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जीएसटी के इंतजार में अटक गए बड़े प्रोजेक्ट
Updated Tue, 27 Jun 2017 09:07 PM IST
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बरेली। गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) एक जुलाई से लागू होने जा रहा है। इसमें किस पर कितना टैक्स घटेगा और कितना बढ़ेगा। इसे लेकर रियल स्टेट कारोबारी, कांट्रेक्टर्स, व्यापारी, उद्यमी से लेकर सरकारी संस्थाएं नगर निगम, बीडीए और पीडब्ल्यूडी के बड़े प्रोजेक्ट अटक गए हैं। सड़कों को गड्ढामुक्त करने के लिए ठेकेदार टेंडर डालने से कतरा रहे हैं। बीडीए के सबसे बड़े प्रोजेक्ट रामगंगा नगर आवासीय योजना पर भी ब्रेक लग गया है।
नगर निगम :
शहर के 70 वार्डों में सीसी गलियों और नाले-नालियों के निर्माण के लिए 33 करोड़ के काम स्वीकृत किए गए थे। पहले टेंडर प्रक्रिया में देरी हुई। फिर नोटबंदी की वजह से काम नहीं हो पाए। इसके बाद विधानसभा चुनाव और अब जीएसटी। शहर में पांच सौ से ज्यादा सीसी मार्ग, नाले नालियों का निर्माण कार्य लटका है। जीएसटी में निर्माण कार्यों पर कितना टैक्स लगेगा। इसको लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। ठेकेदार इसे लेकर असमंजस में हैं और टेंडर नहीं आ रहे हैं। अधिकांश टेंडर एक जुलाई के बाद ही पड़ने के आसार हैं।
बीडीए :
सबसे बड़े रामगंगा नगर में बीडीए ने सड़क, सीवर और नाला निर्माण के 40 करोड़ से ज्यादा के काम स्वीकृत कर रखे हैं। किसानों की जमीन अधिग्रहण के चलते प्लाट आवंटन पर पहले ही विवाद चल रहा है। 70 कमरों के समाजवादी आवास बनाने के बाद बीडीए ने यहां निर्माण कार्य एक तरह ठप कर रखे हैं। अवस्थापना निधि में स्वीकृत 20 करोड़ से ज्यादा के काम भी नहीं हो पा रहे हैं। बीडीए ने प्रथम चरण में जिन कामों के टेंडर आमंत्रित किए थे, उसमें बहुत से कामों के मानक से कम टेंडर आए। जिन कामों के टेंडर पहले हो चुके हैं, ठेकेदार जीएसटी लागू होने के बाद टैक्स कम या ज्यादा चुकाने की आशंका में शुरू नहीं कर रहे।
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पीडब्ल्यूडी :
पीडब्ल्यूडी के प्रांतीय खंड, निर्माण खंड और निर्माण खंड भवन ने दो सौ से ज्यादा जर्जर मार्गों को सामान्य और विशेष मरम्मत के लिए चिह्नित कर रखा है। अभी विभाग के इंजीनियर सरकार की प्राथमिकता वाला काम सड़कों को गड्ढामुक्त कराने में लगे हैं। गड्ढामुक्त करने के लिए पीडब्ल्यूडी को एक-एक सड़क के दो से तीन बार टेंडर प्रकाशित कराने पड़े। जब टेंडर नहीं आए तो बहुत से काम विभागीय स्तर पर करवाए गए। जीएसटी में टैक्स बढ़ने की आशंका से सामान्य और विशेष मरम्मत के लिए चयनित दो सौ से ज्यादा सड़कों पर काम नहीं शुरू हो पा रहा।
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नगर निगम :
शहर के 70 वार्डों में सीसी गलियों और नाले-नालियों के निर्माण के लिए 33 करोड़ के काम स्वीकृत किए गए थे। पहले टेंडर प्रक्रिया में देरी हुई। फिर नोटबंदी की वजह से काम नहीं हो पाए। इसके बाद विधानसभा चुनाव और अब जीएसटी। शहर में पांच सौ से ज्यादा सीसी मार्ग, नाले नालियों का निर्माण कार्य लटका है। जीएसटी में निर्माण कार्यों पर कितना टैक्स लगेगा। इसको लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। ठेकेदार इसे लेकर असमंजस में हैं और टेंडर नहीं आ रहे हैं। अधिकांश टेंडर एक जुलाई के बाद ही पड़ने के आसार हैं।
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बीडीए :
सबसे बड़े रामगंगा नगर में बीडीए ने सड़क, सीवर और नाला निर्माण के 40 करोड़ से ज्यादा के काम स्वीकृत कर रखे हैं। किसानों की जमीन अधिग्रहण के चलते प्लाट आवंटन पर पहले ही विवाद चल रहा है। 70 कमरों के समाजवादी आवास बनाने के बाद बीडीए ने यहां निर्माण कार्य एक तरह ठप कर रखे हैं। अवस्थापना निधि में स्वीकृत 20 करोड़ से ज्यादा के काम भी नहीं हो पा रहे हैं। बीडीए ने प्रथम चरण में जिन कामों के टेंडर आमंत्रित किए थे, उसमें बहुत से कामों के मानक से कम टेंडर आए। जिन कामों के टेंडर पहले हो चुके हैं, ठेकेदार जीएसटी लागू होने के बाद टैक्स कम या ज्यादा चुकाने की आशंका में शुरू नहीं कर रहे।
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पीडब्ल्यूडी :
पीडब्ल्यूडी के प्रांतीय खंड, निर्माण खंड और निर्माण खंड भवन ने दो सौ से ज्यादा जर्जर मार्गों को सामान्य और विशेष मरम्मत के लिए चिह्नित कर रखा है। अभी विभाग के इंजीनियर सरकार की प्राथमिकता वाला काम सड़कों को गड्ढामुक्त कराने में लगे हैं। गड्ढामुक्त करने के लिए पीडब्ल्यूडी को एक-एक सड़क के दो से तीन बार टेंडर प्रकाशित कराने पड़े। जब टेंडर नहीं आए तो बहुत से काम विभागीय स्तर पर करवाए गए। जीएसटी में टैक्स बढ़ने की आशंका से सामान्य और विशेष मरम्मत के लिए चयनित दो सौ से ज्यादा सड़कों पर काम नहीं शुरू हो पा रहा।