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‘कामनाओं की कैद से मुक्ति दिलाता है धर्म’
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बरेली। हरि मंदिर में चल रही कथा के चौथे दिन बुधवार को कथाव्यास गौरदास ने कामनाओं का त्याग कर प्रभु भक्ति में लीन रहने का सुझाव दिया। कहा, मृत्युलोक में मनुष्य कामनाओं के जाल में कैद है। जिसके भीतर ही वह खुशियां तलाश कर रहा है। जबकि मनुष्य की उड़ान कामना की नहीं मुक्ति के लिए होनी चाहिए। इसके लिए मनुष्य को धर्म से जुड़ना होगा। क्योंकि धर्म का निर्वहन ही मुक्ति मार्ग है।
उन्होंने बताया कि राक्षसों के पास अपार संपदा थी, बाहुबल था फिर भी धर्म और अधर्म की लड़ाई में वे परास्त हुए। क्योंकि धर्म का निर्वहन करने के लिए ही पृथ्वी पर मानव उत्पत्ति हुई है। राक्षसों ने धर्म को त्यागकर अधर्म का मार्ग अपनाया। जब-जब उन्होंने धर्म का विध्वंस किया तब-तब ईश्वर ने मृत्युलोक में जन्म लेकर उनका संहार किया है। यहां अनिल गुप्ता, मिथलेश गुप्ता, विक्की गुप्ता, नरेंद्र गुप्ता, रवि छाबड़ा, जितिन दुआ आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने बताया कि राक्षसों के पास अपार संपदा थी, बाहुबल था फिर भी धर्म और अधर्म की लड़ाई में वे परास्त हुए। क्योंकि धर्म का निर्वहन करने के लिए ही पृथ्वी पर मानव उत्पत्ति हुई है। राक्षसों ने धर्म को त्यागकर अधर्म का मार्ग अपनाया। जब-जब उन्होंने धर्म का विध्वंस किया तब-तब ईश्वर ने मृत्युलोक में जन्म लेकर उनका संहार किया है। यहां अनिल गुप्ता, मिथलेश गुप्ता, विक्की गुप्ता, नरेंद्र गुप्ता, रवि छाबड़ा, जितिन दुआ आदि मौजूद रहे।
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