हों तो हमने पत्र कार्रवाई के लिए मुख्यमंत्री को भेज दिया हो। मैंने व्यक्तिगत रूप से इस पर कुछ नहीं लिखा है। - डॉ. अरुण कुमार, नगर विधायक
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इस मामले में पार्षदों द्वारा भेजे पत्र देख नहीं पाया हूं। मामले की जांच कराकर नियमानुसार कार्रवाई कराई जाएगी। - राजेश श्रीवास्तव, नगर आयुक्त